Wednesday, August 12, 2026

कचरे से कंचन तक: CBG इंडस्ट्री में किसानों की आय और गांवों के रोजगार को नई उड़ान, ए.के. शर्मा का बड़ा संदेश

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026 में ग्रीन एनर्जी पर मंथन; ए.के. शर्मा बोले—कचरे को ऊर्जा में बदलकर किसानों की आमदनी बढ़ाने और गांवों में रोजगार पैदा करने की अपार ताकत

New Delhi , Latest Updated On - Aug 12 2026 | 18:00:00 PM
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ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026 के दूसरे दिन नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत ने भाग लिया। कार्यक्रम में CBG, कृषि अपशिष्ट, ग्रामीण रोजगार और ग्रीन एनर्जी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान KIS और पारस ग्रुप के साथ 1,000 करोड़ रुपये का एमओयू भी साइन हुआ।

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कचरा अगर सही तकनीक और सही सोच के साथ इस्तेमाल किया जाए तो वही कचरा किसानों की आय बढ़ाने, गांवों में रोजगार पैदा करने और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का बड़ा साधन बन सकता है। कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG इंडस्ट्री को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार अब इसी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026 के दूसरे दिन इसी मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत समेत देश-विदेश से आए डेलीगेट्स, विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में उद्यमी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश पढ़कर सुनाने के साथ हुई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने CBG उद्योग की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में किसानों को समृद्ध बनाने की बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि कचरे को कंचन बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है और गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार दिया जा सकता है।

मंत्री के मुताबिक कृषि अवशेष, जैविक कचरा और अन्य उपलब्ध संसाधनों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने से एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिसमें कचरे के निपटारे के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचे।

यानी खेतों में बचा कृषि अपशिष्ट केवल समस्या नहीं रहेगा, बल्कि वह आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन सकता है।

ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन एनर्जी की राह दिखाई है और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने पूर्व की सरकारों पर किसानों की चिंता नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों की आमदनी बढ़ाने, स्वाइल हेल्थ कार्ड और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई हैं।

उन्होंने बायोएनर्जी सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

राहुल गांधी पर ए.के. शर्मा का तीखा हमला

कार्यक्रम के दौरान ए.के. शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी राजनीतिक बयानबाजी के जरिए किसानों और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले ‘विश्वविद्यालय’ को हिंदी में लिखकर दिखाएं और IIT तथा IIM का हिंदी में फुल फॉर्म बताएं, फिर देश को ज्ञान दें।

ए.के. शर्मा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी गन्ने और मकई के पौधे के बीच अंतर भी नहीं कर पाएंगे।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय CBG-बायोएनर्जी सम्मेलन उसी बदलती तस्वीर का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि यहां देश-विदेश से आए उद्यमी और विशेषज्ञ किसानों की आय बढ़ाने, कचरे को ऊर्जा में बदलने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।

ए.के. शर्मा ने राहुल गांधी से विकास की इस बदलती तस्वीर को समझने और देश के युवाओं तथा किसानों को भ्रमित करने के बजाय विकास एवं नवाचार की दिशा में ध्यान देने की अपील की।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक राज्य है। इसके कारण राज्य में कृषि अपशिष्ट की उपलब्धता भी बहुत अधिक है।

उन्होंने कहा कि इस कृषि अपशिष्ट को तकनीक और नवाचार के जरिए ऊर्जा में बदला जा सकता है।

उनके मुताबिक यह सिर्फ ऊर्जा उत्पादन का अवसर नहीं है, बल्कि किसानों के भविष्य को सुनहरा बनाने का भी अवसर है।

कृषि अपशिष्ट को आय और ऊर्जा के स्रोत में बदलकर किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद उद्यमियों को प्रदेश सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

गांव-गांव छोटे बायोगैस प्लांट लगाने पर जोर

ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत और गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कृषि के साथ पशुपालन को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने प्रदेश में घरेलू स्तर पर एक लाख छोटे बायोगैस प्लांट लगाने की आवश्यकता बताई।

इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, पशुपालकों और किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों से जोड़ना है।

यदि इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम होता है तो गांवों में ऊर्जा के स्थानीय स्रोत विकसित करने के साथ-साथ जैविक कचरे के प्रबंधन की समस्या को भी कम किया जा सकता है।

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026 के दूसरे दिन कार्यक्रम में निवेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम सामने आया।

KIS और पारस ग्रुप के साथ 1,000 करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया गया।

यह समझौता बायोएनर्जी सेक्टर में निवेश और संभावित औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा कार्यक्रम में कई रिसर्च जर्नल और कृषि साहित्य का भी विमोचन किया गया।

CBG से गांवों की अर्थव्यवस्था को क्या उम्मीद?

CBG सेक्टर को लेकर सरकार की सोच सिर्फ वैकल्पिक ईंधन तैयार करने तक सीमित नहीं दिखाई देती।

इसके पीछे एक बड़ा ग्रामीण आर्थिक मॉडल भी देखा जा रहा है।

यदि कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ता है तो किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और प्लांट संचालन से जुड़े रोजगार भी पैदा हो सकते हैं।

यही वजह है कि बायोएनर्जी को ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और किसान आय से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि इस मॉडल की सफलता के लिए तकनीक, निवेश, कच्चे माल की नियमित उपलब्धता, किसानों की भागीदारी और बाजार की मांग जैसे कई पहलुओं पर लगातार काम करना होगा।

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो-2026 में सामने आई चर्चाओं से साफ है कि उत्तर प्रदेश CBG और बायोएनर्जी को भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है।

एक तरफ कृषि अपशिष्ट को उपयोगी बनाकर कचरे की समस्या कम करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ उससे ऊर्जा और आय पैदा करने का लक्ष्य है।

अब देखना यह होगा कि एक्सपो में हुई चर्चाएं और समझौते कितनी तेजी से जमीन पर वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं।

क्योंकि असली बदलाव तब दिखाई देगा, जब खेतों का अपशिष्ट प्लांट तक पहुंचेगा, उससे ऊर्जा बनेगी, किसान को उसका आर्थिक लाभ मिलेगा और गांव के युवाओं को रोजगार अपने ही क्षेत्र में मिलेगा।

यानी सवाल सिर्फ कचरे को ऊर्जा में बदलने का नहीं है—सवाल यह है कि क्या CBG सच में गांव की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा देकर किसान और ग्रामीण युवाओं का भविष्य बदल पाएगा?

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All Comments (11)
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