सुल्तानपुर के दूबेपुर मोड़ पर सड़क सुरक्षा के इंतजाम न होने से एक और दर्दनाक हादसा हुआ। लगातार वायरल हो रहे वीडियो और खबरों के बावजूद जिम्मेदार विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
जनपद में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमहट के निकट धम्मौर मार्ग पर स्थित दूबेपुर मोड़ एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। शनिवार सुबह अंधे मोड़ पर हुए भीषण सड़क हादसे में अलीगढ़ निवासी 32 वर्षीय मेदान्त की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार दूबेपुर मोड़ लंबे समय से दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है। यह मोड़ पूरी तरह अंधा है और यहां कोई रोड साइनेज, चेतावनी बोर्ड या स्पीड ब्रेकर तक मौजूद नहीं है। बीते कुछ वर्षों में इस स्थान पर आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।
हैरानी की बात यह है कि इस खतरनाक मोड़ के वीडियो, फोटो और खबरें लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं। कई बार स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन को आगाह भी किया, लेकिन सुरक्षा के कोई ठोस उपाय आज तक नहीं किए गए।

1 जनवरी से सड़क सुरक्षा अभियान की औपचारिक शुरुआत जरूर की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। खासतौर पर येलो जोन घोषित मार्गों पर भी न तो संकेतक लगाए गए हैं और न ही यातायात नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था की गई है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार अफसरों का ध्यान सड़क सुरक्षा की बजाय केवल मोटी कमाई और कागजी औपचारिकताओं तक सीमित है। सवाल यह है कि आखिर कितनी और जानें जाएंगी, तब जाकर दूबेपुर मोड़ पर सुरक्षा के इंतजाम होंगे?
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