उत्तर प्रदेश सरकार ने गोसंरक्षण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 11 जिलों में 14 नए वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का लोकार्पण किया है। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुणवत्ता, जनसहभागिता और आधुनिक सुविधाओं पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार को पशुपालन निदेशालय, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 11 जनपदों में 14 नवनिर्मित वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। सरकार का कहना है कि इन केंद्रों के शुरू होने से हजारों निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय, बेहतर चिकित्सा, चारा और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार गोवंश संरक्षण के लिए लगातार गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नए केंद्रों की स्थापना केवल गोवंशों को आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर जीवन, स्वास्थ्य सुविधाएं और समुचित देखभाल उपलब्ध कराने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
11 जिलों में बने 14 नए वृहद गोसंरक्षण केंद्र
सरकार द्वारा जिन जिलों में नए केंद्रों का लोकार्पण किया गया है, उनमें अमेठी में चार, जबकि चंदौली, गाजीपुर, कन्नौज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बाराबंकी और शाहजहांपुर में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र शामिल है।
प्रत्येक केंद्र में लगभग 400 गोवंशों को सुरक्षित रखने की क्षमता विकसित की गई है। इन केंद्रों में पशुओं के लिए चारा, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं, पर्याप्त भूसा भंडारण और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

प्रदेश में 11.75 लाख गोवंशों का संरक्षण
कार्यक्रम में मंत्री ने प्रदेश में चल रहे गोसंरक्षण अभियान की विस्तृत जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 5,517 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 507 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 213 कांजी हाउस तथा शहरी क्षेत्रों में 273 कान्हा गो आश्रय स्थल संचालित हैं।
इन सभी को मिलाकर प्रदेश में कुल 6,510 गो आश्रय स्थलों में लगभग 11.75 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत 1,11,047 लाभार्थियों को लगभग 1.79 लाख निराश्रित गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं, जिससे गोसंरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
हर दिन ₹6.5 करोड़ खर्च कर रही सरकार
धर्मपाल सिंह ने बताया कि राज्य सरकार गोवंशों के भरण-पोषण पर प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ खर्च कर रही है। यह राशि गो आश्रय स्थलों में रह रहे गोवंशों और सहभागिता योजना के अंतर्गत सुपुर्द किए गए पशुओं की देखभाल पर व्यय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आश्रय उपलब्ध कराना नहीं बल्कि गोवंशों की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है।

632 केंद्रों की योजना, 507 का निर्माण पूरा
सरकार ने प्रदेश में कुल 632 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों के निर्माण को मंजूरी दी है। इनमें से अब तक 507 केंद्रों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 480 केंद्र पूरी तरह क्रियाशील भी हो चुके हैं।
प्रत्येक वृहद गोसंरक्षण केंद्र की निर्माण लागत लगभग ₹160.12 लाख निर्धारित की गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए अब तक ₹8,336.60 करोड़ की धनराशि जारी की है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित ₹100 करोड़ के बजट में से अब तक ₹53.78 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा
मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गोसंरक्षण केंद्रों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से अपेक्षा की कि वे इन केंद्रों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएं और अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करें।
उन्होंने आम नागरिकों से भी गोसंरक्षण अभियान में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि सामाजिक सहभागिता से ही इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
पशुपालन विभाग का सोशल मीडिया सेल शुरू
कार्यक्रम के दौरान पशुधन मंत्री ने पशुपालन विभाग के सोशल मीडिया सेल का भी औपचारिक उद्घाटन किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की योजनाओं, उपलब्धियों और गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाए, ताकि आम लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी तेजी से पहुंचे।
गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना
पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि सरकार गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि गोबर आधारित उत्पादों जैसे—
-
गो दीप
-
धूपबत्ती
-
गोलॉग
-
गोबर के गमले
-
वर्मी कम्पोस्ट
-
सीबीजी (Compressed Bio Gas) उत्पादन इकाइयों
को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन परियोजनाओं में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे केंद्र
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि सभी नए वृहद गोसंरक्षण केंद्र आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किए गए हैं।
इनमें—
-
हरा चारा उत्पादन
-
भूसा भंडारण
-
स्वच्छ पेयजल
-
नियमित पशु चिकित्सा सेवाएं
-
वैज्ञानिक प्रबंधन
जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इन केंद्रों के संचालन में एनजीओ, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और कॉरपोरेट संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में विशेष सचिव देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. संगीता तिवारी, डॉ. प्रमोद कुमार सहित पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों के जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य नागरिक वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
सरकार का संदेश स्पष्ट
इस अवसर पर सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पशुधन संरक्षण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। नए वृहद गोसंरक्षण केंद्रों के माध्यम से प्रदेश सरकार निराश्रित गोवंशों के लिए बेहतर प्रबंधन और दीर्घकालिक समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
COMMENTS