लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी भर्तियों और पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर बात रखी। मुख्यमंत्री ने अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत कई अत्याधुनिक सुविधाओं का लोकार्पण किया और संस्थान में 1,010 बेड के नए अस्पताल व 350 बेड के ट्रॉमा सेंटर की तैयारियों की जानकारी दी।
लखनऊ में रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान का छठा स्थापना दिवस समारोह कई बड़े दावों और राजनीतिक संदेशों का मंच बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी संस्थान में एक व्यक्ति की गलती का असर पूरे संस्थान को झेलना पड़ता है। इसी उदाहरण को उत्तर प्रदेश की पिछली स्थिति से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति और एक परिवार की गलती की कीमत पूरे प्रदेश को पहचान के संकट, कानून-व्यवस्था के संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहा है और अब प्रदेशवासियों के सामने पहचान का संकट नहीं है। उनके मुताबिक लोग देश में कहीं भी गर्व से कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश से हैं।
साढ़े नौ साल में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी का दावा
मुख्यमंत्री योगी ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, उसके परिणाम उतने ही बेहतर होंगे। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं और इनमें से 9.5 लाख वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में उसके साथ भेदभाव या किसी तरह का लेनदेन हुआ। उन्होंने कहा कि यही युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है।
अंग प्रत्यारोपण यूनिट का लोकार्पण, जल्द बोन मैरो ट्रांसप्लांट
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड और मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हॉल भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट शुरू होने से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी जल्द शुरू होने जा रही है।
लोहिया संस्थान अब रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआई आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ जैसी तकनीकों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आईसीयू के संचालन की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी।
अब चुनौती पैसे की नहीं, लंबी वेटिंग लिस्ट की
योगी ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा और मुख्यमंत्री राहत कोष जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंदों के इलाज के लिए धन उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बड़ी चुनौती इलाज के लिए पैसे की उपलब्धता नहीं, बल्कि किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर उपचारों की लंबी प्रतीक्षा सूची को कम करना है।

मुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में सवाल यह था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान बनाया जाएगा। सरकार ने इसे संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि कभी 20 बेड के छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ यह परिसर आज 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है। उनके अनुसार पहले संस्थान की शिकायतें अखबारों की सुर्खियां बनती थीं, जबकि अब शिकायतें कम आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की संतुष्टि ही किसी संस्थान की सफलता की वास्तविक कसौटी है।
संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर बनाने की भी तैयारी है।
मेडिकल कॉलेजों और सीटों में बढ़ोतरी का आंकड़ा
योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स तक पहुंच गई है। एमबीबीएस सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक और पीजी सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं।
नर्सिंग शिक्षा में भी विस्तार का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, अब 26 संचालित हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है।
पिछली सरकार पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर एम्स स्वीकृत किया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने गोरखपुर एम्स के लिए दी गई जमीन पर सुप्रीम कोर्ट के स्थगन का भी उल्लेख किया और कहा कि 2017 के बाद नई भूमि उपलब्ध कराकर एम्स का संचालन शुरू कराया गया। रायबरेली एम्स की समस्याओं के समाधान का भी उन्होंने जिक्र किया।
अपने मेडिकल डाटा पर शोध की जरूरत
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा संस्थानों से इलाज के साथ शोध, नवाचार और तकनीक पर जोर देने को कहा। उन्होंने कहा कि भारत का मेडिकल डाटा दूसरे देशों के शोध में इस्तेमाल होता है, लेकिन अपने स्तर पर डाटा को संरक्षित करने की जरूरत है।
उन्होंने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं विकसित करने पर जोर देते हुए आईआईटी कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआई में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क जैसे प्रयासों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया।

योगी ने जापान की इंसेफेलाइटिस वैक्सीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1905 में वैक्सीन विकसित हो गई थी, लेकिन भारत तक पहुंचने में 100 साल लग गए। इसके विपरीत कोविड महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में नौ महीने में दो वैक्सीन विकसित कीं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को मुफ्त टीका देने के साथ करीब 100 मित्र देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमारियों का पैटर्न बदल रहा है, इसलिए चिकित्सा संस्थानों को समय से 10 कदम आगे सोचने की जरूरत है। उनके अनुसार हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी साथ चलें, तभी कोई संस्थान वास्तविक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बन सकता है।
194 पदों पर भर्ती, नवनियुक्त कर्मियों को नियुक्ति पत्र
संस्थान में प्रदेश सरकार के सहयोग से 194 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें टेक्निकल ऑफिसर परफ्यूजन अनुज कुमार शुक्ला, डाइटीशियन ममता तिवारी और सावन कुमार समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकाय और नर्सिंग कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। सीएमएस एवं जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह को डायरेक्टर एक्सीलेंस अवार्ड मिला। डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार वर्मा समेत अन्य संकाय सदस्यों को डायरेक्टर्स अवार्ड ऑफ मेरिट दिया गया। नर्सिंग में उमा पांडेय को डायरेक्टर्स मेरिट अवार्ड और सीएनओ सुमन सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।
दो पुस्तकों और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन
मुख्यमंत्री ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ डॉ. अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सही जानकारी सही देखभाल’ और डॉ. एसएस नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर फाल्स’ का विमोचन भी किया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस दौरान समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर गुंडागर्दी, अराजकता, भ्रष्टाचार और दंगों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पहले प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को टेंडर दिए जाते थे और संस्थानों में भवन निर्माण से लेकर कपड़े धोने, कैंटीन और साइकिल स्टैंड तक के काम पसंदीदा लोगों को मिलते थे। उन्होंने वर्तमान सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉक्टरों की संख्या और एमडी-एमएस सीटों में भी वृद्धि हुई है।
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि 20 बेड से शुरू हुआ यह संस्थान आज 1,400 बेड तक पहुंच चुका है और प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बना रहा है।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रुद्राक्ष का पौधा भेंटकर स्वागत किया।
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