नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों ने 5 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटन प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि पात्र किसानों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
एक बार फिर किसानों और नोएडा प्राधिकरण के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। वर्षों से लंबित मांगों और कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप है कि पांच प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटन की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है और पात्र किसानों को उनका अधिकार देने के बजाय उनसे कथित रूप से रिश्वत मांगी जा रही है।
धरनास्थल पर किसानों ने टेंट लगाकर आंदोलन की शुरुआत की और स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों का कहना है कि यह केवल भूखंड का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई है।
क्या है 5 प्रतिशत विकसित भूखंड का मामला?
नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले किसानों को मुआवजे के साथ-साथ नीति के अनुसार विकसित भूखंड दिए जाने का प्रावधान किया गया था। इसी व्यवस्था के तहत पात्र किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के अनुपात में पांच प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित किए जाने हैं।

किसानों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना है कि जिन किसानों को भूखंड मिलने चाहिए, उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में कथित रूप से धन लेकर फाइलों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
धरनास्थल से उठे गंभीर आरोप
धरने में शामिल किसानों ने आरोप लगाया कि विकसित भूखंड आवंटन के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि कई पात्र परिवार वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी फाइलें लंबित रखी गई हैं।
प्रदर्शनकारी किसानों ने दावा किया कि अनेक बार अधिकारियों को ज्ञापन देने, बैठकों में अपनी बात रखने और समस्याओं को प्रशासन के सामने उठाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे किसानों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ता गया।
धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल वही अधिकार चाहते हैं जो उन्हें नीति के तहत मिलने चाहिए।

अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने नोएडा प्राधिकरण की महाप्रबंधक (नियोजन) मीना भार्गव के खिलाफ भी नाराजगी व्यक्त की। किसानों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया।
हालांकि, इस संबंध में प्राधिकरण की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। किसानों की ओर से लगाए गए आरोप उनके स्वयं के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आंदोलन को व्यापक करने की चेतावनी
धरने पर बैठे किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई और आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
किसानों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आसपास के गांवों और किसान संगठनों को भी आंदोलन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़ा स्वरूप ले सकता है।
दिनभर बना रहा हलचल का माहौल
नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों के धरने के कारण दिनभर हलचल का माहौल बना रहा। कार्यालय आने-जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों की नजरें धरनास्थल पर टिकी रहीं।
किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, लेकिन उनके नारों और बयानों से स्पष्ट था कि वे लंबे संघर्ष के लिए तैयार होकर आए हैं। कई किसानों ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें लिखित आश्वासन और ठोस समाधान नहीं मिलता।

किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों की मुख्य मांग है कि 5 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और पात्र किसानों को बिना किसी भेदभाव के उनका अधिकार दिया जाए।
इसके अलावा किसानों ने आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, शिकायतों की सुनवाई और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
आगे क्या?
फिलहाल किसानों का धरना जारी है और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बिना समाधान के वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। दूसरी ओर, अब सभी की निगाहें नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन की आगामी रणनीति पर टिकी हैं।
यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में नोएडा की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बन सकता है। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और भविष्य की भी है।
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