उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने सोमवार को मऊ के बाढ़ प्रभावित मधुबन और दुबारी क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों का हाल जाना। उन्होंने राहत शिविर का निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री, दवाइयां और राहत किट वितरित कीं। मंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने, फंसे लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा भोजन, पेयजल, चिकित्सा और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मऊ में बाढ़ की स्थिति के बीच सोमवार को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर पहुंचे। मधुबन और दुबारी क्षेत्र में पहुंचकर उन्होंने बाढ़ प्रभावित नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी परेशानियों तथा तत्काल जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों के लिए होती है, जिनके घरों और आसपास के इलाकों में पानी भर जाने से सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। ऐसे में प्रशासन की राहत व्यवस्था कितनी तेजी से जरूरतमंदों तक पहुंच रही है, इसे देखने के लिए मंत्री ने मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मंत्री ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में प्रदेश सरकार उनके साथ खड़ी है और राहत कार्यों में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।
श्री ए.के. शर्मा ने जनता इंटर कॉलेज परिसर में संचालित राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और यह समझने की कोशिश की कि उन्हें प्रशासन की ओर से किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं।

इस दौरान उन्होंने राहत शिविर में उपलब्ध भोजन, पेयजल, चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के बीच खाद्य सामग्री के पैकेट, आवश्यक दवाइयां और राहत सामग्री किट भी वितरित कीं। राहत सामग्री मिलने के साथ प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरत की चीजें उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
निचले इलाकों में फंसे लोगों और पशुओं को तुरंत निकालने के निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य पूरी तत्परता से चलाए जाएं। खासतौर पर निचले और जलभराव वाले इलाकों में फंसे नागरिकों पर प्राथमिकता से ध्यान देने को कहा गया।
उन्होंने निर्देश दिया कि जहां भी जरूरत हो, लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। इसके साथ ही बाढ़ में फंसे पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था करने को कहा गया।
मंत्री ने यह भी कहा कि राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होनी चाहिए।
'किसी प्रभावित परिवार को राहत से वंचित न रखा जाए'
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा के समय सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। प्रदेश सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासन की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि कोई भी प्रभावित व्यक्ति राहत और जरूरी सुविधाओं से वंचित न रहे।

विशेष रूप से दुर्गम और अधिक प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही राहत कार्यों की नियमित निगरानी करने को कहा गया, ताकि मौके की वास्तविक स्थिति के अनुसार तुरंत निर्णय लिया जा सके।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी चुनौती रहेगी
मंत्री ने बाढ़ के तत्काल संकट के साथ-साथ बाढ़ के बाद पैदा होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क किया।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा जाए।
प्रभावित इलाकों में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। इसके अलावा एंटी-लार्वा छिड़काव और अन्य आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से कराने के निर्देश दिए गए।
यानी प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ पानी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की नहीं है, बल्कि पानी उतरने के बाद बीमारी और गंदगी से पैदा होने वाले खतरे को रोकना भी है।

मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। प्रशासन का दायित्व है कि संकट की इस घड़ी में प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचे।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रहते हुए किसी तरह की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मऊ के मधुबन और दुबारी क्षेत्र के इस दौरे के दौरान मंत्री का जोर राहत सामग्री बांटने से आगे बढ़कर पूरी राहत व्यवस्था की निगरानी, त्वरित बचाव और बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा पर रहा।
अब प्रशासन के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी यही है कि दिए गए निर्देश जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होते हैं और बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक राहत समय पर पहुंचती है।
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