दिल्ली पुलिस की आउटर जिला एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने अंतरराज्यीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 765.6 किलोग्राम गांजा, 4 लाख रुपये नकद, 126 ग्राम सोने के आभूषण और 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपियों का 36 घंटे तक कई राज्यों में पीछा करने के बाद पंजाब से गिरफ्तारी की गई। मामले की जांच अब पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने के लिए जारी है।
केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में दिल्ली पुलिस की आउटर जिला एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ड्रग्स तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप मंगाकर पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों में सप्लाई करता था। इस कार्रवाई में 765.6 किलोग्राम गांजा, जिसकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये बताई जा रही है, बरामद किया गया है। साथ ही चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इस पूरे ऑपरेशन की खास बात यह रही कि पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी का लगातार 36 घंटे तक कई राज्यों में पीछा किया और आखिरकार उसे पंजाब के लुधियाना में धर दबोचा।
गुप्त सूचना से शुरू हुआ ऑपरेशन
दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड को 20 जून 2026 को एक गोपनीय सूचना मिली थी कि दिल्ली में गांजे की बड़ी खेप की सप्लाई होने वाली है। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंधु ने एसीपी (ऑपरेशंस) के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया।
टीम ने पीतमपुरा स्थित मधुबन चौक के पास निगरानी शुरू की। इसी दौरान पुलिस ने दो बैग लेकर जा रहे अशोक कुमार को हिरासत में लिया। मौके पर एफएसएल टीम को बुलाकर दोनों बैगों की जांच कराई गई, जिसमें 22.610 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
इसके बाद थाना रानी बाग में एफआईआर संख्या 197/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(C) में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में खुला पुराने नेटवर्क का राज
पूछताछ के दौरान अशोक कुमार ने बताया कि वह पहले भी गांजे की बड़ी खेप की ढुलाई में शामिल रह चुका है। पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2023 में हरियाणा के गुरुग्राम के फऱ्रुखनगर थाना क्षेत्र में 285 किलोग्राम गांजा बरामदगी के मामले में भी वह गिरफ्तार हो चुका था।
आगे की पूछताछ में उसने बताया कि गांजे की सप्लाई अजीत सिंह नामक व्यक्ति करता है, जो ओडिशा से माल भेजता है।
'अजीत सिंह' निकला फर्जी नाम
वित्तीय जांच और तकनीकी निगरानी के दौरान पुलिस को पता चला कि अजीत सिंह वास्तव में बिहार के पटना निवासी इंदरजीत राय है, जो ड्रग्स कारोबार में अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम का इस्तेमाल करता था।
9 जुलाई 2026 से पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी शुरू की। इंदरजीत राय बिहार से अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए आगे बढ़ रहा था। पुलिस टीमों ने उसका 36 घंटे तक लगातार पीछा किया। इस दौरान उसकी लोकेशन बिहार, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक ट्रैक की गई।
लुधियाना से दो आरोपी गिरफ्तार
लगातार तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने 10 जुलाई को पंजाब के लुधियाना में इंदरजीत राय और उसके साथी नीतीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि गांजे की बड़ी खेप लुधियाना के जमालपुर इलाके में किराए के एक गोदाम में छिपाकर रखी गई है।
गोदाम से मिला 743 किलो गांजा
सूचना मिलते ही पुलिस ने जमालपुर स्थित गोदाम पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां से 743 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। मौके से इंदरजीत राय का सहयोगी धर्मेंद्र कुमार भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले बरामद 22.610 किलोग्राम और गोदाम से मिले 743 किलोग्राम गांजे को मिलाकर कुल 765.6 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये है।
हरियाणा और पंजाब में होती थी सप्लाई
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे लुधियाना के किराए के गोदाम का इस्तेमाल गांजे की बड़ी खेप छिपाने के लिए करते थे। इसके बाद जरूरत के अनुसार हरियाणा और पंजाब के विभिन्न इलाकों में इसकी सप्लाई की जाती थी।
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से नशे की तस्करी कर रहा था और इसके तार अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।
क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया है—
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765.6 किलोग्राम गांजा
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4 लाख रुपये नकद
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126 ग्राम सोने के आभूषण
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8 मोबाइल फोन, जिनका इस्तेमाल तस्करी के नेटवर्क को संचालित करने में किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—
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अशोक कुमार (40 वर्ष) निवासी शकूरपुर, दिल्ली
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इंदरजीत राय उर्फ अजीत (38 वर्ष) निवासी पटना, बिहार
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नीतीश कुमार (35 वर्ष) निवासी पटना, बिहार
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धर्मेंद्र कुमार (34 वर्ष) निवासी लुधियाना, पंजाब
के रूप में हुई है।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद गांजे की खेप का वास्तविक स्रोत क्या था और इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस वित्तीय लेन-देन, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे सप्लाई चेन का खुलासा किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा ड्रग्स तस्करी से जुड़े अन्य राज्यों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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