भारत टेक्स-2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर में अपने विकास मॉडल और निवेश नीति का विस्तृत रोडमैप पेश किया। कार्यक्रम में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई संभावनाओं, पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल नीति-2022 और उद्योगों को दिए जा रहे प्रोत्साहनों की जानकारी साझा की गई।
। उत्तर प्रदेश अब केवल अपनी पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प कला के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग के बड़े निवेश केंद्र के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, पारदर्शी निवेश व्यवस्था और आधुनिक औद्योगिक ढांचे के जरिए टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
इसी सोच और विजन को देश-विदेश के निवेशकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार ने न केवल अपनी टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 की प्रमुख विशेषताओं को सामने रखा, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े टेक्सटाइल निवेश गंतव्यों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान सदियों से समृद्ध हथकरघा परंपरा के कारण रही है। आज भी प्रदेश के लगभग 1.91 लाख हथकरघा बुनकर अपनी कला और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन, सीतापुर की दरी तथा मेरठ और बागपत के होम टेक्सटाइल उत्पाद आज वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की मजबूत पहचान बन चुके हैं। अब सरकार का लक्ष्य इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर मार्केटिंग और वैश्विक निवेश के साथ जोड़कर नई आर्थिक ताकत में बदलना है।
राकेश सचान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए '5F विजन (Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign)' को उत्तर प्रदेश सरकार प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। प्रदेश में टेक्निकल टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फैब्रिक प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं लागू की गई हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही बुनकरों को बिजली बिल में सब्सिडी, उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार, तथा भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHT), वाराणसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पारंपरिक कारीगरों और बुनकरों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है।
कार्यक्रम में स्टांप, शुल्क एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक औद्योगिक नीति का यह संगम राज्य को नई आर्थिक शक्ति प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि बनारसी सिल्क, चिकनकारी और कालीन उद्योग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को सरकार वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को नए अवसर मिल रहे हैं।

सत्र के दौरान हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के आयुक्त एवं निदेशक के. विजयेंद्र पांडियन ने उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल नीति और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों और भविष्य की योजनाओं पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की गई।
इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रेरणा शर्मा ने निवेशकों को संबोधित करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार ने उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया है। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं के कारण उत्तर प्रदेश आज उद्योगों के लिए आकर्षक गंतव्य बन चुका है।
प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल कुमार सागर ने कहा कि सरकार केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों को समय पर सभी आवश्यक सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत से जुड़े उद्यमी ललित ठकराल और रजत जयपुरिया ने भी उत्तर प्रदेश में निवेश के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीतियां, तेज प्रशासनिक प्रक्रियाएं और उद्योगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ा रहे हैं।

भारत टेक्स-2026 के इस मंच पर टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाली चार औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए गए, जबकि चार अन्य इकाइयों को वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए गए। यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार केवल नई घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
कार्यक्रम के दौरान भारत मंडपम के हॉल-11 में स्थापित उत्तर प्रदेश पवेलियन भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। यहां प्रदेश के पारंपरिक वस्त्र उत्पादों, टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क और निवेशकों के लिए उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं का प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में घरेलू और विदेशी निवेशकों ने पवेलियन का दौरा कर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की घोषित योजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर लागू होती हैं, तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में न केवल देश का प्रमुख टेक्सटाइल विनिर्माण केंद्र बन सकता है, बल्कि निर्यात, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश को केवल पारंपरिक हथकरघा राज्य के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक टेक्सटाइल, गारमेंट निर्माण, निवेश और वैश्विक निर्यात के सबसे भरोसेमंद केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए।
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