दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में मॉडल संकुल स्तरीय संघ के MIS सहायकों एवं लेखाकारों का दस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में वित्तीय प्रबंधन, ऋण व्यवस्था, डिजिटल पोर्टल, ऑनलाइन रिकॉर्ड, लेखांकन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।
उत्तर प्रदेश के गांवों में स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने के लिए सिर्फ योजनाएं बनाना ही काफी नहीं है। योजनाओं का पैसा सही जगह पहुंचे, उसका हिसाब पारदर्शी रहे, रिकॉर्ड समय पर अपडेट हो और जरूरत पड़ने पर सही जानकारी तत्काल उपलब्ध हो—इसके लिए प्रशिक्षित लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसी सोच के साथ दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में मॉडल संकुल स्तरीय संघ के एमआईएस सहायकों और लेखाकारों का दस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का समापन सोमवार को हुआ।
यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और राज्य ग्रामीण विकास संस्थान लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का आयोजन श्री अरुण कुमार, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निर्देशन में किया गया।
तकनीकी और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना रहा मुख्य उद्देश्य
समापन अवसर पर संयुक्त मिशन निदेशक श्री देवेंद्र कुमार ओझा ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य संकुल स्तरीय संघ के कैडर को तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। जब स्थानीय स्तर पर काम करने वाले MIS सहायक और लेखाकार अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझेंगे, तो गांवों में योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
ग्रामीण योजनाओं में वित्तीय अनुशासन और सही रिकॉर्ड का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आजीविका से जुड़ रही हैं।
चार जिलों से पहुंचे प्रतिभागी
दस दिवसीय प्रशिक्षण में सिद्धार्थनगर, संत रविदास नगर, औरैया और प्रयागराज जनपदों से आए लेखाकारों और MIS सहायकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
समापन सत्र में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान के प्राचार्य श्री अनुज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. नन्दकिशोर साह, प्रशिक्षण प्रसार अधिकारी श्री रवि प्रकाश और सत्र प्रभारी डॉ. सीमा राठौर मौजूद रहे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय कई विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
धन कहां और कैसे खर्च हो, इस पर विशेष जोर
दस दिनों के दौरान प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन, त्वरित निर्णय क्षमता, सुदृढ़ ऋण प्रणाली और पारदर्शी हिसाब-किताब से संबंधित जानकारी दी गई।
विशेष रूप से यह समझाया गया कि संघ के पास उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल सही स्थान और सही उद्देश्य के लिए कैसे किया जाए। साथ ही लेखा-जोखा इस तरह व्यवस्थित और प्रदर्शनीय रखने की जानकारी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर वित्तीय गतिविधियों को आसानी से समझा और जांचा जा सके।
प्रशिक्षण में महिलाओं के बीच शिक्षा, साक्षरता और जागरूकता बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया।

आज ग्रामीण योजनाओं का काम भी तेजी से डिजिटल हो रहा है। इसी को देखते हुए प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को मोबाइल एप और पोर्टल के माध्यम से आंकड़ों की प्रविष्टि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इसके अलावा मासिक प्रगति आख्या, समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ के अभिलेखों का ऑनलाइन रखरखाव, कार्यसूची तैयार करने, सदस्यता पंजिका के संधारण और प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया को भी समझाया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की गतिविधियों के आधार पर उनका मूल्यांकन भी किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कितनी जानकारी और कौशल हासिल किया।
लेखांकन से लेकर ऋण और पोर्टफोलियो प्रबंधन तक
प्रशिक्षण में संकुल स्तरीय संघ के दृष्टिकोण और उद्देश्य से लेकर सामुदायिक ढांचे तक की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही वित्तीय प्रणाली का महत्व, लेखांकन चक्र, लेखांकन की प्रमुख पुस्तकें, प्राप्ति-भुगतान, आय-व्यय, तुलन पत्र, ऋण प्रबंधन, पोर्टफोलियो प्रबंधन और वित्तीय प्रमुख सूचकांकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षक के रूप में मोरिस कुमार, राज्य संसाधन व्यक्ति और राघवेंद्र कुमार सिंह, जिला संसाधन व्यक्ति उपस्थित रहे।
महिलाओं ने साझा किए अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद वे ग्रामीण योजनाओं की निगरानी पहले की तुलना में बेहतर तरीके से कर पाएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अब बैंक से ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझने और समय पर ऋण लेने में उन्हें मदद मिलेगी। साथ ही संघ के धन का पारदर्शी लेखा-जोखा रखने में भी वे अधिक सक्षम होंगी।
प्रशिक्षण से मिली “अपना हिस्सा स्वयं संभालना पड़ता है” की सीख ने प्रतिभागी महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
प्रशिक्षित MIS सहायक और लेखाकार संघ की रीढ़
श्री नन्दकिशोर साह ने कहा कि प्रशिक्षित MIS सहायक और लेखाकार संकुल स्तरीय संघ की रीढ़ हैं। यदि ये दोनों स्तर मजबूत होंगे तो योजनाओं की निगरानी, वित्तीय प्रबंधन और रिकॉर्ड व्यवस्था भी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि इसी मजबूती के जरिए “गरीबी मुक्त गांव” के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इसका सीधा लाभ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार और आय बढ़ाने के रूप में मिल सकता है।
कुल मिलाकर दस दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को प्रमाण पत्र देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी व्यावहारिक क्षमता देना रहा, जिससे वे गांव स्तर पर वित्तीय व्यवस्था, डिजिटल रिकॉर्ड, ऋण प्रबंधन और योजनाओं की निगरानी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना सकें।
ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी व्यवस्थाओं में जब तकनीकी दक्षता और वित्तीय पारदर्शिता साथ-साथ मजबूत होगी, तो इसका असर कागजों से निकलकर गांवों की महिलाओं और परिवारों की वास्तविक आय और रोजगार तक पहुंचने की उम्मीद है।
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