लखनऊ में लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था की सबसे बड़ी ताकत आम नागरिक का विश्वास है। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। सीएम ने शिकायत निस्तारण, पीडीएस, राजस्व मामलों, भूमि पैमाइश, डीबीटी और ई-गवर्नेंस में तकनीक के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।
लखनऊ में सोमवार को लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी को रेखांकित किया—जनता का विश्वास।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था का गठन हो जाना ही पर्याप्त नहीं है। उसकी असली सफलता इस बात से तय होती है कि आम नागरिक उस संस्था को कितने भरोसे के साथ देखता है। उन्होंने कहा कि जो संस्था जनता के विश्वास पर खरी उतरेगी, लोकतंत्र में उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
सीएम ने स्पष्ट कहा कि गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। यदि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं होगा तो सुशासन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने संगठन की 50 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी और लघु फिल्म भी देखी।
जनप्रतिनिधि से लेकर संवैधानिक संस्था तक, भरोसा ही सबसे बड़ा पैमाना
मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माताओं द्वारा देश को दिए गए संसदीय लोकतंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जब जनता का विश्वास खो देता है तो सरकार चली जाती है। हर पांच साल में जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाना पड़ता है और यदि वह जनभावना का सम्मान नहीं करता तो जनता को उसे बदलने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह संवैधानिक संस्थाओं के लिए भी जनविश्वास सबसे बड़ी कसौटी है।
सीएम के मुताबिक न्याय का आधार सत्य है और प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान भाव से देखा जाना चाहिए। शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि मेरिट और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के आधार पर होना चाहिए।
झूठी शिकायतें भी सिस्टम के लिए चुनौती
मुख्यमंत्री ने आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन और जनता दर्शन जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराने का प्रयास कर रही है।
हालांकि उन्होंने शिकायत प्रणाली के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक व्यक्ति ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उसने पूरे जिले के विद्यालयों की जांच कराने की मांग कर दी।
सीएम ने कहा कि ऐसी झूठी और अनावश्यक शिकायतें न केवल सरकारी सिस्टम का समय खराब करती हैं, बल्कि उस व्यक्ति का भी समय बर्बाद करती हैं जो वास्तव में न्याय की उम्मीद लेकर शिकायत करता है।
उन्होंने कहा कि शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले तत्वों से दूरी बनानी होगी और संस्थाओं को मिले अधिकारों के इस्तेमाल में मेरिट को आधार बनाना होगा। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने तकनीक के इस्तेमाल को सुशासन से जोड़ते हुए पीडीएस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में खाद्यान्न वितरण से जुड़ी शिकायतें बड़ी संख्या में आती थीं। जनता दर्शन में आने वाली 100 शिकायतों में करीब 60 शिकायतें पीडीएस से संबंधित होती थीं।
इसके समाधान के लिए ई-पॉस मशीनों को मुख्यालय की स्क्रीन से जोड़ा गया। सीएम के अनुसार करीब 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में कहीं गड़बड़ी होने पर तुरंत अलर्ट मिलने लगा।
उन्होंने दावा किया कि इससे हेराफेरी की गुंजाइश लगभग समाप्त हुई और आज जनता दर्शन में 500 लोग आने के बावजूद पीडीएस से जुड़ी शिकायत सामने नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरकार बिना भेदभाव करीब 16 करोड़ लोगों को राशन दे रही है। एफसीआई गोदाम से गंतव्य तक ट्रकों की ट्रैकिंग और सिंगल डिलीवरी जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है।
34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण, पैमाइश में रोबोट का इस्तेमाल
सीएम ने राजस्व विभाग की पुरानी समस्याओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार वर्ष 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े करीब 34 लाख मामले लंबित थे। इनमें लगभग छह लाख मामले केवल वरासत से संबंधित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मामलों के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। लैंड यूज से जुड़ी समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं होने पर डीम्ड व्यवस्था के तहत जवाबदेही तय करने का प्रावधान किया गया।
उनके अनुसार साढ़े नौ वर्षों में 34 लाख मामलों का निस्तारण हुआ, हालांकि इस अवधि में करीब नौ लाख नए मामले भी सामने आए।

पैमाइश में जरीब से छेड़छाड़ की शिकायतों का समाधान करने के लिए अब हर तहसील में रोबोट उपलब्ध कराया गया है। सीएम ने कहा कि तकनीक के जरिए एक इंच तक की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी और कोऑर्डिनेट के आधार पर जमीन की पैमाइश की जाएगी।
लोक आयुक्त में शिकायत पहुंचे तो मेरिट पर हो समाधान
योगी ने कहा कि तकनीक शिकायतों के अंबार को कम करने का रास्ता खोल सकती है। उन्होंने कहा कि कई बार लोकसेवक को बचाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन शिकायत लोक आयुक्त संगठन तक पहुंचने पर उसका समाधान मेरिट के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने लोकसेवकों को नैतिकता और मूल्यों से जोड़ने की जरूरत भी बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकार मिलने के बाद किसी व्यक्ति में उदंडता नहीं आनी चाहिए और संस्थागत शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश जरूरी है।
14 सितंबर 1977 को शुरू हुआ था यूपी लोक आयुक्त संगठन
मुख्यमंत्री ने संगठन की स्थापना का इतिहास बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को शुरू हुआ था। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था।
अब 50 वर्ष की इस यात्रा को लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है। सीएम ने कहा कि संगठन की यात्रा नई पहचान और नई आभा के साथ जारी है।
उन्होंने 50 वर्षों का विस्तृत दस्तावेज तैयार करने की अपेक्षा जताई, जिसमें कितनी शिकायतें आईं, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में कार्रवाई की गई—इसका पूरा विवरण हो।

देशभर के लोक आयुक्तों को बुलाकर हो संवाद
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि देशभर के लोक आयुक्तों, लोकपाल और अन्य सदस्यों को आमंत्रित कर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाए। इसमें विभिन्न राज्यों के बेहतर कार्यों और अनुभवों पर संवाद हो।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद बेहद जरूरी है। उम्मीद जताई कि इसी संवाद के आधार पर लोक आयुक्त संगठन अगले 50 वर्षों के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करेगा।
तकनीक बने लोक कल्याण का रास्ता
मुख्यमंत्री ने जनधन खातों और डीबीटी का उदाहरण देते हुए कहा कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले विधवा, निराश्रित और वृद्धजन पेंशन में बिचौलियों और भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं, लेकिन अब डीबीटी के जरिए करीब 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये की पेंशन सीधे खातों में दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार लोक आयुक्त संगठन को हर सकारात्मक सहयोग देगी। कार्यक्रम में लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के संदेश का सार यही रहा कि संस्था की ताकत उसके अधिकारों से नहीं, बल्कि उस पर आम नागरिक के भरोसे से तय होती है। अब चुनौती यह है कि तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही के जरिए इस भरोसे को लगातार मजबूत कैसे किया जाए।
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