दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत और 12 लोगों के रेस्क्यू के बाद अब आसपास की इमारतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हादसे के बाद MCD ने प्लॉट P-14 के बराबर वाली P-13 इमारत को भी खतरनाक घोषित कर दिया है। निगम ने मालिक को तीन दिन के भीतर बिल्डिंग खाली कराकर ध्वस्त करने का आदेश दिया है। तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो MCD खुद इमारत गिराएगा और उसका खर्च मालिक से टैक्स बकाये के रूप में वसूला जाएगा।
दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से मची तबाही के बाद अब खतरा सिर्फ उस इमारत तक सीमित नहीं रह गया है। जिस इमारत के गिरने से छह लोगों की जान चली गई, उसके ठीक बराबर वाली इमारत में भी नुकसान और दरारें सामने आई हैं। इसके बाद दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने बड़ा फैसला लेते हुए P-13 बिल्डिंग को खतरनाक घोषित कर दिया है।
निगम ने साफ कर दिया है कि अब इस इमारत को खाली कराकर गिराना होगा। इसके लिए मालिक को महज तीन दिन का समय दिया गया है। अगर इस समय सीमा के भीतर इमारत नहीं तोड़ी गई तो MCD खुद कार्रवाई करेगा।
P-14 के बाद P-13 पर मंडराया खतरा
सत्य निकेतन के प्लॉट P-14 में बनी पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान भी चलाया गया।
इसी दौरान जब आसपास की इमारतों की स्थिति की जांच की गई तो P-14 के ठीक बराबर वाली P-13 इमारत में भी नुकसान और दरारें सामने आईं। MCD ने इसे वहां रहने वाले लोगों और आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए संभावित खतरा माना है।
निगम के मुताबिक, हादसे के बाद ऐसी किसी भी इमारत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जो संरचनात्मक रूप से कमजोर या असुरक्षित दिखाई दे रही हो।

MCD के दक्षिण जोन के ग्रीन पार्क कार्यालय के कार्यकारी अभियंता (बिल्डिंग)-I ने 6 सितंबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया।
यह कार्रवाई दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348 के तहत की गई है। आदेश में बिल्डिंग मालिक को निर्देश दिया गया है कि नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर इमारत को खाली कराकर ध्वस्त कराया जाए।
यानी अब P-13 में रहने या उसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को वहां से बाहर निकलना होगा। निगम ने यह कदम संभावित खतरे को देखते हुए उठाया है।
समय पर नहीं तोड़ी तो MCD खुद गिराएगा
MCD ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर मालिक निर्धारित समय में बिल्डिंग को नहीं गिराता है तो निगम खुद उसे ध्वस्त कराएगा।
इतना ही नहीं, इस पूरी कार्रवाई में आने वाला demolition charges भी मालिक से वसूला जाएगा। यह राशि टैक्स के बकाये के तौर पर वसूल किए जाने की बात कही गई है।
इस फैसले से साफ है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद निगम अब आसपास की असुरक्षित इमारतों को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता।
CM रेखा गुप्ता ने भी दिए सख्त निर्देश
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ राहत-बचाव एवं सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उनके मुताबिक, शुरुआती तौर पर बिल्डिंग मालिक की लापरवाही सामने आई है। उन्होंने बताया कि इमारत काफी पुरानी थी और बेसमेंट में पानी भरने के कारण पिलर कमजोर होकर गिर गए, जिसके बाद पूरी इमारत ढह गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आसपास मौजूद दूसरी खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें भी गिराया जाएगा। ठीक पीछे वाली इमारत को खाली कराने के बाद उसे तत्काल गिराने की बात भी उन्होंने कही थी।

सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार अब सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों को लेकर नई नीति बनाने की तैयारी में है।
CM रेखा गुप्ता के मुताबिक, PG, नर्सिंग होम, स्कूल और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन जरूरी किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने वाली इमारतों में सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति को असुरक्षित PG में रहने नहीं दिया जाएगा। हादसे के बाद जिन लोगों को इमारतों से बाहर निकाला गया है, उनके लिए कॉलेज हॉस्टल में रहने की व्यवस्था किए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी सरकारी अधिकारी की निगरानी में कमी, लापरवाही या किसी दूसरी गलती के कारण यह स्थिति बनी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
हादसे के बाद लिए गए फैसलों में भवन मालिक के खिलाफ FIR, जिम्मेदार पाए जाने वाले MCD अधिकारियों पर कार्रवाई, दिल्ली में पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील करने के निर्देश और आसपास के PG तथा दूसरी इमारतों की सघन जांच शामिल है।
नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित इमारतों को सील किया जाएगा।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि P-13 इमारत को कब गिराया जाएगा। बड़ा सवाल यह है कि सत्य निकेतन जैसी कितनी और इमारतें ऐसी हैं, जिनकी मजबूती पर कभी गंभीरता से जांच नहीं हुई। P-14 के मलबे से उठे सवालों के बीच P-13 में आई दरारों ने दिल्ली की पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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