दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने उत्तर प्रदेश के निर्यात को नई गति देने के लिए कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने, निर्यातकों को राहत देने और प्राकृतिक मेंथा उद्योग के संरक्षण की मांग भी उठाई।
उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी निर्यातक राज्यों में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। राजधानी दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड ऑफ ट्रेड की महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी' ने निर्यात से जुड़े कई ऐसे मुद्दे उठाए, जिनका सीधा संबंध प्रदेश के उद्योगों, निर्यातकों और पूर्वी उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति से है।
बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का बेहतर उपयोग, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, देश के निर्यात तंत्र को और मजबूत बनाने तथा वैश्विक व्यापार की चुनौतियों से निपटने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, निर्यात संवर्धन परिषदों और व्यापारिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया।
उत्तर प्रदेश की निर्यात यात्रा का रखा विस्तृत ब्यौरा
बैठक में अपने संबोधन के दौरान मंत्री नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश का निर्यात मूल्य करीब 88 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर अब 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जो राज्य की औद्योगिक क्षमता और बेहतर नीति निर्माण का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार द्वारा विकसित किया गया मजबूत निर्यात इकोसिस्टम है। प्रदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समर्पित निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद तथा सभी 75 जिलों में जिला निर्यात प्रोत्साहन समितियों का गठन किया गया है।
मंत्री नन्दी ने बताया कि आज उत्तर प्रदेश 15 से अधिक औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों का निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही 79 जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त उत्पादों के साथ उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना ने भी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भदोही के इनलैंड कंटेनर डिपो को दोबारा शुरू करने की उठाई मांग
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव पूर्वी उत्तर प्रदेश के निर्यात ढांचे को मजबूत करने से जुड़ा रहा। मंत्री नन्दी ने माधो सिंह, भदोही स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) को पुनः संचालित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को वर्तमान में लंबी दूरी तक माल भेजना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। यदि भदोही स्थित कंटेनर डिपो दोबारा शुरू किया जाता है तो कालीन, हस्तशिल्प, वस्त्र, कृषि एवं अन्य उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी।

NABL प्रमाणित टेस्टिंग लैब्स बढ़ाने की मांग
मंत्री नन्दी ने बैठक में उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) प्रमाणित टेस्टिंग लैब्स की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता भी प्रमुखता से उठाई।
उन्होंने कहा कि निर्यात योग्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए पर्याप्त आधुनिक प्रयोगशालाओं का होना बेहद आवश्यक है। यदि प्रदेश में अधिक NABL प्रमाणित लैब स्थापित होती हैं तो उद्योगों को अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और निर्यात प्रक्रिया तेज एवं अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी लागत पर जताई चिंता
बैठक के दौरान मंत्री नन्दी ने वैश्विक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे फ्रेट चार्ज और ट्रांजिट टाइम दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के छोटे एवं मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत के कारण प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष सहायता या नीति संबंधी उपाय किए जाएं, ताकि उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित न हो।

प्राकृतिक मेंथा उद्योग के संरक्षण की भी उठाई मांग
मंत्री नन्दी ने बैठक में प्राकृतिक मेंथा उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और सिंथेटिक मेंथा उत्पादों के लिए वर्तमान में एक समान एचएसएन (Harmonized System of Nomenclature) कोड होने के कारण कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आती हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि प्राकृतिक और सिंथेटिक मेंथा के लिए अलग-अलग HSN कोड निर्धारित किए जाएं। उनका कहना था कि इससे प्राकृतिक मेंथा उत्पादकों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी और इस उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित पहचान एवं प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
देशभर के उद्योग जगत ने किया विचार-विमर्श
बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, विभिन्न राज्यों के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री, अम्बर एंटरप्राइजेज इंडिया लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं सीईओ जसबीर सिंह, व्यापार एवं उद्योग संगठनों, निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
इस दौरान मुक्त व्यापार समझौतों के बेहतर उपयोग, वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स सुधारने और निर्यात आधारित आर्थिक विकास को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई।बोर्ड ऑफ ट्रेड की यह बैठक केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे तेजी से उभरते औद्योगिक राज्य की आवश्यकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखने का मंच भी बनी। भदोही के इनलैंड कंटेनर डिपो को पुनः शुरू करने, NABL लैब्स की संख्या बढ़ाने, पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों को राहत देने और प्राकृतिक मेंथा उद्योग के संरक्षण जैसे प्रस्ताव यदि लागू होते हैं, तो इससे न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राज्य के निर्यात क्षेत्र को नई गति मिलने की संभावना है। आने वाले समय में इन प्रस्तावों पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और उनके क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की निगाहें टिकी रहेंगी।
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