Friday, June 05, 2026

युवराज की मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम! अब खुले नाले में गिरे रिटायर्ड वैज्ञानिक, नोएडा की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

पर्थला गोलचक्कर के पास अंधेरे और सुरक्षा इंतजामों की कमी बनी हादसे की वजह, स्थानीय लोगों ने समय रहते बचाई जान; निर्माण स्थलों और खुले नालों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 04 2026 | 15:40:00 PM
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नोएडा के पर्थला क्षेत्र में आईसीएमआर के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. शर्मा खुले नाले में गिर गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना ने सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद भी सुरक्षा मानकों में सुधार न होने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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शहर में विकास कार्यों और निर्माण परियोजनाओं के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर कदम उठाएंगी, लेकिन हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। इसका ताजा उदाहरण सेक्टर-122 स्थित पर्थला गोलचक्कर के पास सामने आया, जहां भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. शर्मा खुले नाले में गिर गए।

यह घटना न केवल एक व्यक्ति के साथ हुए हादसे की कहानी है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है जो बार-बार होने वाली घटनाओं के बावजूद सबक लेने को तैयार नहीं दिख रही।

पत्नी के साथ पैदल जा रहे थे, अचानक हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, डॉ. आर.एस. शर्मा मंगलवार रात अपनी पत्नी के साथ पर्थला गोलचक्कर क्षेत्र से पैदल गुजर रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे मौजूद एक खुले नाले के पास अंधेरा होने और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया और वे सीधे नाले में जा गिरे।

हादसे के समय आसपास मौजूद लोगों ने शोर सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद स्थानीय नागरिकों ने डॉ. शर्मा को सुरक्षित नाले से बाहर निकाला। गनीमत रही कि इस घटना में उनकी जान नहीं गई, लेकिन यदि समय रहते सहायता नहीं मिलती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

एक और बड़ा हादसा टल गया

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के बावजूद सुरक्षा के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया गया। नाले के आसपास न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।

स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी भी नहीं रहती, जिससे राहगीरों को खतरे का अंदाजा तक नहीं लग पाता। ऐसे में यह घटना किसी भी समय बड़े हादसे का रूप ले सकती थी।

युवराज मेहता हादसे के बाद भी नहीं बदले हालात

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कुछ समय पहले सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की निर्माणाधीन बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी। उस घटना के बाद शहरभर में निर्माण स्थलों की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ी थी।

लोगों को उम्मीद थी कि संबंधित विभाग, बिल्डर और प्राधिकरण निर्माण स्थलों तथा खुले गड्ढों और नालों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। लेकिन पर्थला की घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि आखिर चेतावनी के बाद भी जिम्मेदार एजेंसियां क्यों नहीं जागीं।

छह महीने से खुला पड़ा है नाला

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पर्थला क्षेत्र में पिछले लगभग छह महीने से निर्माण कार्य जारी है। इस दौरान नाले को खुला छोड़ दिया गया है। कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

लोगों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों लोग इस मार्ग से गुजरते हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और नौकरीपेशा लोग इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की कमी किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है।

नागरिकों में बढ़ रही चिंता

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में रोष और चिंता दोनों देखने को मिली। नागरिकों का कहना है कि शहर में विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी निर्माण स्थलों, खुले नालों, गहरे गड्ढों और अधूरी परियोजनाओं के आसपास तत्काल बैरिकेडिंग कराई जाए। साथ ही रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं ताकि किसी अन्य व्यक्ति को इस तरह के हादसे का सामना न करना पड़े।

क्या बोला नोएडा प्राधिकरण?

इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सतीश पाल ने कहा कि शहर के प्रत्येक नाले की स्थिति अलग-अलग होती है और परिस्थितियों के अनुसार उन्हें कवर किया जाता है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्हें इस विशेष घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित स्थान का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बड़ा सवाल अभी भी कायम

डॉ. आर.एस. शर्मा का सुरक्षित बच जाना राहत की बात है, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। क्या हर बड़े हादसे के बाद केवल बयानबाजी होगी? क्या सुरक्षा इंतजाम किसी और जान जाने के बाद ही मजबूत किए जाएंगे? और क्या शहर में चल रहे विकास कार्यों के साथ नागरिक सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी?

फिलहाल पर्थला का यह हादसा एक बार फिर यह याद दिला गया है कि विकास तभी सार्थक है, जब उसके साथ सुरक्षा और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो। नोएडा के नागरिक अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई देखना चाहते हैं।

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