दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कपासहेड़ा बॉर्डर के पास एक दुकान पर छापा मारकर भारी मात्रा में एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पाद बरामद किए। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।
राजधानी दिल्ली में आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज टीम ने कपासहेड़ा बॉर्डर के पास एक दुकान पर छापा मारकर भारी मात्रा में एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पाद बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
क्राइम ब्रांच की टीम लगातार संगठित अपराधों और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने वाले मामलों पर नजर बनाए हुए थी। इसी क्रम में 8 अप्रैल 2026 को टीम को एक विश्वसनीय सूचना मिली कि कपासहेड़ा बॉर्डर के पास स्थित एक दुकान का मालिक एक्सपायर्ड खाद्य और कॉस्मेटिक उत्पादों को सस्ते दामों पर बेच रहा है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सब-इंस्पेक्टर नवीन, सब-इंस्पेक्टर ऋषि कुमार, हेड कांस्टेबल राज प्रकाश, संदीप, प्रेम प्रकाश और कांस्टेबल विधि शामिल थे। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर यशेंद्र सिंह कर रहे थे, जबकि पूरी कार्रवाई एसीपी सतेन्द्र मोहन की निगरानी में की गई।
डिकॉय ऑपरेशन में सामने आया सच
सूचना की पुष्टि करने के लिए पुलिस ने पहले डिकॉय ग्राहकों को दुकान पर भेजा। इन ग्राहकों ने वहां से खाद्य सामग्री खरीदी। जब इन उत्पादों की जांच की गई, तो पाया गया कि सभी सामान एक्सपायर्ड थे और उन्हें कम कीमत पर बेचा जा रहा था।
इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल छापा मारकर दुकान संचालक को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अब्दुल मन्नान खान उर्फ मोनू के रूप में हुई है, जो दिल्ली के बिजवासन इलाके का रहने वाला है और उसकी उम्र 34 वर्ष है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से एक्सपायर्ड और खराब उत्पादों का कारोबार कर रहा था।
मौके से भारी मात्रा में एक्सपायर्ड सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड और संदिग्ध खाद्य एवं कॉस्मेटिक उत्पाद मिले। इनमें शामिल हैं—
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मैदा (राजधानी और फॉर्च्यून ब्रांड)
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सूजी (राजधानी और फॉर्च्यून)
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सुप्रीम हार्वेस्ट पोहा और रवा
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मसाले (गोल्डी और एवरेस्ट)
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पीनट बटर
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बेबी फूड सप्लीमेंट (नेस्ले और डेक्सो ग्रो)
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विभिन्न कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर उत्पाद
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दालें और डेयरी उत्पाद
इन खाद्य उत्पादों का कुल वजन लगभग 900 किलोग्राम था। इसके अलावा लगभग 2000 किलोग्राम डेयरी उत्पाद, जिनमें दही और पनीर शामिल थे, को फूड सेफ्टी अधिकारियों की मौजूदगी में नष्ट कर दिया गया।
फूड सेफ्टी विभाग ने लिए सैंपल
छापे के दौरान फूड सेफ्टी और ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया। उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया और आगे की जांच के लिए विभिन्न उत्पादों के सैंपल एकत्र किए।
मौके पर मौजूद एक महिला ग्राहक ने भी शिकायत की कि उसने एक दिन पहले इसी दुकान से सामान खरीदा था, जो बाद में एक्सपायर्ड निकला, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हुआ।
आरोपी का तरीका: सस्ता खरीदो, ज्यादा कमाओ
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह एक्सपायर्ड, एक्सपायरी के करीब या खराब हो चुके उत्पादों को बेहद सस्ते दामों पर खरीदता था। इसके बाद वह इन सामानों को अपनी दुकान में स्टोर कर ग्राहकों को कम कीमत पर बेचता था।
सस्ते दाम का लालच देकर वह ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करता और इस अवैध कारोबार से मोटा मुनाफा कमाता था। इस दौरान वह जानबूझकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था।

आरोपी की पृष्ठभूमि
अब्दुल मन्नान खान केवल दूसरी कक्षा तक पढ़ा है और अपने परिवार के साथ रहता है। वर्ष 2022 में वह सब्जी बेचने का काम करता था। इसी दौरान उसका संपर्क कुछ गोदाम कर्मचारियों से हुआ, जिन्होंने उसे एक्सपायर्ड और नजदीकी एक्सपायरी वाले उत्पादों के कारोबार से परिचित कराया।
इसके बाद उसने इस अवैध धंधे को अपना व्यवसाय बना लिया और एक दुकान खोलकर एक्सपायर्ड सामान को असली बताकर बेचना शुरू कर दिया।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर नंबर 79/2026, दिनांक 09 अप्रैल 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 275, 318(4), 125, 61(2) तथा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 की धारा 51 और 59 के तहत मामला दर्ज किया है।
जब्त किए गए सभी सामान और अन्य साक्ष्यों को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जे में ले लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
यह मामला न केवल उपभोक्ता धोखाधड़ी का है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर अपराध है। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को उजागर किया है, जिससे आम लोग अनजाने में प्रभावित हो सकते थे।
अब सवाल यह है कि ऐसे और कितने नेटवर्क शहर में सक्रिय हैं और प्रशासन कब तक उन पर शिकंजा कस पाएगा।
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