दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में बेच रहा था। गिरोह सरकारी सप्लाई की दवाओं के लेबल हटाकर उन्हें दोबारा पैक कर नकली ब्रांडिंग के साथ दिल्ली-NCR और पूर्वोत्तर राज्यों में बेचता था। कार्रवाई में चार आरोपी गिरफ्तार हुए हैं और करीब 6 करोड़ रुपये की नकली एवं संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो नकली और दोबारा पैक की गई जीवनरक्षक दवाओं का कारोबार चला रहा था। यह गिरोह सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी गई दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में बेच रहा था और उनका नेटवर्क दिल्ली-NCR से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक फैला हुआ था।
क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-1 टीम ने इस पूरे रैकेट का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के पास से करीब 6 करोड़ रुपये मूल्य की नकली, संदिग्ध और सरकारी सप्लाई की दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें रेबीज वैक्सीन, इंसुलिन, ह्यूमन एल्ब्यूमिन, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन और स्नेक वेनम एंटीसीरम जैसी बेहद महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
22 अप्रैल 2026 को इंस्पेक्टर लिछमन के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम में एसआई शैलेंद्र तिवारी, एसआई जितेंद्र सिंह, एसआई बिजेंद्र, एएसआई जोगिंदर, हेड कांस्टेबल सोहित, हेड कांस्टेबल सूर्य प्रकाश और महिला एएसआई बीप्ति शामिल थीं। पूरी कार्रवाई एसीपी सुनील श्रीवास्तव की निगरानी में चल रही थी।

टीम को दिल्ली में नकली और सरकारी सप्लाई वाली दवाओं की अवैध बिक्री की जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था। जांच के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एक संगठित गिरोह सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी गई दवाओं को इकट्ठा कर उनके असली लेबल हटाता है और फिर नए लेबल लगाकर खुले बाजार में बेचता है।
सूचना मिलने के बाद दिल्ली सरकार के ड्रग्स कंट्रोल विभाग को भी कार्रवाई में शामिल किया गया। संयुक्त टीम ने मुखर्जी नगर स्थित इंद्रा विकास कॉलोनी में छापा मारा, जहां एक अवैध निर्माण और री-पैकेजिंग यूनिट का खुलासा हुआ।
मुखर्जी नगर में चल रही थी ‘मौत की फैक्ट्री’
छापेमारी के दौरान मौके से मनोज कुमार जैन नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि वह इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसके ठिकाने से भारी मात्रा में नकली दवाएं, सरकारी सप्लाई की दवाएं, पैकेजिंग सामग्री, नकली लेबल और दवा पैक करने वाली मशीनें बरामद की गईं।
बरामद दवाओं में—
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7900 हेपबेस्ट टैबलेट
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6000 एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट
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953 रेबीज वैक्सीन
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18,000 ज़ेरोडोल-एसपी टैबलेट
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1500 विटामिन D3 इंजेक्शन
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315 इंसुलिन ग्लार्जिन कार्ट्रिज
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2500 हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन
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55 स्नेक वेनम एंटीसीरम
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1235 ह्यूमन एल्ब्यूमिन आधारित उत्पाद
सहित कई अन्य जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं।
पुलिस ने मौके से चार लेबलिंग और पैकेजिंग मशीनें भी जब्त की हैं, जिनका इस्तेमाल नकली पैकिंग तैयार करने में किया जाता था।
यूपी से आती थीं सरकारी दवाएं
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाएं हासिल करता था। आरोपी विक्रम सिंह उर्फ सनी, जो पेशे से लैब टेक्नीशियन है, अस्पतालों में अपनी पहुंच का फायदा उठाकर दवाएं इकट्ठा करता था।
उसने पूछताछ में बताया कि सरकारी अस्पतालों में कई दवाएं उपयोग में नहीं आती थीं, जबकि बाजार में उनकी भारी मांग थी। इसी लालच में उसने अपने साथी वतन के साथ मिलकर दवाओं की सप्लाई शुरू की।
आरोपी वतन, जो पहले सर्जिकल सामान का कारोबार करता था, इन दवाओं को मनोज कुमार जैन तक पहुंचाता था। इसके बाद मुखर्जी नगर स्थित यूनिट में दवाओं के लेबल बदले जाते थे और उन्हें नए पैकेट में भरकर बाजार में भेज दिया जाता था।

पंजाब से जुड़ा नकली निर्माण नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपी राजू कुमार मिश्रा ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने पंजाब के डेराबस्सी में नकली ह्यूमन एल्ब्यूमिन बनाने की यूनिट स्थापित की थी। कोरोना काल में मास्क और ग्लव्स के कारोबार से कमाए पैसे से उसने यह नेटवर्क खड़ा किया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, इम्फाल और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों को हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन की भी आशंका है।
गंभीर सार्वजनिक खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली जीवनरक्षक दवाओं का यह कारोबार सीधे लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। अगर ये दवाएं मरीजों तक पहुंच जातीं, तो इलाज की जगह जान का खतरा बढ़ सकता था।
इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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