लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को बड़ी सौगात देते हुए पारदर्शी भर्ती और माफिया-मुक्त व्यवस्था का दावा किया
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन सभागार में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन, ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस और नियुक्ति पत्र वितरित किए। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्र भवनों और बाल विकास परियोजना कार्यालयों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य में पारदर्शिता, सुशासन और माफिया-मुक्त व्यवस्था को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि अप्रैल से आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक नई कॉर्पोरेशन व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे उनके शोषण को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से काम करने वाले कर्मियों का भारी शोषण होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कंपनियां माफिया या राजनीतिक संरक्षण में चलती थीं, जो सरकार से 10-12 हजार रुपये लेते थे, लेकिन कर्मचारियों को केवल 5-6 हजार रुपये ही दिए जाते थे। इतना ही नहीं, नियुक्ति के समय भी उनसे पैसे वसूले जाते थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतने कम वेतन में कोई व्यक्ति अपनी आजीविका कैसे चला सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अप्रैल से नई प्रणाली को हर हाल में लागू किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में नई नियुक्तियों की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि 46 जनपदों में 754 नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 17,686 और 754 नई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का चयन प्रक्रिया में है।
योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि इन नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और किसी भी चयनित उम्मीदवार ने न तो सिफारिश करवाई है और न ही किसी प्रकार का पैसा दिया है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि उस समय भर्ती प्रक्रिया में ‘पर्ची और खर्ची’ का बोलबाला था।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गरीबों के हक पर डकैती डाली जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुपोषित बच्चों और माताओं के लिए आने वाला पोषाहार भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़े-बड़े माफिया सक्रिय थे, जो पोषाहार की गुणवत्ता और वितरण दोनों को प्रभावित करते थे।
उन्होंने कहा कि पहले पोषाहार वितरण का ठेका ऐसे लोगों के पास था, जो इसकी गुणवत्ता की परवाह नहीं करते थे। इससे बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता था और यही कारण था कि उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहा जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार ने इन सभी अनियमितताओं को समाप्त कर पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष 19,424 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और 3,077 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे, और इस पूरी प्रक्रिया में एक भी शिकायत सामने नहीं आई।

कार्यक्रम में वितरित किए गए स्मार्टफोन और ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस को भी एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन उपकरणों के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी कर सकेंगी, जिससे कुपोषण को कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में विपक्ष पर भी हमला बोला और कहा कि जो लोग पहले भ्रष्टाचार और अव्यवस्था में शामिल थे, वही आज मंचों पर खड़े होकर भाषण देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कार्यों को देखकर अब केवल हंसी आती है।
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम न केवल आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के लिए नई सुविधाओं की घोषणा का मंच बना, बल्कि राज्य सरकार की नीतियों और दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करने का अवसर साबित हुआ।
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