सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद में शनिवार अलसुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई से पहले कलेक्ट्रेट के पांचों गेट सील कर दिए गए और RAF समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं कैराना सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आई है।
सहारनपुर में शनिवार की सुबह माहौल अचानक बदल गया। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई, पांचों प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कुछ ही देर बाद कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई। मौके पर RAF के साथ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे।
दरअसल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। अब जिला जज की अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई के लिए जेसीबी, डंपर और अन्य मशीनें रात में ही कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा दी गई थीं। शनिवार सुबह धीरे-धीरे मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम शुरू किया गया।
पांचों गेट सील, कलेक्ट्रेट में बाहरी लोगों की एंट्री बंद
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के सभी पांच प्रवेश द्वार सील कर दिए। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बाहरी लोगों की एंट्री पूरी तरह रोक दी गई। आसपास के इलाकों में भी पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी।

प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। जिले के अलावा अन्य स्थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस-प्रशासन और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ने कार्रवाई से पहले जिले के माहौल का जायजा लिया और खुफिया इनपुट जुटाए। शुक्रवार देर शाम से ही कलेक्ट्रेट और उसके आसपास पुलिस की गतिविधियां बढ़ गई थीं।
शनिवार सुबह जब ध्वस्तीकरण शुरू हुआ तो वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
शिकायत से शुरू हुआ था पूरा विवाद
इस मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई।
मामले की सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध करार दिया था। इसी आदेश में 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत का रुख किया। इसके बाद मामले में लगातार सुनवाई हुई।
17 तारीखों की सुनवाई के बाद आया फैसला
जिला जज की अदालत में इस मामले की कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद दो सितंबर को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा और मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी।
अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी। मशीनें रात में ही कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा दी गईं और शनिवार अलसुबह मस्जिद के ढांचे को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

इसी बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को लेकर भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया। बताया गया कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण के सिलसिले में सहारनपुर जाने वाली थीं। लेकिन उनके सहारनपुर रवाना होने से पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल उनके कैराना स्थित आवास पर पहुंच गया।
सांसद को घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया और उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद इकरा हसन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
इकरा हसन का सवाल- जनता की आवाज उठाना अपराध है क्या?
हाउस अरेस्ट के बाद इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं और क्षेत्र की जनता की आवाज उनके सामने रखना चाहती थीं। उनका सवाल था कि आखिर एक निर्वाचित सांसद का जनता से जुड़े किसी मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना क्या अपराध है?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं। ऐसे में उन्हें सहारनपुर जाने से रोकना जनता की आवाज को रोकने जैसा है।
फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई जारी है। पांचों गेट सील हैं, बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक है और RAF समेत भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन की नजर न सिर्फ कार्रवाई पर बल्कि आसपास के माहौल पर भी बनी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्थिति किस दिशा में जाती है और आगे इस मामले को लेकर क्या कानूनी या राजनीतिक कदम सामने आते हैं।
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