लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने आंधी-तूफान के बाद विद्युत व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने निर्बाध बिजली आपूर्ति, शिकायत निस्तारण और संविदाकर्मियों के हितों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए।
लखनऊ में सोमवार को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह बैठक लखनऊ स्थित संगम सभागार में आयोजित की गई, जिसमें हाल ही में आए आंधी-तूफान के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुई विद्युत आपूर्ति बाधाओं, उनकी मरम्मत और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी जनता को किसी प्रकार की बिजली संकट का सामना न करना पड़े और हर परिस्थिति में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बैठक में सभी विद्युत वितरण निगमों (DISCOMs) के कार्यों की डिस्कॉमवार समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक निगम के प्रबंध निदेशकों से विस्तारपूर्वक जानकारी ली कि आंधी-तूफान के कारण कितनी विद्युत अवसंरचना को नुकसान पहुंचा, कितने फॉल्ट आए और कितनी तेजी से मरम्मत कार्य किया गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विद्युत व्यवस्था एक अत्यंत आवश्यक सेवा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली बाधित होने पर तुरंत आपूर्ति बहाल हो सके।\

बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। विशेष रूप से सिद्धार्थनगर जनपद से संबंधित शिकायतों को मंत्री ने प्राथमिकता पर लेते हुए अधिशासी अभियंता ज्ञान प्रकाश के विरुद्ध प्राप्त आरोपों की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री एके शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान है और किसी भी जनप्रतिनिधि या आम नागरिक की शिकायत को अनदेखा करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाए।
बैठक में संविदा कर्मियों से जुड़े मुद्दे ने भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। हाल के दिनों में संविदाकर्मियों को कार्य से हटाए जाने की शिकायतें सामने आने पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी संविदाकर्मी को बिना उचित कारण नौकरी से न हटाया जाए।
उन्होंने कहा कि संविदाकर्मी विद्युत व्यवस्था की रीढ़ हैं और फील्ड स्तर पर उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो और उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यह निर्देश न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि विभागीय व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है।

इसके अलावा बैठक में विधायक निधि से प्रस्तावित विद्युत विभाग की विभिन्न विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि इन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाओं और जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी योजनाओं को समयबद्ध ढंग से लागू किया जाए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि प्रदेश में विद्युत सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल मॉनिटरिंग और फॉल्ट रेस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी समस्याओं को न्यूनतम किया जा सके।
यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक श्री नीतीश कुमार बैठक में भौतिक रूप से उपस्थित रहे, जबकि अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री आशीष गोयल सहित सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे फील्ड स्तर पर जाकर स्थिति का स्वयं मूल्यांकन करें और सुधारात्मक कदम उठाएं।
अंत में ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है—प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना। इसके लिए विभाग को अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
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