दिल्ली दंगों से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि अन्य आरोपियों पर सुनवाई अभी जारी है।
। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं। अदालत ने इससे पहले भी इनकी जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।
दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। दंगों के कुल सात आरोपी—गुलफिशा फातिमा, शरजील इमाम, मीरान हैदर, उमर खालिद, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद शकील खान और शादाब अहमद—ने सर्वोच्च न्यायालय में जमानत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि अन्य आरोपियों के मामलों में सुनवाई अभी जारी है।
सभी आरोपियों को वर्ष 2020 में दिल्ली में दंगा भड़काने की कथित साजिश के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब निर्णय सामने आया है।

आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे पिछले पांच वर्षों से जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ दंगा भड़काने को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं है। इसके बावजूद अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट भी सभी आरोपियों को जमानत देने से मना कर चुका है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान कथित सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषणों के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों में 15 हिंदू समेत कुल 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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