इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया।
स्वच्छता में देशभर में नंबर-1 माने जाने वाले इंदौर शहर की छवि पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत का मामला सामने आया। इस मामले में आज इंदौर हाईकोर्ट में तीन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन पर सख्त रुख अपनाते हुए तीखी फटकार लगाई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस घटना ने देशभर में इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि स्वच्छता में नंबर-वन शहर में ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे हो सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अब यह तय किया जाएगा कि यह मामला क्रिमिनल लायबिलिटी का है या सिविल लायबिलिटी का।
याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईरानी ने बताया कि भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर तीन याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिन पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा पेश की गई मृतकों की संख्या संबंधी स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई और संबंधित विभागों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को स्वच्छ पानी और उचित इलाज मिलना सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस बीच, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में डायरिया और उल्टी-दस्त के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में 38 नए मरीज सामने आए हैं। अब तक सात लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 17 तक पहुंच चुकी है। फिलहाल 110 मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है, जिनमें से 15 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है।
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