नई दिल्ली में शुरू हुए 'रंग अमलान 2026' बाल रंगमंच महोत्सव में 155 बच्चों को थिएटर की पेशेवर ट्रेनिंग दी जा रही है। छह प्रतिष्ठित नाट्य प्रस्तुतियों के साथ यह महोत्सव बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिनय कौशल को नई उड़ान देने का मंच बन रहा है।
बच्चों के भीतर छिपी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिनय प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित 'रंग अमलान 2026' बाल रंगमंच महोत्सव एवं कार्यशाला का रंगमंचीय चरण शनिवार से शुरू हो गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) की संयुक्त पहल के तहत आयोजित इस विशेष महोत्सव में देशभर से आए 155 बच्चों को थिएटर की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
30 जून से प्रारंभ होकर 10 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस आयोजन के अंतर्गत शनिवार को राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडप, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में पहली नाट्य प्रस्तुति के साथ रंगमंचीय कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत हुई। आयोजकों का मानना है कि यह महोत्सव केवल अभिनय सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सामाजिक संवेदनाओं, टीमवर्क, अभिव्यक्ति और रचनात्मक सोच से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।
155 बच्चों को पांच समूहों में दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
इस कार्यशाला में कुल 155 बच्चों को शामिल किया गया है, जिन्हें लगभग 30 से 33 प्रतिभागियों वाले पांच समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह को अनुभवी रंगकर्मियों द्वारा थिएटर के विभिन्न आयामों—अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, अभिव्यक्ति, शरीर की भाषा और समूह समन्वय—का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आयोजकों का उद्देश्य केवल अभिनय सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित करना भी है। इसी दृष्टि से कार्यशाला के साथ-साथ बच्चों को देश के प्रतिष्ठित रंगकर्मियों द्वारा तैयार उच्च स्तरीय बाल नाटकों को देखने का अवसर भी दिया जा रहा है, ताकि वे रंगमंच की विविध शैलियों और प्रस्तुति तकनीकों को करीब से समझ सकें।

छह दिनों तक मंचित होंगी छह विशेष नाट्य प्रस्तुतियां
महोत्सव की शुरुआत शनिवार शाम 6 बजे निर्देशिका निशा त्रिवेदी के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक 'शांति की पुकार' से हुई।
इसके बाद प्रतिदिन शाम 7:15 बजे अलग-अलग नाटकों का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम के अनुसार—
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5 जुलाई – प्रेमचंद की लड़कियां (निर्देशक: जयंत राभा)
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6 जुलाई – भूतनगरी (निर्देशक: गुलशन वालिया)
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7 जुलाई – जाके जाके उड़ी जाए सराय (झुंड के झुंड चिड़ियां उड़ जाती हैं) (निर्देशक: पराग सरमा)
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8 जुलाई – रिबिके, ग्रीन बियर्डेड किंग एंड जायंट बीन स्टॉक (निर्देशक: विक्रम सिंह)
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9 जुलाई – मोबाइल ए सुर? (निर्देशक: हिम्मत सिंह नेगी)
इन सभी प्रस्तुतियों का उद्देश्य बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
NSD निदेशक ने बताया बच्चों के थिएटर का व्यापक विजन
इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा कि स्वस्थ और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए बच्चों में कला और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि NSD अपने थिएटर-इन-एजुकेशन (TiE) कार्यक्रम, चिल्ड्रन्स थिएटर विंग और अन्य इकाइयों के माध्यम से लगातार बच्चों के लिए विशेष थिएटर कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि केवल 2026 की गर्मियों में ही देशभर में 100 से अधिक बाल रंगमंच कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय इलाकों, शहरी वंचित समुदायों, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, कश्मीर के प्रधानमंत्री पैकेज कर्मचारियों के बच्चों तथा सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों को भी शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि NSD का उद्देश्य थिएटर को अधिक समावेशी बनाना है, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चे कला के माध्यम से आगे बढ़ सकें।

DTTDC के सहयोग की सराहना
चित्तरंजन त्रिपाठी ने इस आयोजन में सहयोग के लिए DTTDC का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'रंग अमलान' जैसे कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे संयुक्त आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की उम्मीद जताई।
10 जुलाई को होगा भव्य समापन
कार्यशाला का समापन 10 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अभिमंच सभागार में होगा। इस अवसर पर सभी पांच समूह अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई कला का प्रदर्शन करेंगे।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चे अभिनय, संवाद, टीमवर्क, रचनात्मकता और मंच संचालन जैसी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह समापन कार्यक्रम केवल एक प्रस्तुति नहीं बल्कि बच्चों की दस दिनों की मेहनत और सीख का उत्सव होगा।
बच्चों के समग्र विकास का मंच बन रहा है 'रंग अमलान 2026'
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम की यह संयुक्त पहल बच्चों को रंगमंच के माध्यम से आत्मविश्वास, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ विकसित करने का अवसर प्रदान कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थिएटर केवल अभिनय की कला नहीं है, बल्कि यह बच्चों में संवाद कौशल, भावनात्मक अभिव्यक्ति, अनुशासन, टीम भावना और जीवन कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी न केवल कला से जुड़ती है बल्कि समाज और संस्कृति को समझने का दृष्टिकोण भी विकसित करती है।
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