लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज आवाज वाली बाइकों के खिलाफ 30 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। 16 सर्किलों में चल रही कार्रवाई के दौरान डेसिबल मीटर से आवाज की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती दिनों में सैकड़ों मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए गए हैं।
लखनऊ की सड़कों पर अब बाइक की तेज आवाज निकालना महंगा पड़ सकता है। खासकर उन बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों के लिए, जिनमें कंपनी के मूल साइलेंसर को हटाकर तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए हैं। राजधानी में ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे साइलेंसरों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें वाहनों की आवाज को डेसिबल मीटर से मापा जा रहा है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर साइलेंसर जब्त करने के साथ चालान और जरूरत पड़ने पर वाहन सीज करने की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक यह अभियान केवल एक-दो चौराहों तक सीमित नहीं है। लखनऊ कमिश्नरेट के 16 सर्किलों में सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमें कार्रवाई कर रही हैं। 1 सितंबर 2026 से शुरू हुए इस विशेष अभियान के शुरुआती नौ दिनों में करीब 500 मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हजरतगंज में बुलेट रोककर उतरवाए गए साइलेंसर
हालिया कार्रवाई का एक प्रमुख केंद्र हजरतगंज चौराहा भी रहा। यहां ट्रैफिक पुलिस ने बुलेट और अन्य बाइक को रोककर उनके साइलेंसर की जांच की। जिन वाहनों में मॉडिफाइड साइलेंसर पाए गए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और मौके पर ही साइलेंसर उतरवाए गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में एमवी एक्ट के तहत 1,000 रुपये का चालान भी किया गया। कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ जुर्माना लगाना नहीं बल्कि ऐसे साइलेंसरों को वाहनों से हटाना भी है, जिनसे असामान्य रूप से तेज और कर्कश आवाज निकलती है।
डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी ने क्या कहा?
डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी के मुताबिक पुलिस आयुक्त के निर्देश पर प्रत्येक जोन में सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमों के माध्यम से मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
उनके अनुसार, 1 सितंबर 2026 से 30 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया गया है और इस दौरान लगातार कार्रवाई की जा रही है। यानी आने वाले दिनों में भी सड़क पर तेज आवाज करने वाली बाइकों पर पुलिस की निगरानी जारी रहने वाली है।
सिर्फ बुलेट नहीं, हर मॉडिफाइड साइलेंसर निशाने पर
मॉडिफाइड साइलेंसर का नाम आते ही आमतौर पर सबसे पहले बुलेट बाइक का जिक्र होता है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई केवल बुलेट तक सीमित नहीं है। अभियान में उन सभी दोपहिया वाहनों की जांच की जा रही है जिनमें कंपनी के मूल एग्जॉस्ट को हटाकर ऐसा साइलेंसर लगाया गया है जिससे सामान्य से अधिक आवाज निकलती है।
पुलिस टीम पहले वाहन और साइलेंसर की स्थिति देखती है। जरूरत पड़ने पर आवाज का स्तर डेसिबल मीटर से जांचा जाता है। नियमों के विपरीत पाए जाने पर चालान, साइलेंसर हटाने अथवा जब्त करने और गंभीर स्थिति में वाहन सीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
आंकड़े बताते हैं कि अभियान कितना बड़ा है
अलग-अलग चरणों में सामने आए कार्रवाई के आंकड़ों में अभियान की तस्वीर और स्पष्ट होती है। एक विशेष कार्रवाई में 865 वाहनों की जांच, 140 चालान, 8 वाहन सीज और 100 अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं 8 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 425 वाहनों की जांच में 61 चालान, 2 वाहन सीज और 55 बाइकों से मॉडिफाइड साइलेंसर उतरवाए गए।

9 सितंबर की रिपोर्ट में अभियान के दौरान 1,000 से अधिक वाहनों की जांच और 300 से अधिक प्रतिबंधित साइलेंसर जब्त किए जाने की जानकारी दी गई। वहीं 1 सितंबर से अभियान शुरू होने के नौवें दिन तक करीब 500 मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए जाने की बात भी पुलिस की ओर से सामने आई है।
इन आंकड़ों में अलग-अलग तारीखों और कार्रवाई के चरणों का विवरण शामिल है, लेकिन एक बात साफ है—लखनऊ में मॉडिफाइड साइलेंसर को लेकर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।
आखिर इतना सख्त रुख क्यों?
मामला केवल बाइक के लुक या आवाज का नहीं है। तेज और अचानक निकलने वाली बाइक की आवाज सड़क पर दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों का ध्यान भटका सकती है। आवासीय इलाकों, अस्पतालों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इसका असर और ज्यादा महसूस किया जा सकता है।
इसी वजह से पुलिस इसे ध्वनि प्रदूषण और ट्रैफिक अनुशासन, दोनों से जोड़कर देख रही है। किसी बाइक को ज्यादा आकर्षक या अलग दिखाने के लिए लगाया गया साइलेंसर अगर निर्धारित शोर मानकों का उल्लंघन करता है, तो वाहन मालिक कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
नियमों में भी है साइलेंसर को लेकर प्रावधान
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के Rule 120 में वाहन के एग्जॉस्ट और उससे होने वाले शोर को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने का प्रावधान है। नियमों का मूल उद्देश्य यही है कि वाहन से निकलने वाली आवाज को यथासंभव नियंत्रित रखा जाए और वाहन निर्धारित noise standards के अनुरूप रहे।
इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कोई साइलेंसर बाइक पर फिट हो रहा है या नहीं। यह भी जरूरी है कि वह सड़क पर इस्तेमाल के लिए लागू नियमों और निर्धारित शोर मानकों के अनुरूप हो।
बाइक मालिकों के लिए सीधा संदेश
लखनऊ ट्रैफिक पुलिस के अभियान का संदेश साफ है—स्टाइल के लिए नियमों से समझौता न करें। बाइक मालिकों को कंपनी द्वारा निर्धारित या नियमों के अनुरूप साइलेंसर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। अत्यधिक तेज आवाज वाले एग्जॉस्ट से बचना और किसी भी तरह का मॉडिफिकेशन कराने से पहले उसके कानूनी पहलू को समझना जरूरी है।
फिलहाल 30 दिन के विशेष अभियान के कारण लखनऊ की सड़कों पर मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों पर निगरानी और बढ़ सकती है। ऐसे में अगर आपकी बाइक की पहचान उसके इंजन से ज्यादा उसके साइलेंसर की आवाज से होती है, तो अगली बार सड़क पर निकलने से पहले सावधान रहना ही बेहतर है—क्योंकि इस बार पुलिस के पास सिर्फ कान नहीं, डेसिबल मीटर भी है।
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