यूपीएसआरएलएम और आईआईएम लखनऊ के बीच ग्रामीण उद्यम इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए करार हुआ है। इसके तहत 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को 18 महीने तक विशेषज्ञ मेंटरिंग, बिजनेस मैनेजमेंट, डिजिटल ट्रेनिंग, बाजार संपर्क और ऋण सहायता मिलेगी। लक्ष्य उद्यमों के राजस्व में कम से कम 15 प्रतिशत वृद्धि करना है।
गांवों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनके छोटे कारोबार को मजबूत और सफल उद्यमों में बदलने की तैयारी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ने हाथ मिलाया है। इस नई पहल के तहत प्रदेश की 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। खास बात यह है कि यह सहयोग महज कुछ दिनों के प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगले 18 महीनों तक महिला उद्यमियों को लगातार मेंटरिंग और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद दी जाएगी।
शुक्रवार को आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर (आईआईएमएल-ईआईसी) और यूपीएसआरएलएम के बीच ग्रामीण उद्यम इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। आईआईएम लखनऊ के निदेशक यामिनी भूषण पाण्डेय और मिशन निदेशक अरुण कुमार ने समझौते पर हस्ताक्षर कर इस पहल को औपचारिक रूप दिया।
समझौते से पहले केशव मौर्य ने की थीं संयुक्त बैठकें
इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अहम पहल रही। समझौते का मसौदा तैयार होने से पहले उन्होंने संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठकें की थीं। इन बैठकों में उन्होंने साफ निर्देश दिए थे कि योजना के केंद्र में ग्रामीण महिलाएं और उनका आर्थिक हित होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने चयन प्रक्रिया से लेकर वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण तक हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ पूरी प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया था। उनका कहना था कि योजना का वास्तविक लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर उनके हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उनके लिए महिलाओं का आर्थिक विकास पहली प्राथमिकता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में उद्यम चलाने की क्षमता और मेहनत करने का जज्बा मौजूद है। जरूरत उन्हें सही प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, बाजार और पूंजी उपलब्ध कराने की है। सरकार चाहती है कि ग्रामीण महिलाएं केवल अपनी आजीविका चलाने तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनें और आगे चलकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें।
18 महीने तक विशेषज्ञ सिखाएंगे कारोबार बढ़ाने के गुर
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित इस कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को शामिल किया जाएगा।
इन महिला उद्यमियों को 18 महीने तक विशेषज्ञों की मेंटरिंग मिलेगी। इस दौरान उन्हें व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ने और कारोबार से संबंधित जरूरी नियमों के अनुपालन में सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही औपचारिक ऋण तक पहुंच बनाने में भी सहयोग किया जाएगा, ताकि महिलाओं को अपने कारोबार के विस्तार के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में आसानी हो।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिला उद्यमियों को कारोबार की व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने और बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए तैयार करना है। आईआईएम लखनऊ की प्रबंधन विशेषज्ञता और यूपीएसआरएलएम के ग्रामीण नेटवर्क को जोड़कर प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक पहुंच बनाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
18 उद्यमों को चैलेंज फंड, 132 को ब्याज मुक्त ऋण का अवसर
कार्यक्रम में वित्तीय सहयोग के लिए भी अलग-अलग व्यवस्था की गई है। चयनित 150 उद्यमों में से 18 उत्कृष्ट उद्यमों को चैलेंज फंड के माध्यम से अनुदान दिया जाएगा। वहीं, शेष 132 उद्यम सामुदायिक स्तरीय संघ (सीएलएफ) के जरिए ब्याज मुक्त ऋण पाने के पात्र होंगे।
इस व्यवस्था से महिला उद्यमियों को अपने कारोबार की जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता हासिल करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, ऋण और अनुदान का लाभ कार्यक्रम के निर्धारित मानकों और पात्रता के आधार पर दिया जाएगा।
कारोबार की कमाई में 15 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य
इस कार्यक्रम के सामने एक स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है। चयनित महिला उद्यमों के राजस्व में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
इसके लिए महिलाओं को आधुनिक प्रबंधन, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ने के साथ उनके उत्पादों और सेवाओं को बाजार तक पहुंचाने में मदद की जाएगी। उम्मीद है कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से महिला उद्यमी अपने कारोबार की योजना, संचालन और विस्तार को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा सकेंगी।
'दीदियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत ताकत'
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले '100 में 80 हमारा' का नियम अपनाया जाता था। उन्होंने कहा कि मौजूदा डबल इंजन सरकार गरीबों के हक का 100 प्रतिशत पैसा उनके खातों तक पहुंचाने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि गरीबों और महिलाओं के लिए निर्धारित धनराशि का पूरा लाभ उन्हीं तक पहुंचे।
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत ताकत बताते हुए कहा कि उन्हें उद्यमिता, नवाचार और आधुनिक प्रबंधन से जोड़कर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में भागीदार बनाया जाएगा।
अब इस समझौते के बाद सबसे अहम सवाल इसके जमीन पर असर को लेकर है। 150 महिला उद्यमों को मिलने वाली 18 महीने की विशेषज्ञ मेंटरिंग, वित्तीय सहयोग और बाजार तक पहुंच कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के छोटे कारोबार को बड़े अवसरों में बदलने की उम्मीद जरूर बढ़ी है।
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