उत्तर रेलवे ने कालका-शिमला यूनेस्को विश्व धरोहर रेलखंड पर स्वदेशी एयर ब्रेक सिस्टम से लैस नैरो गेज कोचों का पहला रेक सेवा में शामिल किया।
विरासत रेल यात्रा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर रेलवे ने प्रतिष्ठित कालका-शिमला रेलवे पर स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक सिस्टम से लैस नैरो गेज (NG) कोचों के पहले रेक को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर दिया है।
उन्नत तकनीक से सुसज्जित इस रेक ने 13 फरवरी 2026 को गाड़ी संख्या 52453 कालका-शिमला एक्सप्रेस के रूप में अपनी पहली यात्रा शुरू की। 7 कोच (14 यूनिट) और लोको नंबर 714 ZDM3D के साथ ट्रेन सुबह 06:20 बजे कालका स्टेशन से निर्धारित समय पर रवाना हुई।
पारंपरिक वैक्यूम ब्रेकिंग सिस्टम से आधुनिक एयर ब्रेक सिस्टम की ओर यह बदलाव कालका वर्कशॉप की बड़ी तकनीकी उपलब्धि है, जहां यह रूपांतरण कार्य पूरा किया गया। यह एयर ब्रेक सिस्टम स्थानीय स्तर पर डिजाइन और एकीकृत किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नई बोगियों और ट्रॉलियों को कड़े सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया है, जो हिमालयी क्षेत्र की खड़ी ढलानों और तीखे मोड़ों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह सिस्टम पुराने वैक्यूम ब्रेक की तुलना में बेहतर ब्रेकिंग नियंत्रण और परिचालन दक्षता प्रदान करता है।
यात्री सेवा में शामिल करने से पहले इन कोचों का RDSO द्वारा ऑसिलेशन ट्रायल, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) और नियंत्रणीयता परीक्षण किया गया। साथ ही रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) से सत्यापन और महाप्रबंधक की अंतिम मंजूरी के बाद इन्हें सेवा में शामिल किया गया।
महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि यह पहल विरासत संरक्षण और आधुनिक सुरक्षा मानकों का संतुलन है।
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