गाजियाबाद के भोजपुर न्याय पंचायत में आयोजित रात्रिकालीन ग्राम जन चौपाल में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार माँदड़ ने ग्रामीणों की समस्याएँ सुनकर मौके पर समाधान के निर्देश दिए। पेयजल, सड़क, बिजली, आवास, पेंशन और राशन जैसी समस्याओं पर गंभीरता दिखाते हुए प्रशासन ने जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।
गाजियाबाद जनपद में मंगलवार रात उस समय एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब पंचायत भवन भोजपुर में देर रात तक ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सीधा संवाद चलता रहा। गाँव की गलियों से लेकर पंचायत भवन तक लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी। हर किसी के हाथ में अपनी समस्या थी और सामने मौजूद थे जिले के सबसे बड़े अधिकारी — जिलाधिकारी रविंद्र कुमार माँदड़।
प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप ग्रामीण समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से 26 मई 2026 को न्याय पंचायत भोजपुर स्थित पंचायत भवन में “ग्राम जन चौपाल (रात्रिकालीन)” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विश्वास कायम करने की एक मजबूत पहल बनकर सामने आया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी गाजियाबाद श्री रविंद्र कुमार माँदड़ (आईएएस) ने की। उनके साथ ब्लॉक प्रमुख भोजपुर श्रीमती सुचेता सिंह और मुख्य विकास अधिकारी श्री कुमार सौरभ (आईएएस) भी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन कार्यक्रम में शामिल हुए।

पंचायत भवन में देर रात तक चलता रहा संवाद
रात्रिकालीन जन चौपाल की शुरुआत होते ही ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएँ प्रशासन के सामने रखनी शुरू कर दीं। किसी ने गांव में पेयजल संकट की शिकायत की तो किसी ने टूटी सड़कों और बिजली कटौती का मुद्दा उठाया। कई ग्रामीणों ने आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड, सिंचाई व्यवस्था और राजस्व से जुड़े मामलों की समस्याएँ अधिकारियों के सामने रखीं।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार माँदड़ ने एक-एक शिकायत को गंभीरता से सुना। कई मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश देते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए। अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि ग्रामीणों की समस्याओं को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखा जाए बल्कि जमीनी स्तर पर उनका समाधान दिखाई देना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि प्रशासन वास्तव में उनकी समस्याएँ सुनने उनके बीच पहुँचा है। कई बुजुर्ग ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारियों का रात में गाँव आकर चौपाल लगाना अपने आप में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

योजनाओं की जानकारी और लाभ वितरण भी हुआ
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा संचालित सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से मौके पर लाभान्वित भी किया गया।
ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, किसान योजनाएँ, राशन व्यवस्था, स्वच्छता मिशन और ग्रामीण विकास योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और किसी भी समस्या की स्थिति में सीधे प्रशासन को अवगत कराएँ।
“प्रशासन गाँव के द्वार तक पहुँचे” — डीएम रविंद्र कुमार माँदड़
अपने संबोधन में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार माँदड़ ने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि प्रशासन खुद गाँवों तक पहुँचे और आमजन की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर ही सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास का असली अर्थ तभी पूरा होगा जब समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करें ताकि आमजन का विश्वास शासन और प्रशासन के प्रति और अधिक मजबूत हो सके।

ग्रामीण विकास पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है।
वहीं ब्लॉक प्रमुख श्रीमती सुचेता सिंह ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि विकास कार्यों में जनभागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीण प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करेंगे तो गांवों का विकास और अधिक तेज गति से संभव हो सकेगा।
ग्रामीणों में दिखा विश्वास और संतोष
रात्रिकालीन जन चौपाल के दौरान पंचायत भवन में उत्साह और विश्वास का माहौल देखने को मिला।

ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि अधिकारियों द्वारा सीधे गांव में पहुँचकर समस्याएँ सुनना और समाधान का भरोसा देना जनहित में बेहद सराहनीय कदम है।
कई ग्रामीणों ने कहा कि अक्सर समस्याएँ महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी हल नहीं हो पातीं, लेकिन इस चौपाल में अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई का भरोसा देकर उम्मीद जगाई है।
संवाद से समाधान की ओर बढ़ता प्रशासन
गाजियाबाद प्रशासन की यह पहल सिर्फ शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसे का पुल बनाने का माध्यम बन गई। “गाँव की समस्या — गाँव में समाधान” की भावना के साथ आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास और जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
कार्यक्रम का समापन ग्रामीण विकास, जनसेवा और समस्याओं के त्वरित समाधान के संकल्प के साथ किया गया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी इसी तरह गाँव-गाँव जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
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