नोएडा में सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक आखिरकार यात्रियों के लिए शुरू हो गया है। करीब 460 मीटर लंबे इस स्काईवॉक को बनाने में लगभग 33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। रक्षाबंधन के दिन ट्रायल बेस पर शुरू किए गए इस स्काईवॉक का पहले ही दिन 45 हजार से अधिक यात्रियों ने इस्तेमाल किया।
नोएडा में मेट्रो यात्रियों के लिए लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वह सुविधा शुरू हो गई, जिसका इंतजार पिछले करीब तीन साल से किया जा रहा था। सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक अब आम यात्रियों के लिए खोल दिया गया है। रक्षाबंधन के मौके पर नोएडा प्राधिकरण ने बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के इसे ट्रायल बेस पर जनता के लिए शुरू कर दिया।
सबसे खास बात यह है कि इस स्काईवॉक के शुरू होने के बाद अब एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन से ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन तक का सफर करीब पांच मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यानी जिन यात्रियों को दोनों मेट्रो कॉरिडोर के बीच आने-जाने में परेशानी होती थी, उनके लिए अब सफर काफी आसान और सुविधाजनक होने वाला है।
पहले दिन ही 45 हजार से ज्यादा यात्रियों ने किया इस्तेमाल
स्काईवॉक के शुरू होने के बाद यात्रियों की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। रक्षाबंधन के पहले दिन ही 45 हजार से अधिक यात्रियों ने इसका इस्तेमाल किया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों के बीच इस कनेक्टिविटी की कितनी जरूरत थी।

अब तक दोनों स्टेशनों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को संकरे और भीड़भाड़ वाले पैदल रास्ते से गुजरना पड़ता था। रास्ते में ऑटो और ई-रिक्शा के साथ-साथ सड़क किनारे मौजूद दुकानदारों और विक्रेताओं की वजह से भी पैदल चलने में परेशानी होती थी। खासकर बारिश और गर्मी के मौसम में यह रास्ता यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था।
AC की ठंडक के साथ ट्रैवलेटर की सुविधा
नया स्काईवॉक यात्रियों को सिर्फ धूप और बारिश से बचाने तक सीमित नहीं है। इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। करीब 460 मीटर लंबे और छह मीटर चौड़े इस AC स्काईवॉक में यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 10 ट्रैवलेटर लगाए गए हैं।
ये ट्रैवलेटर लगभग हर 50 मीटर की दूरी पर लगाए गए हैं। इसके चलते यात्रियों को पूरे रास्ते पैदल चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है।
AC स्काईवॉक की लागत 25 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ रुपये पहुंची
जिस परियोजना को शुरुआती तौर पर करीब 25 करोड़ रुपये की लागत में तैयार किया जाना था, उसकी लागत बाद में बढ़कर लगभग 33 करोड़ रुपये हो गई। परियोजना का निर्माण मार्च 2023 में शुरू हुआ था और इसे महज छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
लेकिन जमीन पर काम आगे बढ़ने के साथ परियोजना के सामने एक के बाद एक कई अड़चनें आती गईं। डिजाइन में बदलाव, मेट्रो केबल से जुड़ी दिक्कत, बीम से संबंधित समस्या, NGT प्रतिबंध और अन्य तकनीकी कारणों के चलते काम लगातार प्रभावित होता रहा।
नतीजा यह हुआ कि तय समयसीमा के बाद नई डेडलाइन दी जाती रही और देखते ही देखते एक नहीं, बल्कि करीब 10 डेडलाइन खत्म हो गईं। यही वजह है कि तीन साल पहले शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट लंबे समय तक यात्रियों की नजरों से दूर रहा।

नोएडा प्राधिकरण की ACEO वंदना त्रिपाठी के मुताबिक स्काईवॉक के जरूरी काम पूरे होने के बाद इसे ट्रायल बेस पर खोलने के आदेश दिए गए हैं। अभी इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं किया गया है।
प्राधिकरण का कहना है कि ट्रायल के दौरान यात्रियों और तकनीकी टीम से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे। इसके बाद इसका आधिकारिक उद्घाटन किया जा सकता है।
यानी फिलहाल यात्रियों को सुविधा मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन परियोजना को पूरी तरह अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी जारी है।
बारिश में सबसे ज्यादा राहत की उम्मीद
इस AC स्काईवॉक के शुरू होने से सबसे बड़ी राहत उन यात्रियों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें एक्वा लाइन और ब्लू लाइन के बीच बदलने के लिए बाहर खुले रास्ते से गुजरना पड़ता था। बरसात के दिनों में दोनों स्टेशनों के बीच पैदल सफर करना काफी मुश्किल हो जाता था।
अब यात्रियों को AC से लैस कवर रास्ता मिलेगा और दोनों स्टेशनों के बीच की दूरी करीब पांच मिनट में तय की जा सकेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस स्काईवॉक पर यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
तीन साल बाद पूरी हुई इंतजार की कहानी
मार्च 2023 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट कई बार अपनी डेडलाइन से पीछे गया। लागत बढ़ी, डिजाइन में बदलाव हुए और तकनीकी अड़चनें सामने आईं। करीब तीन साल के इंतजार के बाद आखिरकार रक्षाबंधन पर इसे यात्रियों के लिए खोल दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह AC स्काईवॉक नोएडा के दो प्रमुख मेट्रो कॉरिडोर के बीच सफर की पुरानी परेशानी को हमेशा के लिए खत्म कर पाएगा? पहले दिन 45 हजार से ज्यादा यात्रियों का इस्तेमाल फिलहाल तो यही संकेत दे रहा है कि यात्रियों को इस सुविधा का लंबे समय से इंतजार था।
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