नोएडा के सेक्टर-63 थाना पुलिस ने मोबाइल फोन स्नैचिंग, चोरी और टप्पेबाजी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 98 चोरी के मोबाइल फोन, 100 डिस्प्ले, 207 बैटरियां, 103 बैक पैनल, 40 मोबाइल कवर, 10 पेचकस, एक अवैध चाकू और दिल्ली से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य चोरी किए गए मोबाइल फोन को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर बाजार में बेच देते थे।
नोएडा में लगातार बढ़ रही मोबाइल स्नैचिंग और चोरी की घटनाओं के बीच सेक्टर-63 थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गुप्त सूचना और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो राह चलते लोगों को निशाना बनाकर उनके मोबाइल फोन छीनता था और बाद में उन्हें अलग-अलग हिस्सों में बेच देता था।
पुलिस के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को सेक्टर-63 क्षेत्र में गश्त के दौरान एक विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान ग्रीन बेल्ट इलाके से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।
रैपिडो चालक ही निकला गिरोह का सरगना
गिरफ्तार आरोपियों में 19 वर्षीय कुशल और 21 वर्षीय रूपेश उर्फ गोलू मुख्य रूप से स्नैचिंग की घटनाओं को अंजाम देते थे।
पूछताछ के दौरान कुशल ने पुलिस को बताया कि वह रैपिडो चालक के रूप में काम करता था। इसी दौरान वह अपने साथी रूपेश के साथ राह चलते लोगों की गतिविधियों पर नजर रखता था। मौका मिलते ही दोनों मोबाइल फोन छीनकर फरार हो जाते थे।
इसके बाद चोरी के मोबाइल फोन गिरोह के दूसरे सदस्यों को बेच दिए जाते थे।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से एक लूटा गया मोबाइल फोन, एक अवैध चाकू और दिल्ली के मंडावली इलाके से चोरी की गई मोटरसाइकिल बरामद की है।
मोबाइल खरीदकर पार्ट्स बेचने का खेल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के अन्य छह सदस्य चोरी के मोबाइल फोन खरीदने और उनके पुर्जे अलग-अलग बेचने का काम करते थे।
इन आरोपियों में निजामुद्दीन, आरिफ, सोनू, छोट्टे, गुलफाम और हारुन शामिल हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे चोरी के मोबाइल फोन लगभग 1500 से 2000 रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद मोबाइल के डिस्प्ले, बैटरी, बैक पैनल और अन्य हिस्सों को अलग करके बाजार में बेच दिया जाता था।
आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि इस अवैध कारोबार से मिलने वाली रकम को सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।
बरामदगी ने पुलिस को भी चौंकाया
पुलिस की छापेमारी के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ कि अधिकारियों को भी हैरानी हुई।
गिरोह के कब्जे से बरामद सामान में शामिल हैं—
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98 चोरी और लूटे गए मोबाइल फोन
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विभिन्न कंपनियों की 100 डिस्प्ले स्क्रीन
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207 बैटरियां
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40 मोबाइल कवर और खोखे
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103 बैक पैनल
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मोबाइल खोलने में इस्तेमाल होने वाले 10 पेचकस
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एक अवैध चाकू
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दिल्ली से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल
पुलिस का अनुमान है कि बरामद सामान की कुल संख्या 300 से अधिक है।
दिल्ली से भी जुड़े मिले तार
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह के तार दिल्ली से भी जुड़े हुए हैं। बरामद मोटरसाइकिल का पंजीकरण नंबर डीएल-5एससीजी-3306 है, जो दिल्ली के मंडावली थाने में दर्ज एक चोरी के मामले से संबंधित बताई जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह केवल नोएडा और दिल्ली में सक्रिय था या फिर इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य आरोपी कुशल के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
उसके खिलाफ सेक्टर-63 थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा दिल्ली के मंडावली थाने में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल स्नैचिंग के मामले केवल सड़क पर होने वाली सामान्य वारदातें नहीं हैं। इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम करता है, जो चोरी के मोबाइल फोन को अलग-अलग हिस्सों में बेचकर लाखों रुपये का मुनाफा कमाता है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। यह भी जांच की जा रही है कि चोरी के मोबाइल फोन किन बाजारों में बेचे जाते थे और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।
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