दिल्ली के सिविक सेंटर के पास एंटी-नारकोटिक्स सेल ने एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 23.74 ग्राम MDMA बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी मेडिकल अटेंडेंट के रूप में भारत आया था, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद भी वापस नहीं लौटा। पूछताछ में उसने कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई और एक अन्य नाइजीरियाई नागरिक से प्रतिबंधित पदार्थ हासिल करने की जानकारी दी है।
राजधानी दिल्ली में नशीले पदार्थों के कथित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी चिडेरा जोनाथन के कब्जे से 23.74 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली MDMA बरामद की गई है, जिसे पुलिस ने व्यावसायिक मात्रा बताया है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में रह रहा था। पुलिस के अनुसार वह Operation VISTA के तहत भी वांछित था। यह अभियान उन विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाया जा रहा है जो वैध वीजा समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे हैं।
इस मामले में कमला मार्केट थाने में FIR संख्या 263/26, दिनांक 19 अगस्त 2026, के तहत NDPS Act की धारा 22 में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद MDMA कहां से लाई गई, इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और इस कथित नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।
खुफिया सूचना से शुरू हुआ ऑपरेशन
पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त 2026 को एंटी-नारकोटिक्स सेल के एएसआई सतवीर को सूचना मिली थी कि एक नाइजीरियाई नागरिक सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के इलाके में नशीले पदार्थों की सप्लाई में कथित रूप से शामिल है।
इस सूचना को आगे विकसित करने की जिम्मेदारी एसआई पंकज कुमार ने संभाली। जमीन पर सूचना की पुष्टि और अन्य आवश्यक जानकारी जुटाने के बाद मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। अधिकारियों ने सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने संदिग्ध को पकड़ने के लिए एक विशेष योजना तैयार की।
सिविक सेंटर के गेट नंबर-4 के पास बिछाया जाल
पुलिस टीम ने कमला मार्केट स्थित सिविक सेंटर के गेट नंबर-4 के पास जाल बिछाया। पुलिस के अनुसार संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रखी गई और जैसे ही उसकी पहचान पुख्ता हुई, टीम ने उसे दबोच लिया।
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान 26 वर्षीय चिडेरा जोनाथन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक वह वर्तमान में तुगलकाबाद एक्सटेंशन, दिल्ली में रह रहा था और मूल रूप से सिटी-उली, अमरबरा स्टेट, नाइजीरिया का निवासी है।
तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से 23.74 ग्राम MDMA बरामद करने का दावा किया।
MDMA एक प्रतिबंधित मादक पदार्थ है और पुलिस ने बरामद मात्रा को मामले में महत्वपूर्ण बताया है। बरामदगी के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रहने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की भारत में मौजूदगी और इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार चिडेरा जोनाथन अक्टूबर 2024 में मेडिकल वीजा पर मेडिकल अटेंडेंट के रूप में भारत आया था। लेकिन वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद वह अपने देश वापस नहीं गया और कथित तौर पर भारत में ही रहना जारी रखा।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के पास गिरफ्तारी के समय कोई वैध वीजा नहीं था। इसी कारण वह Operation VISTA के तहत भी वांछित था।
अब इस मामले में आरोपी की इमिग्रेशन स्थिति की सूचना संबंधित दूतावास को भी भेजी जा रही है।
पूछताछ में दूसरे नाइजीरियाई नागरिक का नाम आया
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान चिडेरा जोनाथन ने दावा किया कि उसने बरामद नशीला पदार्थ एक अन्य नाइजीरियाई नागरिक प्रिंस से प्राप्त किया था।
बताया गया है कि प्रिंस भी कथित तौर पर तुगलकाबाद एक्सटेंशन इलाके में रहता है।
पुलिस अब इस जानकारी की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों के सामने यह बड़ा सवाल है कि कथित रूप से MDMA उपलब्ध कराने वाला प्रिंस कौन है, वह कहां है और उसके पास नशीले पदार्थों की सप्लाई का स्रोत क्या है।
यह भी जांच का विषय है कि चिडेरा जोनाथन कथित तौर पर केवल स्थानीय स्तर पर ड्रग्स की सप्लाई कर रहा था या फिर उसके संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
दैनिक खर्च के लिए ड्रग्स तस्करी में आने का दावा
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वीजा खत्म होने के बाद वह भारत में ही रुक गया था। उसने यह भी दावा किया कि अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए वह नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ गया।
हालांकि पुलिस इस बयान की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आरोपी कब से इस कथित गतिविधि में शामिल था, उसने अब तक कितनी बार नशीले पदार्थों की सप्लाई की और उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे।
मोबाइल फोन भी पुलिस के कब्जे में
MDMA के अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। पुलिस के अनुसार इस फोन में लगी SIM किसी दूसरे व्यक्ति के नाम और पहचान पत्र पर पंजीकृत है।
यह बरामदगी जांच में अहम साबित हो सकती है। पुलिस मोबाइल फोन के जरिए आरोपी के संपर्कों, कॉल रिकॉर्ड, संदेशों और संभावित ड्रग सप्लाई नेटवर्क की जांच कर सकती है।
यह भी देखा जा रहा है कि SIM किस व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है और वह व्यक्ति आरोपी से किस तरह जुड़ा हुआ है।
इन अधिकारियों की टीम ने दिया कार्रवाई को अंजाम
यह कार्रवाई सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एंटी-नारकोटिक्स सेल की विशेष टीम ने की।
टीम में एसआई मोनू चौहान, एसआई पंकज कुमार, एएसआई सुधीर, एएसआई सुनील, एएसआई सतवीर, हेड कांस्टेबल करनाल, हेड कांस्टेबल दिलशाद, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र, हेड कांस्टेबल प्रदीप, कांस्टेबल दीपक, नितिन, शैले, विक्रम और महिला कांस्टेबल हिमांशी शामिल थीं।
पूरे ऑपरेशन को इंस्पेक्टर राहुल सिंह अधिकारी और ACP/Ops/Central की प्रत्यक्ष निगरानी में अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार टीम ने खुफिया सूचना पर तेजी से कार्रवाई करते हुए संदिग्ध को पकड़ने में सफलता हासिल की।
अब जांच के सामने कई बड़े सवाल
गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच केवल 23.74 ग्राम MDMA की बरामदगी तक सीमित नहीं है। जांच अब कथित सप्लाई चेन तक पहुंचने पर केंद्रित है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि—
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बरामद MDMA भारत में कहां से लाई गई?
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आरोपी को यह नशीला पदार्थ किस नेटवर्क के जरिए मिला?
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पूछताछ में सामने आया प्रिंस कौन है और वह कहां है?
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आरोपी किन लोगों को कथित रूप से ड्रग्स सप्लाई करता था?
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दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत SIM का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था?
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क्या इस मामले में अन्य विदेशी या भारतीय नागरिक भी शामिल हैं?
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आरोपी कितने समय से भारत में वीजा अवधि समाप्त होने के बाद रह रहा था?
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।
मामला दर्ज, जांच जारी
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR संख्या 263/26, दिनांक 19 अगस्त 2026 के तहत कमला मार्केट थाने में NDPS Act की धारा 22 में मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ और आगे की जांच जारी है। पुलिस का फोकस अब कथित ड्रग सप्लाई नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने पर है। साथ ही आरोपी के इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर संबंधित दूतावास को भी सूचना भेजी जा रही है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर नशीले पदार्थों की सप्लाई और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की जांच को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता को सामने ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 23.74 ग्राम MDMA के साथ पकड़ा गया चिडेरा जोनाथन केवल एक कथित सप्लायर था या उसके पीछे दिल्ली में सक्रिय कोई बड़ा नेटवर्क मौजूद है?
पुलिस की आगे की जांच से इस सवाल का जवाब सामने आ सकता है।
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