नोएडा और ग्रेटर नोएडा में साइबर ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर दो बुजुर्ग महिलाओं को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट करने का डर दिखाकर कुल 44 लाख रुपये ठग लिए। नोएडा सेक्टर-29 की रिटायर्ड कर्नल की पत्नी को कथित तौर पर 7 दिन तक और ग्रेटर नोएडा की महिला को 2 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। ठगों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा, वीडियो कॉल पर ऑनलाइन सुनवाई का नाटक किया और संपत्ति की जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर कराई। पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सोचिए, आपके फोन पर अचानक मुंबई क्राइम ब्रांच के नाम से कॉल आए। सामने वाला खुद को पुलिस अधिकारी बताए और कहे कि आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल किसी बैंक खाते में करोड़ों रुपये के लेनदेन के लिए हुआ है। फिर आपको मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने, गिरफ्तार करने और जेल भेजने की धमकी दी जाए।
घबराहट में आप सफाई देने की कोशिश करें और सामने वाला आपको एक कथित गिरफ्तारी वारंट भेज दे।
इसके बाद वीडियो कॉल पर वर्दी पहने लोग पुलिस अधिकारी बनकर पूछताछ शुरू कर दें और कहें कि मामला इतना गंभीर है कि आपको किसी से बात तक नहीं करनी है।
नोएडा में एक बुजुर्ग महिला के साथ कथित तौर पर कुछ ऐसा ही हुआ। साइबर ठगों ने उन्हें सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखने का दावा किया और उनकी जमा पूंजी में से 20 लाख रुपये जांच के नाम पर ट्रांसफर करा लिए।
लेकिन कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इसी तरह दो बुजुर्ग महिलाओं से कुल 44 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है।
रिटायर्ड कर्नल की पत्नी को बनाया निशाना
नोएडा सेक्टर-29 की रहने वाली रिटायर्ड कर्नल की पत्नी के पास 6 अगस्त को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताया।
ठग ने महिला से कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग करके एक बैंक खाता खोला गया है और उस खाते में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
महिला ने खुद को निर्दोष बताते हुए जब इस आरोप से इनकार किया तो ठगों ने डर का अगला दरवाजा खोल दिया।
उन्हें कथित तौर पर वॉट्सऐप पर गिरफ्तारी का वारंट भेज दिया गया।
इसके बाद महिला को बताया गया कि मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और इसमें उनका नाम शामिल हो चुका है।
‘राष्ट्र सुरक्षा का मामला है, किसी को मत बताना’
साइबर ठगों ने महिला को इतना डरा दिया कि वह परिवार से भी अपनी परेशानी साझा न कर सकें।
उन्हें कथित तौर पर यह चेतावनी दी गई कि मामला राष्ट्र सुरक्षा से जुड़ा है और अगर उन्होंने किसी रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को इसकी जानकारी दी तो उसका नाम भी केस में शामिल कर दिया जाएगा।
इसके बाद वीडियो कॉल पर दूसरे ठगों ने पुलिस अधिकारियों की भूमिका निभानी शुरू कर दी।
कथित तौर पर वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की गई और ऑनलाइन सुनवाई का नाटक रचा गया।
महिला को समझाया गया कि वह खुद को इस मामले से बचाना चाहती हैं तो उनकी संपत्ति और बैंक खातों की जांच करनी होगी।
यहीं से साइबर ठगों ने रकम ऐंठने का सिलसिला शुरू किया।
‘RBI के खातों’ के नाम पर 20 लाख ट्रांसफर
ठगों ने कथित तौर पर महिला को कुछ बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा। उसे जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया और यह भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।
बताया गया है कि 12 अगस्त तक महिला से करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
लेकिन जब रकम वापस नहीं आई और ठगों ने दोबारा पैसे की मांग शुरू कर दी तो महिला को शक हुआ।
इसके बाद उन्होंने एक रिश्तेदार को पूरी बात बताई।
तब परिवार को पता चला कि महिला किसी सरकारी जांच में नहीं, बल्कि साइबर ठगों के जाल में फंस चुकी थीं।
ग्रेटर नोएडा में भी दोहराया गया वही खेल
दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा की रहने वाली अनीता से जुड़ा है।
शिकायत के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2025 को उनके पास एक व्यक्ति ने दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बनकर फोन किया। उनसे कहा गया कि उनका सिम कार्ड दो घंटे के भीतर बंद हो जाएगा।
जब महिला ने इसका कारण पूछा तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया गया है।
इसके बाद फोन काट दिया गया।
लेकिन कुछ समय बाद कहानी का अगला किरदार सामने आया।
एक अन्य ठग ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताया और कहा कि महिला के आधार कार्ड का दुरुपयोग करके सिम कार्ड लिया गया है।
फिर इसी आधार पर एक बैंक खाता खोलकर मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने की बात कही गई।
फर्जी वारंट, ऑनलाइन सुनवाई और गिरफ्तारी का डर
ग्रेटर नोएडा की महिला को भी कथित तौर पर गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
उन्हें वारंट भेजा गया और पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पूछताछ की गई। इसके बाद ऑनलाइन सुनवाई का नाटक किया गया।
ठगों ने महिला को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह एक गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुकी हैं।
इसके बाद संपत्ति की जांच के नाम पर उनसे रकम ट्रांसफर कराई गई।
बताया गया है कि इस तरह दोनों महिलाओं से कुल 44 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए।
जब ग्रेटर नोएडा की महिला से भी लगातार रकम मांगी जाने लगी तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने परिवार को पूरी जानकारी दी। परिवार के सामने मामला आने के बाद ठगों ने संपर्क तोड़ दिया।
पुलिस ने शुरू की जांच, बैंक खातों की पड़ताल
ठगी का पता चलने के बाद दोनों महिलाओं ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर क्राइम थाना पुलिस से संपर्क किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल के मुताबिक, पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मामले दर्ज किए गए हैं और जांच कराई जा रही है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए और रकम ट्रांसफर किए गए बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के पीछे कौन लोग हैं, रकम कहां ट्रांसफर हुई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ता साइबर डर
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि साइबर ठग अब सिर्फ पैसे मांगकर ठगी नहीं करते। वे पुलिस, क्राइम ब्रांच, दूरसंचार विभाग और न्यायिक प्रक्रिया तक की फर्जी कहानी तैयार करके सामने वाले को मानसिक रूप से इतना डरा देते हैं कि पीड़ित अपने ही पैसे उनके बताए खातों में भेज देता है।
फर्जी वर्दी, फर्जी वारंट, वीडियो कॉल पर पूछताछ और ऑनलाइन सुनवाई का नाटक—इन सबका मकसद एक ही था, पीड़ितों को यह विश्वास दिलाना कि सामने कोई असली सरकारी अधिकारी है।
लेकिन असली सवाल यही है कि अगर समय रहते परिवार से बातचीत हो जाती, तो क्या लाखों रुपये बच सकते थे?
नोएडा के इन दोनों मामलों में ठगों ने डर को हथियार बनाया और भरोसे को निशाना।
अब पुलिस की जांच यह बताएगी कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन है और 44 लाख रुपये की इस ठगी की रकम आखिर कहां पहुंची।
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