रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कलेक्ट्रेट, ग्रेटर नोएडा में अभय किड्स फाउंडेशन के विशेष बच्चों ने जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को अपने हाथों से बनाई राखी बांधी। आर्या फैशन्स की संस्थापिका एवं महिला उद्यमी डॉ. खुशबू सिंह के सहयोग से बच्चों को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उन्हें हुनरमंद, आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस दौरान DM मेधा रूपम ने बच्चों से आत्मीय बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया और इस पहल की सराहना की।

ग्रेटर नोएडा। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कलेक्ट्रेट, ग्रेटर नोएडा में अभय किड्स फाउंडेशन के विशेष बच्चों ने आर्या फैशन्स की संस्थापिका एवं महिला उद्यमी डॉ. खुशबू सिंह के साथ उत्साह और हर्षोल्लास से रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान बच्चों ने जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को अपने हाथों से तैयार की गई राखियां बांधकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
आर्या फैशन्स की ओर से अभय किड्स फाउंडेशन के ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम और अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
रक्षाबंधन से पहले बच्चों को विशेष रूप से राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए सुंदर राखियां तैयार कीं। रक्षाबंधन के अवसर पर जब बच्चों ने जिलाधिकारी मेधा रूपम को ये राखियां बांधीं, तो उनके चेहरों पर खुशी, आत्मविश्वास और उपलब्धि का भाव साफ नजर आया।
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके द्वारा बनाई गई राखियों की सराहना की। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए आर्या फैशन्स की ओर से चलाए जा रहे हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी प्रशंसा की।

इस अवसर पर डॉ. खुशबू सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास हर उस वर्ग के लिए है, जो समाज से अछूता रह जाता है, विशेषकर विशेष बच्चे। हमारा उद्देश्य है कि ये बच्चे हुनर सीखकर आत्मसम्मान के साथ जीवन जिएं। आज इन बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उपलब्धि का भाव ही हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।”
अभय किड्स फाउंडेशन की प्रधानाचार्या दिशा कपूर ने भी आर्या फैशन्स के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कौशल प्रशिक्षण से विशेष बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचानने तथा आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
यह रक्षाबंधन समारोह केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं रहा, बल्कि विशेष बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रेरणादायक पहल के रूप में भी सामने आया।
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