नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में अब फायर विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। SIT जांच में जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में अब फायर विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। हादसे को लेकर पहले ही नोएडा अथॉरिटी, बिल्डरों और सिंचाई विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब जांच की आंच फायर विभाग तक भी पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार नोएडा फायर विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) प्रदीप कुमार चौबे और नॉलेज पार्क क्षेत्र में तैनात फायर स्टेशन ऑफिसर (FSO) विनोद कुमार पांडे की घोर लापरवाही उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि CFO प्रदीप कुमार चौबे बीते तीन वर्षों से नोएडा में तैनात हैं, बावजूद इसके बड़े और संवेदनशील निर्माण स्थलों की फायर सेफ्टी और आपात स्थिति को लेकर प्रभावी निगरानी नहीं की गई।

वहीं, नॉलेज पार्क में अटैच FSO विनोद कुमार पांडे की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि जिस निर्माणाधीन साइट पर यह हादसा हुआ, वहां फायर सेफ्टी और रेस्क्यू से जुड़े मानकों की नियमित जांच नहीं की गई।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए जब मीडिया या जांच से जुड़ी टीमें इन अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करती हैं, तो ये अधिकारी खुद को “व्यस्त” बताकर कॉल उठाना भी जरूरी नहीं समझते। इससे उनकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर और अधिक संदेह गहराता जा रहा है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा में लापरवाही से हुई इस मौत को लेकर सख़्त रुख अपनाए हुए हैं। यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है और सूत्रों के अनुसार जांच में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
अब सवाल यह है कि युवराज की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी और क्या फायर विभाग की इस लापरवाही पर भी सख़्त फैसला लिया जाएगा?
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