करोड़ों रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े से जुड़े 50,000 रुपये के इनामी अपराधी बलदेव उर्फ बल्लू को यूपी STF ने हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी फर्में बनाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का आरोप है।
करोड़ों रुपये के बहुचर्चित जीएसटी घोटाले में वांछित और 50,000 रुपये के इनामी अपराधी बलदेव उर्फ बल्लू को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी थाना सेक्टर-20 कमिश्नरेट, गौतमबुद्धनगर में दर्ज कई गंभीर मामलों के संबंध में की गई है।
एसटीएफ को लंबे समय से आरोपी की तलाश थी। इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ नोएडा की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से हरियाणा के हिसार जिले में दबिश दी और 27 फरवरी 2026 को शाम लगभग 7 बजे आरोपी को हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को थाना सेक्टर-20 कमिश्नरेट लाकर आवश्यक विधिक कार्रवाई की गई।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसकी उम्र लगभग 38 वर्ष है और उसने वर्ष 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। इसके बाद उसने हिसार, हरियाणा में रहकर व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2012 में उसने हिसार में मोबाइल शॉप खोली, लेकिन घाटा होने के कारण दुकान बंद कर दी। इसके बाद वर्ष 2014 में वह पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त के काम में लग गया।
इसी दौरान उसकी पहचान दिल्ली निवासी अमित गोयल से हुई, जिसने उसे जीएसटी फ्रॉड के अवैध नेटवर्क से जोड़ा। पैसों के लालच में आकर बलदेव उर्फ बल्लू ने गिरोह के साथ मिलकर फर्जी व्यक्तियों के नाम पर पैन कार्ड हासिल किए और उनके जरिए जीएसटी में पंजीकरण कराकर 3500 से अधिक फर्जी फर्में तैयार कीं।
इन फर्जी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया और ई-वे बिल बनाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी को अंजाम दिया गया। प्रारंभिक जांच में यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया है।
इस मामले में पहले भी गिरोह के कई सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं और इनके खिलाफ थाना सेक्टर-20 में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि अब तक बलदेव उर्फ बल्लू गिरफ्तारी से बचता रहा, जिस पर कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर द्वारा 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
आरोपी के खिलाफ थाना सेक्टर-20 कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें IPC की धारा 420, 467, 468, 120-बी तथा गैंगस्टर एक्ट शामिल हैं। फिलहाल आरोपी को संबंधित मुकदमों में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है और आगे की विवेचना जारी है।
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