ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में महिला मरीज के उपचार के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में ACJM कोर्ट ने थाना बीटा-2 पुलिस को FIR दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता एडवोकेट धीरेंद्र भाटी ने अस्पताल के मालिक कपिल त्यागी, डॉ. हमीदी, डॉ. इकबाल और संबंधित मेडिकल टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला मरीज राखी के ऑपरेशन के बाद भी पेट और कंधे में दर्द बना रहने तथा बाद में दूसरे अस्पताल में दोबारा सर्जरी किए जाने का दावा शिकायत में किया गया है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और उनकी सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
ग्रेटर नोएडा। यथार्थ अस्पताल, ग्रेटर नोएडा में एक महिला मरीज के उपचार के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही का मामला अब पुलिस जांच के दायरे में आ गया है। गौतमबुद्धनगर की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम (ACJM) अदालत ने मामले में दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए थाना बीटा-2 पुलिस को संबंधित आरोपों के आधार पर सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट भी निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करने को कहा है।
मामला महिला मरीज राखी के उपचार से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एडवोकेट धीरेंद्र भाटी ने यथार्थ अस्पताल के मालिक कपिल त्यागी, डॉक्टर हमीदी, डॉक्टर इकबाल और संबंधित मेडिकल टीम पर उपचार में कथित लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अदालत के FIR दर्ज करने के आदेश का अर्थ आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है।
पेट और कंधे में दर्द के बाद अस्पताल पहुंची थीं राखी
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, राखी को पेट में लगातार असहनीय दर्द के साथ कंधे में भी दर्द की शिकायत थी। पेट में फ्लूड एकत्र होने की बात भी सामने आई थी। इसके बाद परिजन उन्हें यथार्थ अस्पताल लेकर पहुंचे।
दस्तावेजों के मुताबिक, 30 मई 2025 को राखी का अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसमें गॉलब्लैडर में पथरी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सक डॉ. हमीदी से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी।
इसके बाद 31 मई 2025 को राखी की लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव रूम से सामान्य कमरे में शिफ्ट कर दिया गया।
ऑपरेशन के बाद भी जारी रहा दर्द
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद भी राखी के पेट और कंधे का दर्द कम नहीं हुआ। परिवार ने चिकित्सकों को लगातार इसकी जानकारी दी। शिकायत के मुताबिक, उन्हें दर्द को ऑपरेशन के बाद होने वाली सामान्य समस्या बताते हुए दवाएं दी जाती रहीं।
इसी दौरान परिजनों को अस्पताल के स्टाफ से कथित तौर पर जानकारी मिली कि गॉलब्लैडर में पथरी के अलावा एक अन्य स्टोन की स्थिति भी सामने आई थी। मरीज की परेशानी बनी रहने पर परिवार ने उपचार को लेकर सवाल उठाए और दूसरी चिकित्सकीय राय लेने का फैसला किया।
दूसरे अस्पताल में दोबारा सर्जरी का दावा
अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि यथार्थ अस्पताल में मरीज की स्थिति और उपचार से जुड़ी पूरी जानकारी परिजनों को समय पर नहीं दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तविक स्थिति की जानकारी पहले मिल जाती तो मरीज को समय रहते किसी अन्य विशेषज्ञ केंद्र में ले जाया जा सकता था।
दस्तावेजों के अनुसार, 4 जून 2025 की शाम एमआरसीपी जांच कराई गई। इसके बाद भी मरीज के पेट और कंधे के दर्द में राहत नहीं मिली। शिकायत के मुताबिक, बाद में राखी को मैक्स अस्पताल, साकेत ले जाया गया।
वहां 6 जून 2025 को दोबारा सर्जरी की गई। शिकायत में दावा किया गया है कि इस दौरान पेट से गॉलब्लैडर का शेष हिस्सा और एक स्टोन निकाला गया। इसके बाद मरीज को राहत मिलने की बात कही गई है।
अस्पताल मालिक और डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता एडवोकेट धीरेंद्र भाटी ने यथार्थ अस्पताल के मालिक कपिल त्यागी, डॉ. हमीदी, डॉ. इकबाल तथा संबंधित मेडिकल टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि चिकित्सकों को मरीज की स्थिति की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद उपचार में हुई कथित कमी को छिपाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब पुलिस जांच के दौरान मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टरों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
शिकायत के बावजूद FIR न होने का आरोप
अदालती दस्तावेजों में उल्लेख है कि शिकायतकर्ता की ओर से मामले को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी।
बताया गया है कि 3 जुलाई 2025 को थाना बीटा-2 में शिकायत दी गई थी। इसके बाद पुलिस उपायुक्त, जिलाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र दिए जाने का उल्लेख है।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से एक मेडिकल कमेटी गठित की गई थी। इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया गया था। समिति की रिपोर्ट और उस पर शिकायतकर्ता की आपत्तियों का भी अदालत के समक्ष उल्लेख किया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभिन्न स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।
12 अगस्त 2026 को कोर्ट का आदेश
मामले में 12 अगस्त 2026 को ACJM-प्रथम, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने आदेश पारित किया। अदालत ने थाना बीटा-2 पुलिस को निर्देश दिया कि मामले में आरोपित बताए गए व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना की जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
अब मामले की अगली कड़ी पुलिस जांच होगी। जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि महिला मरीज के ऑपरेशन के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।
मेडिकल रिकॉर्ड से खुल सकते हैं कई सवालों के जवाब
पूरे मामले में अस्पताल की मेडिकल फाइल, ऑपरेशन नोट, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, एमआरसीपी रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, दवाओं का रिकॉर्ड और दूसरे अस्पताल में हुई सर्जरी से जुड़े दस्तावेज अहम साक्ष्य बन सकते हैं।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि ऑपरेशन के बाद मरीज की लगातार दर्द की शिकायत पर क्या चिकित्सकीय कदम उठाए गए, परिजनों को मरीज की वास्तविक स्थिति की जानकारी किस स्तर तक दी गई और क्या उपचार के दौरान किसी चिकित्सकीय या आपराधिक लापरवाही की स्थिति बनी।
मेडिकल विशेषज्ञों की राय भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यही राय यह स्पष्ट करने में मदद करेगी कि मरीज की स्थिति क्या थी और यथार्थ अस्पताल में अपनाई गई उपचार प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजर
अदालत के आदेश के बाद यह मामला अब शिकायत और आरोपों से आगे बढ़कर औपचारिक पुलिस विवेचना के चरण में पहुंच गया है। FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ राय के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाना होगी।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं। अदालत ने केवल पुलिस को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है; आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही तय होगी।
अब देखना होगा कि थाना बीटा-2 की जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और मेडिकल रिकॉर्ड इस पूरे मामले की कहानी को किस दिशा में ले जाते हैं।
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