झारखंड के गिरिडीह स्थित पारसनाथ पर्वतराज यानी श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विश्व जैन संगठन ने नोएडा में प्रेस वार्ता की। संगठन ने प्रवेशद्वार पर यात्रियों के पंजीकरण, सामान की जांच, स्कैनर-बैरियर, CCTV और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। साथ ही पर्वतराज पर बाइक संचालन, नशे, प्लास्टिक और फिल्मी गानों पर रील बनाने जैसी गतिविधियों पर रोक की मांग उठाई। संगठन ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया।
झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पर्वतराज, जिसे जैन समाज में श्री सम्मेद शिखर जी के नाम से सर्वोच्च जैन तीर्थ के रूप में श्रद्धा प्राप्त है, उसकी पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। लेकिन इस बार मुद्दा सिर्फ तीर्थस्थल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। जैन समाज का आरोप है कि पर्वतराज पर धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत गतिविधियां बढ़ रही हैं और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो इसका सीधा असर तीर्थ की पवित्रता और प्राकृतिक वातावरण पर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को नोएडा मीडिया क्लब में विश्व जैन संगठन की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। संगठन के अध्यक्ष संजय जैन ने केंद्र सरकार के वन मंत्रालय और झारखंड सरकार से श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाने की मांग की।
20 तीर्थंकरों की मोक्षभूमि, इसलिए हर कण पूजनीय
विश्व जैन संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, पारसनाथ पर्वतराज जैन धर्म के लिए सामान्य धार्मिक स्थल नहीं है। जैन मान्यताओं और प्राचीन जैन शास्त्रों के अनुसार, 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र भूमि से मोक्ष प्राप्त किया था। यही वजह है कि पूरे पर्वतराज का कण-कण जैन समाज के लिए पूजनीय माना जाता है।
संगठन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों, पुरातत्व विभाग, झारखंड सरकार तथा केंद्रीय वन मंत्रालय की ओर से भी श्री सम्मेद शिखर जी पारसनाथ पर्वतराज को जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों और अनंत संतों की सर्वोच्च एवं पवित्र मोक्षस्थली के रूप में सम्मान दिया गया है। ऐसे में इसकी धार्मिक गरिमा और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि सभी की जिम्मेदारी है।

संजय जैन ने कहा कि पर्वतराज के प्रवेशद्वार पर यात्रियों का पंजीकरण, सामान की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रवेशद्वार पर स्कैनर, बैरियर और सामान जांच चेक पोस्ट स्थापित करने की मांग की।
इसके साथ ही पर्वतराज पर CCTV कैमरों का व्यापक नेटवर्क स्थापित करने की मांग भी रखी गई है, ताकि वहां आने-जाने वालों पर निगरानी रखी जा सके और किसी भी गैर-धार्मिक या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
अश्लील वीडियो, नशा और बाइक संचालन पर रोक की मांग
प्रेस वार्ता में संगठन ने दावा किया कि सुरक्षा और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण पर्वतराज पर फिल्मी गानों पर अश्लील वीडियो और रील बनाए जाने, नशा करने, बाइक चलाने और अन्य गैर-धार्मिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।
जैन संगठन ने मांग की है कि पर्वतराज पर बाइक संचालन, किसी भी प्रकार के नशे, प्लास्टिक सामग्री के उपयोग और फिल्मी गानों पर वीडियो या रील बनाने पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके अलावा वंदना मार्ग को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी की गई।
सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी पर संगठन का स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। संगठन के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि पर्वतराज की पवित्रता को लेकर संगठन की ओर से की जा रही मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी प्रचारित की जा रही है और इस मुद्दे को अनावश्यक विवाद का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की मांगें मधुबन के स्थानीय समाज, किसी संस्था, किसी नेता या किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से किसी स्थानीय समाज, संस्था, नेता या किसी पार्टी विशेष के विरुद्ध न तो कोई बयान दिया गया है और न ही ऐसी कोई मांग की गई है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए विशेष प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
जैन समाज ने कहा- किसी धर्म या संस्कृति का विरोध नहीं
संगठन के महामंत्री राहुल जैन, राष्ट्रीय मंत्री अनुज जैन और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आकाश जैन ने कहा कि श्री सम्मेद शिखर जी की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए इसकी पवित्रता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं संगठन की नोएडा शाखा अध्यक्ष के.के. जैन, सम्मानित सदस्य वीरेंद्र जैन और अभिषेक जैन, युवा प्रकोष्ठ के महामंत्री सागर जैन, नोएडा सेक्टर-27 जैन मंदिर के प्रधान पवन कुमार जैन, सेक्टर-50 जैन मंदिर के प्रधान प्रदीप चंद्र जैन, सीए विपुल जैन, लक्ष्मी नगर शाखा अध्यक्ष अतुल जैन एडवोकेट समेत अन्य जैन संस्थाओं के पदाधिकारियों और समाज के गणमान्य लोगों ने भी पर्वतराज की पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि जैन समाज किसी भी धर्म या संस्कृति का विरोध नहीं करता। संगठन की अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि जिस तरह दूसरे धार्मिक स्थलों की आस्था और मर्यादा का सम्मान किया जाता है, उसी तरह तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी की धार्मिक पवित्रता और पर्यावरण की रक्षा के लिए भी सभी सहयोग करें।
अब सवाल यह है कि केंद्र और झारखंड सरकार इन मांगों पर किस स्तर की व्यवस्था करती है और क्या पर्वतराज की धार्मिक गरिमा के साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? क्योंकि मामला केवल एक तीर्थस्थल की सुरक्षा का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्र के संरक्षण से भी जुड़ा है।
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