उत्तर प्रदेश STF ने गोरखपुर में अंतरराज्यीय अवैध असलहा तस्करी गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से चार .32 बोर पिस्टल, एक रिवॉल्वर, पांच कारतूस, बाइक, स्कूटी, मोबाइल और नकदी बरामद हुई। STF ने गिरोह के तार मध्य प्रदेश, हरियाणा और पूर्वांचल के कई जिलों से जुड़े होने तथा सोशल मीडिया के जरिए अवैध हथियारों की सप्लाई किए जाने का दावा किया है।
गोरखपुर में रात के अंधेरे में हुई एक कार्रवाई ने अवैध असलहा तस्करी के उस नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, जिसके तार उत्तर प्रदेश से बाहर तक जुड़े होने का दावा किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश STF की फील्ड यूनिट गोरखपुर और गोरखपुर एंटी थेफ्ट सेल ने 14 सितंबर 2026 की रात कैंट थाना क्षेत्र में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई पैडलेगंज से मोहद्दीपुर जाने वाली सड़क पर विंध्यवासिनी पार्क के पास मेन रोड पर रात करीब 10:20 बजे हुई।
STF के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अजीत यादव, अभिषेक गौड़ उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी और राहुल गुप्ता के रूप में हुई है। श्रेयांश मूल रूप से गोपालगंज, बिहार का रहने वाला बताया गया है और फिलहाल गोरखपुर में रह रहा था। बाकी आरोपी गोरखपुर और देवरिया के रहने वाले बताए गए हैं।
कार्रवाई में चार .32 बोर पिस्टल के साथ चार मैगजीन, एक .32 बोर रिवॉल्वर और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके अलावा एक मोटरसाइकिल, एक स्कूटी, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 1,250 रुपये नकद भी मिले हैं।
STF के अनुसार, अंतरराज्यीय अवैध असलहा तस्करी के खिलाफ चल रही अभिसूचना कार्रवाई के दौरान पता चला कि गोरखपुर और आसपास के जिलों में हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है। पुलिस उपाधीक्षक धर्मेश कुमार शाही के पर्यवेक्षण में STF फील्ड यूनिट गोरखपुर की टीम इस नेटवर्क की जानकारी जुटा रही थी।

जांच में STF ने दावा किया कि श्रेयांश यादव और उसके साथी मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र तथा हरियाणा के सोनीपत से अवैध हथियार लाकर पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज और संतकबीरनगर समेत कई जिलों में सप्लाई करते थे। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में अंकित अग्रवाल, शशांक पाण्डेय, बिट्टू इन्दौरी उर्फ देवेन्द्र सक्सेना और सुमित कुमार दिलावर समेत अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है।
STF का दावा है कि आरोपी हथियारों को करीब 15 से 40 हजार रुपये में खरीदते थे और आगे 15 से 20 हजार रुपये तक का मुनाफा लेकर बेचते थे। पूछताछ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram के जरिए पूर्वांचल में 100 से 150 अवैध पिस्टलों की बिक्री या आपूर्ति किए जाने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है।
पूछताछ में श्रेयांश यादव का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया। STF के मुताबिक वह मध्य प्रदेश के बड़वानी और महाराष्ट्र के मुंबई में अवैध पिस्टल के कारोबार से जुड़े मामलों में जेल जा चुका है। मुंबई के DCB CID मामले में 2025 में उसके साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और सात पिस्टल व 21 कारतूस की बरामदगी का उल्लेख भी पुलिस ने किया है।
STF ने यह भी दावा किया है कि श्रेयांश के कथित साथी शशांक पाण्डेय का संबंध लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई गैंग से बताया गया है और वह पंजाब में असलहा सप्लाई के मामले में जेल जा चुका है।

पुलिस के अनुसार श्रेयांश के गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गैंग से संबंधों की भी जांच की जा रही है। इन दावों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच एजेंसी ने कुछ पुराने मामलों में भी इसी नेटवर्क से हथियारों की सप्लाई का दावा किया है। इनमें गोरखनाथ क्षेत्र का चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड, कैंपियरगंज में दर्ज आर्म्स एक्ट का मामला और संतकबीरनगर के खलीलाबाद थाने का मामला शामिल है। STF के मुताबिक नेटवर्क ने कुछ स्थानीय लोगों को हथियार उपलब्ध कराए थे और एक व्यक्ति द्वारा कथित हत्या की नीयत से पिस्टल खरीदे जाने की जानकारी भी मिली है।
गिरफ्तार आरोपियों में श्रेयांश पर 2019 से लेकर 2026 तक चोरी, बरामदगी, आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में कई मुकदमों का उल्लेख है। अजीत यादव के खिलाफ देवरिया में 2022 से 2026 तक मारपीट, हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र और आर्म्स एक्ट समेत कई मामले बताए गए हैं। अभिषेक गौड़ के खिलाफ 2024 का मुकदमा और अभिषेक प्रजापति के खिलाफ 2026 का आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है। सभी के खिलाफ नया मुकदमा कैंट थाना गोरखपुर में दर्ज किया गया है।
इस मामले में अब असली सवाल सिर्फ पांच गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। STF और गोरखपुर एंटी थेफ्ट सेल स्थानीय स्तर पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रहे हैं। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अगर जांच में सोशल मीडिया के जरिए हथियारों की सप्लाई और दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क के दावे पुष्ट होते हैं, तो यह कार्रवाई पूर्वांचल में अवैध हथियारों के कारोबार की एक बड़ी कड़ी तक पहुंच सकती है।
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