नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री के मुताबिक करीब 300 भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है। कई राज्यों के पर्यटकों और श्रद्धालुओं से संपर्क टूट गया है। भारत सरकार ने नेपाल को राहत सामग्री भेजने के साथ राज्यों से लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने को कहा है।
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कुछ ही घंटों में हालात बदल दिए। नदियों में अचानक उफान, भूस्खलन और मलबे के तेज बहाव ने नेपाल-तिब्बत सीमा के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। सड़कें और पुल टूट गए, संचार व्यवस्था बाधित हो गई और कई इलाकों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया।
अब इस प्राकृतिक आपदा का असर भारत से जुड़ा एक बेहद चिंताजनक पहलू सामने आने के बाद और गंभीर हो गया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक करीब 300 भारतीय भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। नेपाल में मौतों का आंकड़ा भी लगातार बदल रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 800 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय भी प्रभावित
इस हादसे की सबसे चिंताजनक तस्वीर उन भारतीय श्रद्धालुओं को लेकर सामने आ रही है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे। प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था ठप होने और रास्ते टूट जाने के कारण कई यात्रियों से संपर्क स्थापित करना मुश्किल हो रहा है।
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में लापता पर्यटक कैलाश मानसरोवर और नेपाल के अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की ओर जा रहे थे। शुरुआती सूचियों में भारतीय नागरिकों की संख्या अलग-अलग समय पर अलग रही है, क्योंकि एजेंसियां लगातार नामों और संपर्कों का सत्यापन कर रही हैं।
तमिलनाडु के 37 पर्यटकों की तलाश
तमिलनाडु से नेपाल गए 57 पर्यटकों में से 37 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 20 लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार इन यात्रियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
इसी बीच ईशा फाउंडेशन से जुड़े लोगों की स्थिति को लेकर भी चिंता सामने आई। संस्था के मुताबिक उसके कई सदस्य नेपाल में प्रभावित क्षेत्र में थे और संचार बाधित होने के कारण तत्काल संपर्क नहीं हो पाया। हालांकि बड़ी संख्या में सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं।
पश्चिम बंगाल के 32 लोगों से भी संपर्क टूटा
कोलकाता से नेपाल गया 32 लोगों का एक समूह भी हादसे के बाद लापता बताया गया है। जानकारी के मुताबिक यह दल 21 अगस्त को रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। बुधवार सुबह समूह तिब्बत जाने की प्रक्रिया के लिए रसुवागढ़ी स्थित इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद था।
इसी दौरान अचानक बाढ़ और मलबे का सैलाब आया और उसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया। पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय ने प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की है।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी सामने आई जानकारी
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बीच बेंगलुरु के पांच लोग लापता बताए गए हैं। राज्य सरकार उनकी जानकारी जुटाने और नेपाल में संबंधित एजेंसियों से संपर्क करने में लगी है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने भी नेपाल में फंसे अपने पर्यटकों और श्रद्धालुओं की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। तिरुपति से नेपाल गए 28 श्रद्धालुओं के एक समूह की पहचान हुई है। अधिकारियों के मुताबिक ये सभी काठमांडू में सुरक्षित हैं।
महाराष्ट्र के सात पर्यटकों के नेपाल में फंसे होने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें मुंबई और पुणे के चार लोगों से संपर्क हो चुका है, जबकि तीन अन्य से संपर्क की कोशिश जारी है। राज्य सरकार ने 24 घंटे का कंट्रोल रूम बनाया है।
केरल के 36 पर्यटकों का दल सुरक्षित बताया गया है और वह बाढ़ प्रभावित इलाकों से दूर है। केरल सरकार ने भी अपने नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पडेस्क सक्रिय किया है। सिक्किम, ओडिशा, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ ने भी अपने नागरिकों की मदद के लिए संपर्क व्यवस्था शुरू की है।
पोखरा में फंसे राकेश टिकैत भी फ्लाइट से लौटेंगे
भारतीय किसान नेता राकेश टिकैत भी अपने साथियों के साथ नेपाल के पोखरा में फंस गए। उनके मुताबिक सड़क मार्ग से वापसी संभव नहीं है। ऐसे में अब फ्लाइट से काठमांडू और फिर दिल्ली लौटने की योजना है। उनका वाहन फिलहाल नेपाल में ही छोड़ना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को दिया मदद का भरोसा
आपदा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की और भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत ने राहत सामग्री भी नेपाल भेजी है, जिसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल हैं।
भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री में करीब 10 टन जरूरी सामान शामिल बताया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नेपाल और वहां के लोगों के साथ भारत की एकजुटता जताई है।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं:
भारतीय दूतावास, काठमांडू:
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
नेपाल पर्यटन बोर्ड की सहायता के लिए 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस नंबर 9851289445 भी जारी किए गए हैं।
वहीं, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन जारी की है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
सद्गुरु ने बताया- संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा की स्थिति पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में उनकी टीम के करीब 80 लोग मौजूद थे। इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा तीन स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी आसपास के होटलों में थे।
समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, स्पेन सहित कई देशों के लोग शामिल बताए गए। सड़कें बंद होने और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण तत्काल स्थिति की पुष्टि करना मुश्किल बना हुआ है।
विश्व बैंक ने भी सहायता का प्रस्ताव दिया
नेपाल की इस आपदा के बाद पुनर्वास, राहत और पुनर्निर्माण के लिए विश्व बैंक ने 25 अरब नेपाली रुपये की आपातकालीन वित्तीय सहायता देने की पेशकश की है।
फिलहाल नेपाल और भारत की एजेंसियां लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है—पहाड़ी इलाकों में तबाह हो चुकी सड़कें, टूटे पुल, खराब मौसम और बंद संचार व्यवस्था।
इस पूरी त्रासदी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लापता भारतीयों की वास्तविक संख्या कितनी है और उनमें से कितने लोग सुरक्षित हैं? अलग-अलग समय पर सामने आ रहे आंकड़ों के बीच सरकारें और दूतावास नामों का सत्यापन कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले घंटों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
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