उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कवच 2.0’ के तहत गौतमबुद्धनगर परिवहन विभाग ने डग्गामार और नियम विरुद्ध संचालित बसों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पांच प्रवर्तन टीमों ने 46 बसों का चालान किया, जबकि 25 बसों को सीज कर डिपो और थानों में खड़ा कराया गया। कार्रवाई में 7 लाख रुपये से अधिक प्रशमन शुल्क और 3 लाख रुपये का बकाया टैक्स आरोपित किया गया।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रही बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कवच 2.0’ के तहत गौतमबुद्धनगर में परिवहन विभाग ने बड़े स्तर पर चेकिंग अभियान चलाया।
इस अभियान की कमान एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय के नेतृत्व में संभाली गई। विभाग की कुल पांच प्रवर्तन टीमों को मैदान में उतारा गया, जिनमें 3 एआरटीओ और 2 पीटीओ शामिल रहे।
अभियान के दौरान जिले के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में बसों की सघन जांच की गई। देखते ही देखते नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रही बसों पर कार्रवाई शुरू हो गई। विभाग की टीमों ने कुल 46 बसों का चालान किया, जबकि गंभीर अनियमितता पाए जाने पर 25 बसों को मौके पर ही निरुद्ध यानी सीज कर दिया गया। इन वाहनों को संबंधित डिपो और थानों में खड़ा कराया गया है।
10 लाख रुपये से ज्यादा का राजस्व
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई का असर सिर्फ चालान और सीजिंग तक सीमित नहीं रहा। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों पर 7 लाख रुपये से अधिक का प्रशमन शुल्क यानी जुर्माना लगाया गया।
इसके साथ ही करीब 3 लाख रुपये का बकाया कर यानी टैक्स भी आरोपित किया गया। इस तरह पूरी कार्रवाई में विभाग ने 10 लाख रुपये से अधिक के राजस्व से जुड़े मामले सामने लाए।
यानी जिन बस संचालकों पर नियमों की अनदेखी और सरकारी राजस्व के भुगतान में लापरवाही के आरोप सामने आए, उन पर परिवहन विभाग ने एक साथ कार्रवाई की।

एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय के मुताबिक शासन के निर्देश पर जिले में अवैध परिवहन को पूरी तरह रोकने के उद्देश्य से पांच प्रवर्तन दलों को तैनात किया गया था।
इन टीमों ने जिले के प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर विशेष निगरानी रखी। चेकिंग के प्रमुख स्थानों में परी चौक, महामाया फ्लाईओवर, सेक्टर-37 और सूरजपुर शामिल रहे।
इन जगहों पर बसों को रोककर परमिट, टैक्स और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। इसके अलावा यह भी देखा गया कि बसें निर्धारित नियमों और परमिट की शर्तों के मुताबिक ही संचालित हो रही हैं या नहीं।
जांच के दौरान कई बसों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
परमिट की शर्तों का उल्लंघन
परिवहन विभाग के अनुसार कई बसें बिना वैध रूट अथवा परमिट की निर्धारित शर्तों के विपरीत संचालित होती पाई गईं।
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में रूट और परमिट की शर्तें इसलिए अहम होती हैं, ताकि यह तय रहे कि वाहन कहां और किस उद्देश्य से संचालित किया जा सकता है। लेकिन इन नियमों की अनदेखी करने वाली बसों के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई की।
बकाया टैक्स भी बना बड़ी वजह
चेकिंग के दौरान कुछ वाहन संचालकों द्वारा लंबे समय से सरकारी टैक्स जमा नहीं किए जाने की बात भी सामने आई।
विभाग ने ऐसे मामलों में बकाया कर की गणना करते हुए कार्रवाई की। करीब 3 लाख रुपये के टैक्स से जुड़े मामले इस अभियान के दौरान सामने आए।
यानी कार्रवाई का एक बड़ा हिस्सा उन वाहन स्वामियों पर भी रहा, जिन्होंने लंबे समय से अपने वाहनों का निर्धारित कर जमा नहीं किया था।

अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमों को एक और गंभीर अनियमितता मिली। कुछ सवारी वाहनों यानी बसों में भारी कमर्शियल माल की ढुलाई की जा रही थी।
यात्री परिवहन के लिए संचालित बसों में इस तरह माल लादना यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अचानक ब्रेक, दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में अतिरिक्त और भारी माल यात्रियों के लिए परेशानी और जोखिम बढ़ा सकता है।
इसी वजह से विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की।
वाहन मालिकों को सख्त चेतावनी
एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय ने साफ किया कि यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले वाहन संचालकों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने संकेत दिया कि ‘ऑपरेशन कवच 2.0’ के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों और अवैध परिवहन में शामिल ऑपरेटरों के खिलाफ इसी तरह सख्ती बरती जाएगी।
गौतमबुद्धनगर में हुई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश भी है—सड़कों पर बस चलाना सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं है। परमिट की शर्तों का पालन, टैक्स का भुगतान और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
अब देखना होगा कि अभियान आगे बढ़ने के साथ परिवहन विभाग की कार्रवाई का दायरा कितना और बढ़ता है और जिले की सड़कों पर नियम विरुद्ध चलने वाली कितनी और बसें जांच के घेरे में आती हैं।
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