Saturday, July 04, 2026

15 साल से कानून को दे रहा था चुनौती! गुजरात में हत्या-डकैती का दोषी आजीवन कारावास प्राप्त कैदी आखिरकार अयोध्या से STF के हत्थे चढ़ा

2008 में गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी में सुरक्षा गार्ड की हत्या कर डकैती की वारदात को दिया था अंजाम, 2009 में मिली थी उम्रकैद; 2011 में इलाज के दौरान जेल सुरक्षा को चकमा देकर हुआ था फरार, यूपी STF और गुजरात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 15 वर्ष बाद गिरफ्तारी।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 04 2026 | 17:37:00 PM
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उत्तर प्रदेश एसटीएफ और गुजरात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 15 वर्षों से फरार चल रहे हत्या और डकैती के मामले में आजीवन कारावास प्राप्त दोषी घनश्याम वर्मा उर्फ करन उर्फ बाबा को अयोध्या से गिरफ्तार किया गया। आरोपी वर्ष 2011 में बड़ौदा के एसएसजी अस्पताल से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था और वर्षों तक अलग-अलग राज्यों में पहचान छिपाकर रह रहा था।

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उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसका इंतजार गुजरात पुलिस पिछले डेढ़ दशक से कर रही थी। वर्ष 2008 में गुजरात के भरूच स्थित गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी में सुरक्षा गार्ड की हत्या कर डकैती की सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला और आजीवन कारावास की सजा पाने के बाद न्यायिक अभिरक्षा से फरार हुआ दोषी आखिरकार 15 वर्ष बाद कानून के शिकंजे में आ गया।

उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने गुजरात पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर घनश्याम वर्मा उर्फ करन उर्फ बाबा को जनपद अयोध्या के कैंट थाना क्षेत्र स्थित कैलाश टायर (सीएट) एजेंसी, सआदतगंज बाईपास से गिरफ्तार किया। आरोपी मूल रूप से गोंडा जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम खमरिया हरिवंश का रहने वाला है।

15 साल पुरानी हत्या और डकैती के मामले में मिली बड़ी सफलता

एसटीएफ के अनुसार 16 फरवरी 2008 को गुजरात के भरूच जिले में स्थित गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी में हथियारबंद बदमाशों ने सुरक्षा गार्ड की हत्या कर डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में थाना भरूच ए-डिवीजन में धारा 396 भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

जांच और सुनवाई के बाद न्यायालय ने 1 सितंबर 2009 को घनश्याम वर्मा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

जेल से अस्पताल और फिर पुलिस को चकमा देकर फरार

सजा के बाद आरोपी को पहले जूनागढ़ जेल में रखा गया। बाद में उसे बड़ौदा जेल स्थानांतरित किया गया।

एसटीएफ के मुताबिक इलाज के लिए जब आरोपी को एसएसजी अस्पताल, बड़ौदा ले जाया गया, तब 2 जनवरी 2011 को उसने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी को धक्का देकर फरार होने में सफलता हासिल कर ली।

इस घटना के बाद थाना रावपुरा, बड़ौदा में धारा 224 आईपीसी के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2013 में गुजरात के वलसाड जिले के वापी टाउनशिप थाना क्षेत्र में शस्त्र अधिनियम के तहत भी उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ।

तब से आरोपी लगातार फरार चल रहा था और गुजरात पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

गुजरात पुलिस ने मांगा था यूपी STF का सहयोग

लंबे समय तक आरोपी का कोई सुराग नहीं मिलने पर गुजरात पुलिस ने उत्तर प्रदेश एसटीएफ से सहयोग मांगा।

इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक विमल कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एसटीएफ लखनऊ की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और अभिसूचना संकलन के माध्यम से आरोपी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी।

आखिरकार 4 जुलाई 2026 को निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार राय के नेतृत्व में एसटीएफ लखनऊ तथा गुजरात के वलसाड पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी को अयोध्या से गिरफ्तार कर लिया।

पहचान बदलकर वर्षों तक करता रहा नौकरी

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह 14 वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ लुधियाना चला गया था, जहां उसने वाहनों की व्हील बैलेंसिंग का काम सीखा।

इसके बाद वह गुजरात के सूरत पहुंचा और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के संपर्क में आ गया। इन्हीं लोगों के साथ मिलकर उसने वर्ष 2008 में भरूच स्थित गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी में हत्या और डकैती की वारदात को अंजाम दिया।

जेल से फरार होने के बाद वह अमृतसर चला गया, जहां मोटर मैकेनिक के रूप में काम करने लगा।

कोरोना महामारी के दौरान वह अपने पैतृक गांव गोंडा लौट आया। कुछ वर्षों बाद उसने अयोध्या में आकर कैलाश टायर (सीएट) एजेंसी में व्हील बैलेंसिंग का काम शुरू कर दिया और सामान्य जिंदगी जीने का प्रयास करता रहा ताकि किसी को उस पर शक न हो।

अब गुजरात ले जाने की तैयारी

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अयोध्या के कैंट थाने लाया गया, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

वलसाड पुलिस के उपनिरीक्षक संदीप आर. सुसलादे ट्रांजिट रिमांड की कार्रवाई कर रहे हैं, जिसके बाद आरोपी को आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए गुजरात ले जाया जाएगा।

संयुक्त अभियान में कई अधिकारी रहे शामिल

इस कार्रवाई में निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार राय, निरीक्षक दीपक सिंह, उपनिरीक्षक उमाशंकर, मुख्य आरक्षी अंकित पांडेय (एसटीएफ लखनऊ) तथा वलसाड पुलिस के उपनिरीक्षक संदीप आर. सुसलादे की संयुक्त टीम शामिल रही।

एसटीएफ का कहना है कि तकनीकी निगरानी, लगातार सूचना संकलन और अंतरराज्यीय समन्वय के कारण इस लंबे समय से फरार दोषी तक पहुंचना संभव हो सका।

अपराधिक इतिहास

गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध निम्नलिखित प्रमुख मुकदमे दर्ज हैं—

  • वर्ष 2008 में भरूच (गुजरात) में हत्या और डकैती (धारा 396 IPC)
  • वर्ष 2011 में पुलिस अभिरक्षा से फरार होने का मामला (धारा 224 IPC), थाना रावपुरा, बड़ौदा
  • वर्ष 2013 में शस्त्र अधिनियम के तहत थाना वापी टाउनशिप, वलसाड (गुजरात)

एसटीएफ का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर उसके फरारी के दौरान के संपर्कों और संभावित अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

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