कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच अब तकनीकी स्तर पर तेज हो गई है। IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया। जांच के दौरान सड़क के गड्ढे में पानी भरवाया गया, लेकिन लंबे समय तक पानी नहीं निकलने की स्थिति ने सड़क की जल निकासी और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए। NHAI ने मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोक दी है और परियोजना से जुड़ी निर्माण कंपनी, इंजीनियरों तथा अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई है।
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर अब सवाल केवल सड़क पर बने गड्ढों या क्षतिग्रस्त हिस्सों तक सीमित नहीं रह गए हैं। मामला अब तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता, जल निकासी और परियोजना की निगरानी तक पहुंच गया है।
एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्से की पड़ताल के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची है। टीम अलग-अलग स्थानों का सर्वे कर रही है और यह समझने की कोशिश कर रही है कि सड़क में समस्या आखिर पैदा क्यों हुई।
जांच के दौरान सामने आया एक दृश्य खास तौर पर चर्चा में है। बताया गया कि विशेषज्ञों की टीम ने सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से में बने गड्ढे में पानी डलवाया। इसके बाद काफी समय तक पानी उसी जगह जमा रहा और अपेक्षित गति से बाहर नहीं निकला। इस परीक्षण ने सड़क के नीचे नमी, जल निकासी और निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन शुरुआती जांच ने मामले को सामान्य सड़क मरम्मत से कहीं ज्यादा गंभीर बना दिया है।
₹4,200 करोड़ की परियोजना, उद्घाटन के बाद सामने आई तकनीकी परेशानी
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग ₹4,200 करोड़ की लागत से किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में किया था।
इसके अगले दिन एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोल दिया गया।
इतनी बड़ी लागत और बड़े स्तर की परियोजना होने के कारण सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता को लेकर स्वाभाविक रूप से अपेक्षाएं भी काफी अधिक थीं। लेकिन यातायात शुरू होने के बाद उन्नाव जिले के एक हिस्से में सड़क के क्षतिग्रस्त होने और धंसने की शिकायत सामने आई।
इसके बाद मामला बढ़ता गया और अब इसकी तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम को लगाया गया है।

NHAI के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के अनुसार तकनीकी खामी उन्नाव जिले के कुरारी के पास पुल की मुख्य संरचना में नहीं, बल्कि पुल तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग में सामने आई है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुल की संरचना और उसके संपर्क मार्ग की तकनीकी संरचना अलग होती है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार क्षति संपर्क मार्ग वाले हिस्से तक सीमित रही है।
NHAI का कहना है कि पहले करीब 20 मीटर लंबे हिस्से में मरम्मत की गई थी। लेकिन उसी स्थान के आसपास दोबारा क्षति दिखाई देने के बाद पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत कराने का निर्णय लिया गया।
इससे साफ है कि NHAI अब केवल दिखाई दे रहे गड्ढे को भरने के बजाय पूरे प्रभावित हिस्से की तकनीकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहता है।
गड्ढे में पानी डाला गया, घंटों तक नहीं निकला
IIT खड़गपुर की टीम द्वारा की गई जांच का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू पानी से जुड़ा परीक्षण बताया जा रहा है।
शिकायत सामने आई थी कि सड़क के नीचे नमी की वजह से हिस्सा कमजोर हो रहा है और सड़क धंसने की समस्या पैदा हो रही है। इसी संभावना की जांच के लिए विशेषज्ञों ने मौके पर परीक्षण किया।
गड्ढे में पानी डाला गया।
लेकिन अपेक्षा यह थी कि पानी किसी न किसी प्राकृतिक या निर्मित निकासी व्यवस्था के माध्यम से बाहर निकलता दिखाई देगा। इसके विपरीत, काफी देर तक पानी जमा रहने की स्थिति सामने आई।
यहीं से सवाल उठता है कि सड़क के नीचे जल निकासी व्यवस्था किस तरह काम कर रही है और क्या पानी का लंबे समय तक जमा रहना सड़क की मजबूती को प्रभावित कर सकता है?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यही सड़क टूटने का अंतिम कारण है, लेकिन विशेषज्ञों की जांच में यह पहलू महत्वपूर्ण जरूर बन गया है।
क्या नमी सड़क धंसने की वजह बनी?
पूरे मामले का एक अहम बिंदु नमी है।
बताया गया कि सड़क के क्षतिग्रस्त होने के संबंध में शिकायत थी कि नीचे नमी जमा होने के कारण संरचना कमजोर हो रही है। यदि सड़क की परतों के नीचे लंबे समय तक पानी या नमी बनी रहती है, तो समय के साथ मिट्टी और अन्य निर्माण परतों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इस एक्सप्रेसवे के मामले में वास्तविक कारण क्या है, इसका अंतिम निर्धारण विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही किया जा सकेगा।
फिलहाल IIT खड़गपुर की टीम का सर्वे इसी दिशा में तकनीकी तथ्यों को जुटाने का काम कर रहा है।

मामला गंभीर होने के बाद NHAI ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी होने तक संबंधित एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली निलंबित कर दी गई है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यातायात के लिए खोली गई सड़क पर अगर मरम्मत कार्य चल रहा है और लोगों को वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन या असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, तो टोल वसूली को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
NHAI ने फिलहाल मरम्मत पूरी होने तक टोल न लेने का निर्णय लिया है।
220 मीटर का पूरा संपर्क मार्ग होगा दुरुस्त
NHAI परियोजना निदेशक के अनुसार पहले प्रभावित हिस्से में करीब 20 मीटर की मरम्मत की गई थी। लेकिन दोबारा क्षति दिखाई देने के बाद अब पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत कराने का फैसला लिया गया है।
यह फैसला बताता है कि प्राधिकरण अब केवल स्थानीय स्तर पर दिखाई देने वाली टूट-फूट को ठीक करने की बजाय पूरे प्रभावित सेक्शन की मजबूती और स्थिरता पर काम करना चाहता है।
कुरारी टोल प्लाजा के पास यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है और वाहनों को मार्ग परिवर्तन के जरिए आगे निकाला जा रहा है।
NHAI के अनुसार मरम्मत का काम लगभग दो दिनों में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद यातायात को सामान्य रूप से संचालित किया जा सकेगा।
सड़क धंसने के पांच मामले या एक ही समस्या?
एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग जगहों पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की चर्चा के बीच NHAI ने यह स्पष्ट किया है कि इसे सड़क धंसने के पांच अलग-अलग मामलों के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
NHAI परियोजना निदेशक के मुताबिक अधिकांश क्षति उसी संपर्क मार्ग तक सीमित रही है।
यानी तस्वीर यह नहीं है कि एक्सप्रेसवे के पांच अलग-अलग हिस्से पूरी तरह से विफल हो गए हैं। बल्कि एक प्रभावित संपर्क मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दी क्षति को व्यापक रूप से देखा जा रहा है।
यही वजह है कि 220 मीटर के पूरे हिस्से को दोबारा दुरुस्त करने का फैसला लिया गया है।
तीन अभियंता हटाए गए
मामले में शुरुआती जवाबदेही तय करने की दिशा में भी कार्रवाई हुई है।
NHAI ने प्रारंभिक कदम के तौर पर तीन अभियंताओं को कार्य से हटा दिया है।
यह कार्रवाई जांच पूरी होने से पहले की गई है, जबकि विस्तृत जांच समिति की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इससे यह संकेत मिलता है कि प्राधिकरण मामले को केवल ठेकेदार या मौसम संबंधी समस्या मानकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि परियोजना के निष्पादन और निगरानी की जिम्मेदारी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांची जा रही है।
NHAI ने केवल अभियंताओं को हटाने तक मामला सीमित नहीं रखा है।
परियोजना के निष्पादन और पर्यवेक्षण में कथित लापरवाही को लेकर निर्माण कंपनी, इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि निर्माण के दौरान तय मानकों का पालन हुआ या नहीं, गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी और पर्यवेक्षण के स्तर पर कोई कमी रही या नहीं।
ऑटोमेटेड तकनीक का इस्तेमाल, फिर भी सवाल क्यों?
इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि NHAI के अनुसार निर्माण के दौरान मजबूती और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
इसका उद्देश्य निर्माण कार्य को अधिक सटीक और नियंत्रित बनाना था।
लेकिन जब निर्माण के बाद सड़क में क्षति सामने आई और नमी तथा जल निकासी जैसे सवाल उठे, तो स्वाभाविक रूप से यह भी पूछा जाने लगा कि तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के बावजूद यह समस्या कैसे पैदा हुई।
यही वह बिंदु है जहां IIT खड़गपुर की जांच की भूमिका अहम हो जाती है। तकनीकी विशेषज्ञों का आकलन यह स्पष्ट करने में मदद कर सकता है कि समस्या डिजाइन की थी, निर्माण प्रक्रिया में थी, सामग्री में थी, जल निकासी में थी या सड़क की नीचे की परतों से जुड़ी किसी अन्य वजह से पैदा हुई।

फिलहाल मामले में सबसे जरूरी इंतजार जांच रिपोर्ट का है।
IIT खड़गपुर की टीम मौके पर अलग-अलग हिस्सों का सर्वे कर रही है। पानी के परीक्षण समेत अन्य तकनीकी जांचों का उद्देश्य सड़क की वास्तविक स्थिति को समझना है।
अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह अधिक स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क क्षतिग्रस्त होने की मूल वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी समस्या को दोबारा रोकने के लिए क्या तकनीकी सुधार जरूरी हैं।
अब निगाह दो चीजों पर
इस पूरे मामले में अब सबकी नजर दो महत्वपूर्ण चीजों पर है।
पहली—मरम्मत कितनी जल्दी और कितनी गुणवत्ता के साथ पूरी होती है।
दूसरी—IIT खड़गपुर की जांच और NHAI की समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आता है।
क्योंकि सड़क की केवल ऊपरी सतह ठीक कर देना काफी नहीं होगा। यदि समस्या वास्तव में नीचे जमा नमी, जल निकासी या संपर्क मार्ग की आधारभूत संरचना से जुड़ी है, तो स्थायी समाधान भी उसी स्तर पर करना होगा।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजना न सिर्फ यात्रियों की सुविधा बल्कि राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी से ज्यादा जरूरी है कि समस्या की जड़ तक पहुंचा जाए और ऐसा समाधान किया जाए जो आने वाले वर्षों में सड़क की मजबूती सुनिश्चित करे।
फिलहाल NHAI ने मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोक दी है, 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत का निर्णय लिया है और तीन अभियंताओं को हटाकर जवाबदेही तय करने की शुरुआती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब असली तस्वीर तकनीकी रिपोर्ट के बाद सामने आएगी।
और सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—
₹4,200 करोड़ के इस एक्सप्रेसवे में आखिर पानी रास्ता भूल गया, या निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था में ही कोई बड़ी कमी रह गई?
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