गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नाथ परंपरा की साधना, सेवा और लोककल्याण के संदेश को सशक्त किया।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक साधना और लोककल्याण के गहरे संदेश को एक बार फिर सुदृढ़ किया। नाथ परंपरा के पीठाधीश्वर के रूप में उनका यह आध्यात्मिक क्षण केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शांति, समृद्धि और जनसेवा के संकल्प का भी प्रतीक बना।
पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। योगी आदित्यनाथ की साधना में नाथ संप्रदाय की तपस्या, अनुशासन और सेवा-भाव की स्पष्ट झलक दिखी। गोरखनाथ मंदिर सदियों से सनातन संस्कृति और नाथ संप्रदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां धर्म के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों को भी निरंतर बढ़ावा दिया जाता रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरखनाथ पीठ ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का कार्य किया है। चाहे चिकित्सा सेवाएं हों, शिक्षा संस्थानों का विस्तार हो या आपदा के समय मानवीय सहायता—गोरखनाथ मंदिर की भूमिका हमेशा अग्रणी रही है।
योगी आदित्यनाथ का यह आध्यात्मिक क्षण उनके प्रशासनिक नेतृत्व से भी गहराई से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, जहां सुशासन, कानून-व्यवस्था, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण समानांतर रूप से आगे बढ़ते नजर आते हैं। यह पूजा-अर्चना न केवल धार्मिक आस्था का प्रकटीकरण है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास और लोककल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश भी देती है।
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