योगी सरकार ने उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए फर्जी डिग्री प्रकरण में जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन किया, वहीं पश्चिमी यूपी-एनसीआर को नया शैक्षणिक केंद्र देने के लिए आईआईएमटी ऑफ-कैंपस को हरी झंडी दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। योगी कैबिनेट ने एक ओर जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी, तो दूसरी ओर आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने का निर्णय लिया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। विश्वविद्यालय द्वारा बीपीएड पाठ्यक्रम में फर्जी एवं बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा–2022 में चयन के लिए किया गया। राजस्थान पुलिस की जांच, कुलाधिपति और कुलसचिव की गिरफ्तारी तथा शासन स्तर की जांच समितियों की रिपोर्ट में यह घोटाला प्रमाणित हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की कई धाराओं का उल्लंघन किया, जिसमें डिग्री जारी करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित रूप से फर्जी दस्तावेजों का वितरण, भूमि मानकों की अनदेखी और राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य सूचनाएं न देना शामिल है। इन तथ्यों के आधार पर विश्वविद्यालय के परिसमापन का निर्णय लिया गया। परिसमापन के बाद विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे और वहीं से पूर्व में जारी डिग्रियों का प्रमाणीकरण होगा। इस दौरान संचालन हेतु त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति भी गठित की जाएगी।
वहीं, कैबिनेट ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस के संचालन को मंजूरी देकर पश्चिमी यूपी और एनसीआर को बड़ी शैक्षणिक सौगात दी है। 4.796 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित यह ऑफ-कैंपस क्षेत्रीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
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