यूपी सरकार ने 762 नगरीय निकायों में संपत्ति कर के पुराने बकायेदारों के लिए OTS योजना लागू की है। 15 अगस्त से 15 दिसंबर तक चलने वाली योजना में ब्याज और सरचार्ज पर 100% छूट और तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है।
उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से संपत्ति कर का बकाया चला आ रहा है और ब्याज व सरचार्ज के बढ़ते बोझ ने भुगतान मुश्किल बना दिया है, तो ऐसे करदाताओं के लिए सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। प्रदेश सरकार ने सभी 762 नगरीय निकायों में एकमुश्त समाधान योजना यानी OTS लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत पात्र बकायेदारों को अपने पुराने संपत्ति कर का निपटारा करने का मौका मिलेगा और ब्याज एवं सरचार्ज पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
सरकार के मुताबिक यह योजना सिर्फ बकायेदारों को राहत देने तक सीमित नहीं है। इसका दूसरा बड़ा उद्देश्य वर्षों से लंबित राजस्व की वसूली कर नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है, ताकि शहरों में सड़क, पेयजल, जल निकासी, सफाई और प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ज्यादा प्रभावी ढंग से खर्च किया जा सके।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा के नेतृत्व में लाई गई इस योजना को लेकर सरकार का मानना है कि इससे करदाताओं और नगरीय निकायों, दोनों को फायदा होगा।
किसे मिलेगा OTS का लाभ?
एकमुश्त समाधान योजना का लाभ प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में लंबित संपत्ति कर के बकायेदारों को मिलेगा।
इनमें—
- 17 नगर निगम
- 200 नगर पालिका परिषद
- 545 नगर पंचायत
शामिल हैं।
योजना के दायरे में लंबित गृहकर, जलकर और सीवरकर जैसे संपत्ति कर से संबंधित बकाये शामिल किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान हो और करदाताओं को लगातार बढ़ते ब्याज तथा सरचार्ज के बोझ से राहत मिल सके।
ब्याज और सरचार्ज पर 100 प्रतिशत छूट
इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू बकाया संपत्ति कर पर लगने वाले ब्याज एवं सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट है।
यानी जिन करदाताओं के पुराने संपत्ति कर पर लंबे समय से ब्याज और सरचार्ज जुड़ता चला गया है, उनके लिए OTS के तहत उस अतिरिक्त बोझ को हटाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि ब्याज और सरचार्ज की वजह से कई पुराने कर मामले लगातार लंबित रहते हैं। ऐसे मामलों में मूल बकाये का समाधान कराना करदाता के लिए भी मुश्किल हो जाता है और नगरीय निकायों के लिए भी वर्षों से लंबित राजस्व की वसूली चुनौती बनी रहती है।
OTS इसी समस्या का व्यावहारिक समाधान देने की कोशिश है।
15 अगस्त से 15 दिसंबर तक मिलेगा मौका
सरकार ने योजना की अवधि चार महीने निर्धारित की है।
OTS योजना 15 अगस्त 2026 से शुरू होकर 15 दिसंबर 2026 तक चलेगी।
इस अवधि के दौरान पात्र करदाता योजना का लाभ उठाकर अपने पुराने बकाये का निपटारा कर सकेंगे।
सरकार ने नगरीय निकायों को योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 15 अगस्त से 14 सितंबर 2026 के बीच संबंधित करदाताओं और हितधारकों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इसका मकसद यह है कि योजना के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी मिले और पात्र करदाता समय रहते इसका लाभ उठा सकें।
एकमुश्त भुगतान नहीं कर सकते तो तीन किस्तों में जमा करें
सरकार ने OTS में सिर्फ ब्याज और सरचार्ज की राहत ही नहीं दी है, बल्कि बकाया राशि के भुगतान को भी करदाताओं के लिए आसान बनाने की कोशिश की है।
योजना के तहत बकाया संपत्ति कर के भुगतान के लिए अधिकतम तीन किस्तों की सुविधा दी गई है।
करदाता को योजना लागू होने की तारीख से 30 दिन के भीतर कुल बकाये की एक-तिहाई राशि जमा करनी होगी।
इसके बाद बची हुई दो-तिहाई राशि अगले दो महीनों में दो मासिक किस्तों के जरिए जमा की जा सकेगी।
इस तरह पूरा देय भुगतान अधिकतम तीन महीने की अवधि में पूरा करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था से उन करदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है जो एक साथ पूरा बकाया जमा करने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन अपने पुराने कर विवाद को समाप्त करना चाहते हैं।
सरकार के सामने दोहरा लक्ष्य—राहत भी, राजस्व भी
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।
उनके मुताबिक OTS इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
सरकार का तर्क है कि एक तरफ करदाताओं को पुराने बकाये के निपटारे का सरल अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को लंबे समय से अटके राजस्व की वसूली हो सकेगी।
दरअसल, नगरीय निकायों की आर्थिक मजबूती सीधे तौर पर शहरों में होने वाले विकास कार्यों से जुड़ी होती है। यदि निकायों की अपनी आय मजबूत होती है तो उन्हें विकास योजनाओं और जरूरी नागरिक सुविधाओं के लिए दूसरे स्रोतों पर कम निर्भर रहना पड़ता है।
OTS से शहरों की सड़क, नाली और पानी की व्यवस्था पर खर्च होगा राजस्व
सरकार के मुताबिक OTS के जरिए मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल शहरी क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकेगा।
इसमें प्रमुख रूप से—
सड़क निर्माण और मरम्मत,
जल निकासी व्यवस्था,
पेयजल सुविधा,
स्वच्छता,
प्रकाश व्यवस्था
और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
यानी सरकार OTS को सिर्फ टैक्स वसूली की योजना के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे शहरी विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के माध्यम के तौर पर भी पेश कर रही है।
पुराने कर विवादों को खत्म करने की कोशिश
OTS योजना का एक अहम उद्देश्य न्यायालयीय विवादों में कमी लाना भी बताया गया है।
लंबे समय से संपत्ति कर को लेकर चले आ रहे विवादों में ब्याज और सरचार्ज लगातार जुड़ते रहते हैं। इससे करदाता और नगरीय निकाय दोनों के बीच विवाद लंबा खिंच सकता है।
सरकार को उम्मीद है कि एक निश्चित समयसीमा में राहत देकर पुराने बकायों का समाधान कराया जा सकेगा और ऐसे मामलों की संख्या कम होगी।
ए. के. शर्मा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता करदाताओं की सुविधा के साथ-साथ नगरीय निकायों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण को सुनिश्चित करना है।
करदाताओं के लिए यह मौका क्यों अहम है?
OTS की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी समयसीमा है।
योजना 15 अगस्त से 15 दिसंबर 2026 तक ही लागू रहेगी। यानी पुराने संपत्ति कर बकाये वाले करदाताओं के पास अपने मामले का समाधान करने के लिए एक निर्धारित अवधि है।
इसके साथ ही ब्याज और सरचार्ज पर 100 प्रतिशत छूट तथा अधिकतम तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा इसे उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है जो लंबे समय से बकाया कर को लेकर परेशान हैं।
हालांकि करदाताओं को योजना की पात्रता, बकाया राशि और भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी स्थानीय शर्तों की जानकारी अपने संबंधित नगरीय निकाय से प्राप्त करनी चाहिए।
आखिर सरकार को इस योजना से कितनी उम्मीद?
उत्तर प्रदेश के 762 नगरीय निकायों में लंबे समय से लंबित संपत्ति कर की वसूली अपने आप में बड़ा वित्तीय मुद्दा है। ऐसे में सरकार की नजर सिर्फ बकाया रकम वसूलने पर नहीं, बल्कि कर भुगतान की संस्कृति को मजबूत करने पर भी है।
यदि बड़ी संख्या में बकायेदार OTS का लाभ उठाते हैं तो नगरीय निकायों को एक साथ अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी गति मिल सकती है।
अब देखना होगा कि 15 अगस्त से शुरू होने वाली यह चार महीने की योजना कितने पुराने कर विवादों को खत्म करती है और नगरीय निकायों की तिजोरी में कितना अतिरिक्त राजस्व पहुंचाती है।
फिलहाल सरकार ने साफ संदेश दिया है—पुराना बकाया चुकाने का मौका है, ब्याज और सरचार्ज से राहत है और भुगतान के लिए तीन किस्तों की सुविधा भी है।
यानी OTS योजना करदाताओं के लिए राहत और नगरीय निकायों के लिए राजस्व जुटाने की दोहरी कोशिश के रूप में सामने आई है।
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