गाजियाबाद की मोदी शुगर मिल ने पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए 75.28 लाख क्विंटल गन्ने का ₹297.27 करोड़ का पूरा भुगतान कर दिया है। मिल प्रबंधन ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 में समय पर भुगतान का भरोसा जताते हुए करीब 100 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है।
गन्ना किसानों के लिए लंबे समय से सबसे बड़ा सवाल सिर्फ फसल की पैदावार नहीं, बल्कि उसका समय पर भुगतान भी रहा है। किसान खेत में महीनों मेहनत करता है, फसल मिल तक पहुंचाता है और उसके बाद उसकी नजर इस बात पर रहती है कि गन्ने का पैसा कब खाते में आएगा। ऐसे में गाजियाबाद की मोदी शुगर मिल की ओर से पिछले पेराई सत्र का पूरा गन्ना मूल्य चुकाने की घोषणा किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिल प्रबंधन के मुताबिक पेराई सत्र 2025-26 में 75.28 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की गई थी। इस गन्ने का कुल मूल्य 297.27 करोड़ रुपये था। अब मिल ने इस पूरी राशि का भुगतान कर दिया है।
यानी पिछले पेराई सत्र में किसानों से खरीदे गए गन्ने के मूल्य की पूरी देनदारी खत्म कर दी गई है।
सरकार और प्रशासन के निर्देशों के बीच हुआ भुगतान
मिल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह भुगतान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में तथा जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मादड़ के निर्देशन और मार्गदर्शन में पूरा किया गया।
मिल प्रबंधन ने पिछले पेराई सत्र के दौरान शासन-प्रशासन और किसानों के सामने यह भरोसा जताया था कि आगामी पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले पिछले सत्र के गन्ने का पूरा भुगतान कर दिया जाएगा।
अब मिल प्रबंधन का कहना है कि किया गया वादा पूरा कर दिया गया है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मिल प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ बाहरी परिस्थितियों और ग्रुप से जुड़े आंतरिक कारणों के चलते गन्ना भुगतान में देरी हुई थी। हालांकि, किसानों के विश्वास और शासन-प्रशासन के सहयोग से भुगतान से जुड़ी समस्या का समाधान कर लिया गया है।
क्या अब समय पर मिलेगा किसानों को पैसा?
पिछले वर्षों में भुगतान में देरी का सामना कर चुके किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी पेराई सत्र में भुगतान की व्यवस्था कैसी रहेगी।
मोदी शुगर मिल प्रबंधन ने भरोसा जताया है कि पेराई सत्र 2026-27 में किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान समय पर होता रहेगा।
मिल की ओर से किसानों से भी सहयोग की अपील की गई है। अध्यासी वेदपाल सिंह मलिक ने किसान भाइयों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक अपना गन्ना मोदी शुगर मिल को ही उपलब्ध कराएं।
उन्होंने उन किसानों से भी अपील की है, जिनके पास उनके सट्टे में दर्ज मात्रा से अधिक गन्ना उपलब्ध है। ऐसे किसानों को अपना अतिरिक्त सट्टा कराने के लिए कहा गया है, ताकि अतिरिक्त गन्ने की आपूर्ति को भी व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

आगामी पेराई सत्र 2026-27 को लेकर मोदी शुगर मिल ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
मिल प्रबंधन के अनुसार इस सत्र में करीब 100 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा गया है।
यह लक्ष्य पिछले सत्र में खरीदे गए 75.28 लाख क्विंटल गन्ने की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में मिल के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
इसी वजह से प्रबंधन किसानों से अपनी फसल की देखभाल करने और अधिक से अधिक गन्ना मिल को उपलब्ध कराने की अपील कर रहा है।
खेत में खड़ा गन्ना गिरने से बचाएं किसान
मिल प्रबंधन ने किसानों को सिर्फ गन्ने की आपूर्ति को लेकर ही सलाह नहीं दी, बल्कि फसल की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देने को कहा है।
किसानों से कहा गया है कि वे खेतों में खड़े गन्ने की लगातार देखभाल करते रहें। तेज हवा या अन्य परिस्थितियों में गन्ने के गिरने से फसल को नुकसान हो सकता है। इसे रोकने के लिए किसानों को गन्ने की बंधाई जरूर कराने की सलाह दी गई है।
गन्ने की फसल में किसी भी तरह के रोग के लक्षण दिखाई देने पर किसान तुरंत गन्ना विभाग से संपर्क करें। समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार होने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
मिल प्रबंधन ने किसानों और प्रशासन का जताया आभार
मोदी शुगर मिल की ओर से महाप्रबंधक डी.डी. कौशिक (पीआर) ने भुगतान पूरा कराने में सहयोग के लिए शासन, जिला प्रशासन और सभी किसान भाइयों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि भुगतान प्रक्रिया को पूरा करने में किसानों के विश्वास के साथ-साथ शासन और प्रशासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
मिल प्रबंधन ने उम्मीद जताई कि जिस तरह किसानों और प्रशासन की ओर से सहयोग मिला है, उसी तरह आगामी पेराई सत्र में भी सभी लोग मिल को सकारात्मक सहयोग देते रहेंगे।
किसानों के लिए भुगतान से आगे की चुनौती
₹297.27 करोड़ का पूरा भुगतान होना निश्चित रूप से किसानों के लिए राहत की खबर है, लेकिन अब अगली चुनौती आगामी पेराई सत्र को सुचारु रूप से चलाने और भुगतान व्यवस्था को समय पर बनाए रखने की होगी।
मिल ने करीब 100 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है। इसके लिए किसानों की पर्याप्त भागीदारी जरूरी होगी। वहीं किसानों के लिए समय पर भुगतान सबसे अहम रहेगा।
पिछले वर्षों में भुगतान में देरी की बात खुद मिल प्रबंधन ने स्वीकार की है, इसलिए अब आगामी सत्र में समय पर भुगतान का वादा उसके सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी होगी।
फिलहाल पेराई सत्र 2025-26 के 75.28 लाख क्विंटल गन्ने का ₹297.27 करोड़ पूरा भुगतान होने के बाद किसानों और मिल प्रबंधन के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक अहम कदम जरूर सामने आया है।
अब निगाहें आगामी पेराई सत्र 2026-27 पर रहेंगी—जहां एक तरफ मिल के सामने 100 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य है, वहीं किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि खेत से मिल तक पहुंची उनकी मेहनत की कीमत भी तय समय पर उनके हाथ तक पहुंचे।
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