नोएडा में बंद पड़े मकानों और फ्लैटों को निशाना बनाकर चोरी करने वाले कथित गिरोह का सेक्टर-113 पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने दो पुरुषों और एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से सोने-चांदी के जेवर, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट और वारदात में इस्तेमाल अर्टिगा कार बरामद की गई है। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
नोएडा में अगर आपका घर कई दिनों से बंद है, परिवार कहीं बाहर गया हुआ है या फ्लैट में कोई मौजूद नहीं है, तो चोरों की नजर आप तक पहुंच सकती है। कम से कम सेक्टर-113 पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आई कहानी तो यही इशारा करती है।
पुलिस ने बंद पड़े मकानों को कथित तौर पर निशाना बनाकर चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो पुरुष और एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास से चोरी का सामान बरामद हुआ है, जिसमें सोने-चांदी के जेवर, पांच लैपटॉप और दो टैबलेट शामिल हैं। इसके अलावा चोरी की वारदात में इस्तेमाल की गई एक अर्टिगा कार भी पुलिस ने बरामद की है।
लेकिन इस गिरोह के काम करने का तरीका जानकर मामला और गंभीर नजर आता है।
पहले सोसाइटी में पहुंचते थे, फिर तलाशते थे बंद मकान
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे पहले अलग-अलग सोसाइटियों में जाकर बंद पड़े मकानों की रेकी करते थे।
यानी चोरी सीधे नहीं की जाती थी।
पहले यह देखा जाता था कि कौन सा मकान कई दिनों से बंद है, वहां आवाजाही कितनी है और किस समय घर में कोई मौजूद नहीं रहता।
रेकी के बाद आरोपी दोबारा मकान के आसपास पहुंचते थे और कथित तौर पर मास्क लगाकर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
यही तरीका इस गिरोह को दूसरे सामान्य चोरों से अलग बनाता था। पुलिस के अनुसार गिरोह की नजर खासतौर पर उन घरों पर रहती थी जहां परिवार के लंबे समय तक बाहर रहने की संभावना होती थी।

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि चोरी करने के बाद वे सामान को आपस में बांट लेते थे।
चोरी किए गए सामान में ज्वेलरी, नकदी, मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे कीमती सामान शामिल होते थे।
यानी जिस घर को निशाना बनाया जाता, वहां से आसानी से ले जाए जा सकने वाली महंगी चीजों को प्राथमिकता दी जाती थी।
पुलिस ने फिलहाल आरोपियों के पास से सोने-चांदी के जेवर के साथ पांच लैपटॉप और दो टैबलेट बरामद किए हैं।
अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि बरामद सामान किन-किन घटनाओं से जुड़ा है और गिरोह ने अब तक कितने घरों को निशाना बनाया है।
मुखबिर की सूचना से पुलिस के हाथ लगा सुराग
गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर चलाए जा रहे नियंत्रण अभियान के तहत सेक्टर-113 पुलिस को इस गिरोह के बारे में सूचना मिली।
इसके बाद पुलिस टीम ने सूचना को विकसित किया और सेक्टर-123 के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान पुलिस के अनुसार कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू की और उनके कथित चोरी के तरीके के बारे में जानकारी जुटाई।
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के रेकी करने और बंद मकानों को निशाना बनाने के तरीके के बारे में जानकारी मिली।
अर्टिगा कार भी बरामद, अब वाहन की भूमिका की जांच
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अर्टिगा कार भी बरामद की है।
बताया गया है कि इस वाहन का इस्तेमाल वारदात में किया जाता था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कार का इस्तेमाल किन-किन घटनाओं में किया गया और क्या चोरी के बाद सामान को ले जाने में भी इसी वाहन का इस्तेमाल होता था।
अगर वाहन से जुड़ी अन्य घटनाओं का लिंक सामने आता है तो पुलिस जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

इस कार्रवाई में दो पुरुषों के साथ एक महिला की गिरफ्तारी भी हुई है।
ऐसे में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि तीनों की गिरोह में अलग-अलग क्या भूमिका थी।
कौन रेकी करता था?
कौन मकान के आसपास निगरानी रखता था?
कौन चोरी की वारदात को अंजाम देता था?
और चोरी के बाद सामान को कहां खपाया जाता था?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच में सामने आ सकते हैं।
क्या और भी वारदातों से जुड़े हैं आरोपी?
पुलिस अब सिर्फ इस गिरफ्तारी तक मामला सीमित नहीं रख रही है।
आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह में इनके अलावा और लोग शामिल हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नोएडा और आसपास के इलाकों में बंद मकानों में हुई चोरी की दूसरी घटनाओं से इन आरोपियों का कोई संबंध है या नहीं।
अगर पुराने मामलों में इनकी भूमिका सामने आती है तो पुलिस को कई अनसुलझी चोरी की घटनाओं का सुराग मिल सकता है।

इस घटना के बाद सोसाइटी में रहने वाले लोगों के लिए भी यह एक चेतावनी है।
अगर कोई परिवार कई दिनों के लिए घर बंद करके बाहर जाता है, तो आसपास के लोगों और सुरक्षा व्यवस्था को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
सोसाइटी में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखना, सुरक्षा गार्डों की सतर्कता बढ़ाना और लंबे समय तक बंद रहने वाले फ्लैटों की निगरानी करना चोरी की घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है।
हालांकि सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ आम लोगों की नहीं है। सोसाइटी प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
अब पुलिस की नजर गिरोह के नेटवर्क पर
सेक्टर-113 पुलिस की कार्रवाई में तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और चोरी का सामान भी बरामद किया गया है।
लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है।
अब पुलिस के सामने तीन बड़े सवाल हैं—
कितने बंद मकानों की रेकी की गई?
कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया गया?
और इस गिरोह से जुड़े बाकी लोग कौन हैं?
पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनसे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई बंद पड़े मकानों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है।
यानी तीन गिरफ्तारियों के बाद अब अगली नजर उन संभावित वारदातों पर है, जिनका राज इस गिरोह से पूछताछ के दौरान खुल सकता है।
क्योंकि कहानी अभी सिर्फ तीन गिरफ्तारियों पर खत्म नहीं होती… असली सवाल यह है कि नोएडा में बंद मकानों की रेकी करने वाला यह गिरोह आखिर कितने घरों तक पहुंच चुका था।
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