गाजियाबाद में सेवा ज्योति कलश यात्रा-विकसित भारत का संकल्प 2047 कार्यक्रम में 500 किसानों ने भाग लिया। कृषि विभाग ने आधुनिक खेती, IPM और मिलेट्स पर प्रशिक्षण दिया।
रामलीला मैदान, घंटाघर में आयोजित “सेवा ज्योति कलश यात्रा–विकसित भारत का संकल्प 2047” कार्यक्रम में कृषि विभाग की ओर से करीब 500 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का लाइव प्रसारण भी किया गया।
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी
कार्यक्रम के साथ ही सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (SMAE) के अंतर्गत आत्मा योजना के तहत जनपद स्तरीय दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण में जिले के अलग-अलग विकासखंडों से पहुंचे किसानों के अलावा प्राविधिक सहायक-बी, बीटीएम, एटीएम और अन्य तकनीकी कार्मिकों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. शताक्षी, डॉ. प्रज्ञा और डॉ. क्षितिज ने किसानों को खेती से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई।
रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती पर जोर
प्रशिक्षण में रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती, मृदा एवं बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे विषयों पर किसानों को जानकारी दी गई।
किसानों को बताया गया कि फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक प्रयोग और बीज उपचार महत्वपूर्ण हैं।

कीट नियंत्रण के लिए IPM अपनाने की सलाह
प्रशिक्षण के दौरान समेकित कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management-IPM) पर विशेष जोर दिया गया।
किसानों को फसलों में कीट और रोगों की समय पर पहचान तथा उनकी नियमित निगरानी के बारे में बताया गया। साथ ही जरूरत के अनुसार जैविक, यांत्रिक और रासायनिक उपायों के समन्वित इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
कृषकों को अनावश्यक और अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने आर्थिक क्षति स्तर के आधार पर ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
मिलेट्स के उत्पादन और पोषण पर भी चर्चा
प्रशिक्षण में मिलेट्स फसलों को लेकर भी किसानों को जानकारी दी गई। रागी, कोदो, सांवा और रामदाना जैसी फसलों के उत्पादन और पोषण संबंधी महत्व के बारे में बताया गया।
किसानों को दैनिक आहार में मिलेट्स से बने खाद्य पदार्थों को शामिल करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
किसानों की समस्याओं का किया समाधान
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं और समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों का समाधान करते हुए उन्हें वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित उर्वरक प्रयोग, समेकित कीट प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार के साथ कृषि विभाग के अधिकारी और तकनीकी कार्मिक बिजेंद्र तोमर, सतीश कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के साथ खेती को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
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