गाजियाबाद के घंटाघर मार्केट स्थित तीन मंजिला जूतों के शोरूम और गोदाम में मंगलवार दोपहर भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 11 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आग पर काबू पाया। आग में लाखों रुपये का सामान जल गया, लेकिन दुकान बंद होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग का कारण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगलवार दोपहर एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे घंटाघर क्षेत्र में दहशत फैला दी। शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में शामिल घंटाघर मार्केट स्थित एक तीन मंजिला जूतों के शोरूम और उससे जुड़े गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और इमारत से उठता काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई देने लगा।
दोपहर करीब 2:00 से 2:30 बजे के बीच लगी इस आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। गाजियाबाद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राहुल पाल के अनुसार, विभाग को दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली।
सूचना मिलते ही कोतवाली घंटाघर फायर स्टेशन से छह दमकल गाड़ियों को तुरंत रवाना किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, इसलिए साहिबाबाद सहित अन्य फायर स्टेशनों से भी अतिरिक्त वाहन बुलाए गए। कुल 11 दमकल गाड़ियों ने संयुक्त रूप से कई घंटों तक लगातार पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया।
दमकल कर्मियों ने बेहद सावधानी के साथ आग को आसपास की इमारतों तक फैलने से भी रोका, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
आग की चपेट में आने से शोरूम के ऊपरी तल पर रखा जूतों का भारी स्टॉक पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये का माल आग में खाक हो गया है।
फिलहाल नुकसान का अंतिम आकलन किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि शोरूम में बड़ी मात्रा में जूते और अन्य सामान रखा हुआ था, जिसे बचाया नहीं जा सका।
हालांकि दमकल विभाग ने समय रहते आग को नियंत्रित कर लिया, जिससे नीचे के फ्लोर और आसपास की दुकानों को बड़े नुकसान से बचा लिया गया।

मंगलवार की छुट्टी बनी राहत की सबसे बड़ी वजह
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि मंगलवार को गाजियाबाद के अधिकांश बाजार बंद रहते हैं। जिस शोरूम में आग लगी, वह भी बंद था और उसके अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही घटना किसी कार्यदिवस पर होती, जब दुकान में कर्मचारी और ग्राहक मौजूद रहते, तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी।
लोगों ने इसे भगवान का शुक्र बताते हुए कहा कि इस हादसे में केवल आर्थिक नुकसान हुआ, किसी की जान नहीं गई।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच के बाद होगी पुष्टि
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि प्रथम दृष्टया आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रही है। हालांकि अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। विद्युत व्यवस्था, वायरिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

व्यस्त बाजारों में अग्नि सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
घंटाघर गाजियाबाद का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे व्यस्त बाजारों में आग लगने की घटनाएं बार-बार अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने बाजारों में विद्युत वायरिंग, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकासी मार्ग और नियमित सुरक्षा ऑडिट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
यदि आग समय रहते नियंत्रित न होती तो आसपास की कई अन्य दुकानें भी इसकी चपेट में आ सकती थीं, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ सकता था।
प्रशासन करेगा विस्तृत जांच
दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन अब पूरे मामले की जांच करेगा। आग लगने के वास्तविक कारण, सुरक्षा मानकों का पालन, भवन में उपलब्ध अग्निशमन व्यवस्थाओं और विद्युत प्रणाली की भी जांच की जाएगी।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।
गाजियाबाद के घंटाघर बाजार में लगी यह आग एक गंभीर चेतावनी भी है और राहत की खबर भी। राहत इसलिए कि दुकान बंद होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन चेतावनी इसलिए कि भीड़भाड़ वाले व्यापारिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई और 11 फायर टेंडरों की संयुक्त मेहनत से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो यह बताएगी कि आग वास्तव में शॉर्ट सर्किट से लगी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था।
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