उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के लिए 5 जून को राजभवन में 51 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, सफदर हाशमी पुरस्कार और बी.एम. शाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सम्मानित कलाकारों को संस्कृति विभाग के कार्यक्रमों में 70 हजार रुपये मानदेय मिलेगा और उन्हें विशिष्ट श्रेणी का दर्जा दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आगामी 5 जून 2026 को लखनऊ स्थित जनभवन (राजभवन) के गांधी सभागार में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 51 कलाकारों को प्रतिष्ठित अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इस समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल कलाकारों को सम्मानित करेंगी।
इस संबंध में बुधवार को पर्यटन भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मान केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि कलाकारों के भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम भी है। अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले कलाकारों को संस्कृति विभाग के कार्यक्रमों में प्रदर्शन करने पर स्वतः 70 हजार रुपये तक का मानदेय प्राप्त होगा। साथ ही उन्हें विशिष्ट श्रेणी के कलाकारों में शामिल किया जाएगा।
संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने का प्रयास
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सदियों से संगीत, नृत्य, नाटक, लोक संगीत और लोकनाट्य की समृद्ध परंपराओं का केंद्र रहा है। प्रदेश की अनेक विभूतियों ने भारतीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार राज्य का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसके माध्यम से कलाकारों के योगदान को सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले कई कलाकारों को आगे चलकर भारत सरकार द्वारा पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से भी नवाजा गया है।
वर्ष 2021 के पुरस्कार विजेता
वर्ष 2021 के लिए अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वालों में कोलकाता के पंडित दीनानाथ मिश्रा को शास्त्रीय गायन, प्रयागराज के श्रीकांत वैश्य को लोक गायन, वाराणसी के जवाहर लाल को शहनाई वादन तथा लखनऊ के जगमोहन रावत को रंगमंच तकनीकी प्रकाश व्यवस्था के क्षेत्र में सम्मानित किया जाएगा।

इसी वर्ष के लिए रीवा निवासी मनोज कुमार मिश्रा को रंगमंच क्षेत्र में योगदान के लिए सफदर हाशमी पुरस्कार तथा दिल्ली के सतीश आनंद को बी.एम. शाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
वर्ष 2022 के कलाकारों को भी मिलेगा सम्मान
वर्ष 2022 के लिए मथुरा के आनंद कुमार मलिक को शास्त्रीय गायन, माधुरी शर्मा को लोकगायन, लखनऊ के पंडित अनुज मिश्रा को कथक नृत्य और शशिकांत पाठक को पखावज वादन के लिए सम्मानित किया जाएगा।
नई दिल्ली के राजेश सिंह को रंगमंच निर्देशन एवं अभिनय के लिए सफदर हाशमी पुरस्कार तथा भोपाल के कमल जैन को बी.एम. शाह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
वर्ष 2023 के कलाकार भी होंगे सम्मानित
वर्ष 2023 के लिए डॉ. रामशंकर (वाराणसी), मनोज कुमार गुप्ता (प्रयागराज) और डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव (लखनऊ) सहित कई कलाकारों को अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त गाजियाबाद के अजय कुमार को सफदर हाशमी पुरस्कार और गोरखपुर के रविशंकर खरे को बी.एम. शाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
वर्ष 2024 के कलाकारों को भी मिलेगा मंच
वर्ष 2024 के पुरस्कारों में नई दिल्ली के रितेश रजनीश मिश्रा को शास्त्रीय गायन, लखनऊ की मुक्ता चटर्जी को सुगम गायन, रायबरेली के रामरथ पाण्डेय को आल्हा लोकगायन तथा गोरखपुर के सुगम सिंह शेखावत को लोकनृत्य के क्षेत्र में सम्मानित किया जाएगा।
वहीं लखनऊ के शुभदीह राहा को सफदर हाशमी पुरस्कार और भोपाल के संजय मेहता को बी.एम. शाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
63 वर्षों से संस्कृति संरक्षण का मिशन
जयवीर सिंह ने बताया कि संगीत नाटक अकादमी की स्थापना 13 नवम्बर 1963 को की गई थी। पिछले 63 वर्षों से यह संस्था संगीत, नृत्य, नाटक, लोक संगीत और लोकनाट्य की परंपराओं को जीवित रखने का कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1970-71 से अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। वर्ष 2020 तक कुल 510 कलाकार इस सम्मान से सम्मानित किए जा चुके हैं।
कलाकारों के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान
संस्कृति मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्कृति विभाग द्वारा कलाकारों को पोर्टल के माध्यम से लगभग 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न कार्यक्रमों के लिए कोषागार के माध्यम से कलाकारों के खातों में लगभग 7.5 करोड़ रुपये की राशि भेजी जा चुकी है।
वर्तमान में संस्कृति विभाग के पोर्टल पर लगभग 17 हजार कलाकार पंजीकृत हैं।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों में ग्रीष्मकालीन कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
नवोदित कलाकारों को मंच देने के उद्देश्य से नवांकुर योजना संचालित की जा रही है। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।
प्रदेश की विलुप्तप्राय लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें।
प्रेस वार्ता में संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, पर्यटन सलाहकार जे.पी. सिंह, निदेशक शोभित कुमार नाहर, सहायक निदेशक संस्कृति रेनूरंग भारती और डॉ. वीरेन्द्र सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
COMMENTS