दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मेरठ से संचालित अवैध हथियार निर्माण इकाई का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए।
राजधानी दिल्ली में अवैध हथियारों के बढ़ते खतरे के बीच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मेरठ (उत्तर प्रदेश) से संचालित एक अवैध हथियार निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से एक का संबंध पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज UAPA मामलों से भी रहा है।
बड़ी कार्रवाई, बड़ा खुलासा
यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच की NR-II यूनिट द्वारा अंजाम दिया गया, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर नीरज शर्मा ने किया और जिसकी निगरानी एसीपी गिरीश कौशिक द्वारा की गई।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता है, जिससे अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है।
सूचना से गिरफ्तारी तक
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब हेड कांस्टेबल सिद्धार्थ को मेरठ से दिल्ली में भारी मात्रा में अवैध हथियारों की सप्लाई की गोपनीय सूचना मिली।
इस सूचना के आधार पर 19 मार्च 2026 को दिल्ली के बादली रेलवे स्टेशन के पास से आरोपी हसीर उर्फ शूटर को गिरफ्तार किया गया।
उसकी तलाशी के दौरान पुलिस को—
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2 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल (7.65 mm)
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1 पेन पिस्टल
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6 जिंदा कारतूस
बरामद हुए। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई

पूछताछ में खुला नेटवर्क
गहन पूछताछ के दौरान हसीर ने खुलासा किया कि वह ये हथियार मेरठ निवासी परवेज उर्फ फर्रू से प्राप्त करता था।
इसके बाद पुलिस ने अदालत से तीन दिन की रिमांड लेकर पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया और एक विशेष टीम का गठन किया गया।
मेरठ में छापा और गिरफ्तारी
26 मार्च 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम ने मेरठ में परवेज के ठिकाने पर छापा मारा। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन सतर्क पुलिस टीम ने उसे कुछ ही दूरी पर पकड़ लिया।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को घर की ऊपरी मंजिल से भारी मात्रा में अवैध हथियार और निर्माण उपकरण मिले। बरामदगी में शामिल हैं—
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24 पेन पिस्टल (7.65 mm)
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78 मैगजीन
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3 बैरल
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3 स्लाइड
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3 पिस्टल बॉडी
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कई छोटे पुर्जे (स्प्रिंग, फायरिंग पिन आदि)
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ड्रिल मशीन सहित अन्य उपकरण
यह पूरी व्यवस्था एक मिनी हथियार फैक्ट्री की तरह काम कर रही थी।
पेन पिस्टल’ बना सबसे बड़ा खतरा
इस ऑपरेशन में कुल 25 पेन पिस्टल बरामद की गईं, जो देखने में साधारण पेन जैसी लगती हैं।
ये पिस्टल भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से छिपाई जा सकती हैं और बेहद नजदीक से घातक हमला करने में सक्षम हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सामान्य जांच के दौरान इनका पता लगाना बेहद मुश्किल होता है, जिससे ये सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास
मुख्य आरोपी परवेज उर्फ फर्रू का आपराधिक इतिहास बेहद गंभीर है।
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करीब 18 साल पहले पहली बार अवैध हथियार मामले में गिरफ्तार
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12 साल पहले मेरठ पुलिस ने दोबारा पकड़ा
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2017 में NIA ने UAPA के तहत गिरफ्तार किया
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खालिस्तानी आतंकियों को हथियार सप्लाई करने का आरोप
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करीब 5 साल जेल में रहा
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2024 में फिर गिरफ्तार
उसके खिलाफ दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दूसरा आरोपी भी शातिर
दूसरा आरोपी हसीर उर्फ शूटर भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।
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7वीं कक्षा तक पढ़ाई
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2021 में ₹50 लाख की चोरी के मामले में गिरफ्तार
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करीब 10 आपराधिक मामले दर्ज
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मुजफ्फरनगर में पुलिस पर फायरिंग में भी शामिल
कैसे काम करता था नेटवर्क?
यह गिरोह अवैध हथियारों का निर्माण कर उन्हें सप्लायर के जरिए दिल्ली और अन्य स्थानों पर भेजता था।
इन हथियारों का इस्तेमाल विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में किया जाना था, जिससे यह नेटवर्क बेहद खतरनाक बन जाता है।
आगे की जांच जारी
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह गिरोह किन-किन राज्यों में सक्रिय था और इसके तार किन बड़े अपराधी नेटवर्क से जुड़े हैं।
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