गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव शनिवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रामलला के दर्शन-पूजन के साथ मंदिर परिसर में बने अन्य मंदिरों में भी मत्था टेका और लगभग एक घंटे तक परिसर में रहे।
आस्था, आध्यात्म और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव शनिवार को रामनगरी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रभु श्रीराम के बाल रूप रामलला के दर्शन-पूजन किए और मंदिर परिसर में बने अन्य मंदिरों में भी जाकर श्रद्धा पूर्वक शीश झुकाया।
डॉ. जगदेव लगभग एक घंटे तक मंदिर परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने न केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, बल्कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। भव्य और नव्य स्वरूप में सजी अयोध्या को देखकर वे विशेष रूप से प्रफुल्लित नजर आए।
उन्होंने राम मंदिर अयोध्या परिसर में बने अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में भी जाकर श्रद्धा अर्पित की। मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें निर्माण कार्यों की प्रगति और भावी योजनाओं की जानकारी दी गई।

वाल्मीकि एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
इससे पहले शनिवार सुबह डॉ. भरत जगदेव अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ निजी विमान से महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए भव्य तैयारियां की गई थीं। शंखनाद और कलाकारों के भावपूर्ण नृत्य प्रदर्शन के बीच उनका पारंपरिक अंदाज में अभिनंदन किया गया।
स्वागत समारोह में प्रदेश सरकार और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। खाद्य एवं रसद मंत्री सतीश चंद्र शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान, कमिश्नर राजेश कुमार, डीआईजी सोमेन वर्मा और जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की।

सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम
एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। एयरपोर्ट से लेकर मंदिर परिसर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू रही। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आस्था का सेतु
डॉ. भरत जगदेव का यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत और गुयाना के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संबंधों को भी नई मजबूती देने वाला साबित हुआ। अयोध्या की विकसित होती आधुनिक संरचना और आध्यात्मिक वातावरण ने विदेशी प्रतिनिधिमंडल को प्रभावित किया।

मजबूत समापन पंक्ति:
रामनगरी में गूंजे शंखनाद के बीच यह दौरा एक संदेश दे गया—आस्था की डोर सीमाओं से परे होती है, और अयोध्या अब केवल भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक श्रद्धा का केंद्र बनती जा रही है।
COMMENTS