उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत ₹15.08 करोड़ के आठ नए निवेश प्रस्तावों को अप्रेजल समिति से मंजूरी के लिए संस्तुति दी है। प्रस्तावों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, विस्तार और ऑन-ग्रिड रूफटॉप सोलर पावर परियोजनाएं शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इससे किसानों की आय, युवाओं को रोजगार और प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत ₹15.08 करोड़ की कुल प्रस्तावित निवेश राशि वाले आठ नए निवेश प्रस्तावों को अप्रेजल समिति ने तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष भेजने की संस्तुति दी है।
सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों से प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
केशव प्रसाद मौर्य बोले— नीति के सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है।
उन्होंने कहा कि नीति के लागू होने के बाद निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है और निवेश प्रस्तावों के पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण से प्रदेश में उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।
रोजगार और किसानों की आय पर रहेगा विशेष फोकस
डिप्टी सीएम ने विश्वास जताया कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से—
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प्रदेश में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
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कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा।
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युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
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उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
युवाओं और महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह उत्साहजनक संकेत है कि प्रदेश के युवा अब पारंपरिक व्यवसायों से आगे बढ़कर आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश अब निवेशकों के लिए सुरक्षित, अनुकूल और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में तेजी से उभर रहा है।
अप्रेजल समिति की बैठक में क्या हुआ?
उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में गोमतीनगर स्थित रेशम निदेशालय में अप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कुल ₹15.08 करोड़ के आठ निवेश प्रस्तावों की तकनीकी और वित्तीय समीक्षा की गई।
सभी प्रस्तावों को आवश्यक शर्तों के साथ राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए भेजने की संस्तुति दी गई।
किन परियोजनाओं पर होगा निवेश?
बैठक में जिन परियोजनाओं पर विचार किया गया, उनमें शामिल हैं—
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नमकीन निर्माण इकाइयाँ
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ब्रेड एवं रस्क उत्पादन
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सोया आधारित खाद्य उत्पाद
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पास्ता निर्माण
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पोल्ट्री फीड उत्पादन
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अन्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना एवं विस्तार
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ऑन-ग्रिड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट
सरकार का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता और हरित औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देना है।
किसानों से सीधे खरीद पर जोर
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने निवेशकों से अपेक्षा की कि वे अधिक से अधिक कच्चा माल स्थानीय किसानों से खरीदें।
उन्होंने कहा कि इससे कृषि और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय स्थापित होगा तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।

पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी निवेशकों को—
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पर्यावरणीय मानकों,
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अग्नि सुरक्षा नियमों,
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वैधानिक स्वीकृतियों,
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तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े सभी तकनीकी एवं दस्तावेजी मानकों
का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
निवेशकों को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश
बैठक में निवेशकों से कहा गया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर—
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बैंक अप्रेजल,
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आयकर रिटर्न,
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जीएसटी रिटर्न,
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और अन्य आवश्यक दस्तावेज
विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि प्रस्तावों का अगले स्तर पर समयबद्ध निस्तारण किया जा सके।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार से—
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कृषि उत्पादों की बर्बादी कम होगी,
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किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा,
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ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा,
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स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी,
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और प्रदेश की निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होगी।
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